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Sunday, September 26, 2021

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सोशल मीडिया और ऑनलाइन पोर्टलों की मनमानी से सुप्रीम कोर्ट खफा

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केंद्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस (आईटी रूल्स) जारी किये जाने, इसकी संयुक्त राष्ट्रसंघ सहित चतुर्दिक आलोचना और इसे न्यायपालिका में चुनौती दिए जाने के बीच ट्विटर, फेसबुक या यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया कंपनियों की कोई जवाबदेही न होने तथा वेब पोर्टल के लिए कोई प्रभावकारी कानून न होने से सोशल मीडिया और ऑनलाइन पोर्टलों में समाचारों को सांप्रदायिक रंग देने के प्रयासों से उच्चतम न्यायालय खफा है और आने वाले दिनों में यदि इन पर क़ानूनी अंकुश लगा दिया जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।  

दिल्ली निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात की बैठक के सांप्रदायीकरण के लिए मीडिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली रिट याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमना ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन पोर्टलों में समाचारों को सांप्रदायिक रंग देने के प्रयासों के बारे में चिंता व्यक्त की। चीफ जस्टिस ने अफसोस जताया कि वेब पोर्टल किसी चीज से शासित नहीं होते हैं और सोशल मीडिया कंपनियां केवल शक्तिशाली लोगों की सुनती हैं, संस्थानों या आम लोगों की नहीं।

उन्होंने कहा कि ट्विटर, फेसबुक या यूट्यूब,वे हमें कभी जवाब नहीं देते हैं और कोई जवाबदेही नहीं है। संस्थानों के बारे में उन्होंने बुरा लिखा है और वे जवाब नहीं देते हैं और कहते हैं कि यह उनका अधिकार है। उन्हें केवल शक्तिशाली पुरुषों की चिंता है, जजों की नहीं, संस्थानों या आम आदमी। हमने यही देखा है। चीफ जस्टिस ने यह भी पूछा कि क्या यूट्यूब जैसे वेब पोर्टलों को नियंत्रित करने वाले कोई नियम हैं, जो एक मिनट में इतना कुछ दिखाते हैं। न्यूज को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश रहती है और यही सबसे बड़ी समस्या है। इससे आखिर में देश का नाम खराब होता है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि आप यूट्यब पर जाते हैं, तो एक मिनट में इतना कुछ दिखाया जाता है। आप देख सकते हैं कि कितनी नकली खबरें हैं। वेब पोर्टल किसी भी चीज से नियंत्रित नहीं होते हैं। समाचारों को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया जाता है और यह एक समस्या है। अंतत: इससे देश का नाम खराब होता है ।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि न केवल सांप्रदायिक बल्कि प्रायोजित खबरें भी दिखाई जाती हैं। मेहता ने कहा कि नए आईटी नियमों का उद्देश्य उन्हीं मुद्दों को संबोधित करना है, जिनकी चीफ जस्टिस ने चर्चा की है। तुषार मेहता ने उल्लेख किया कि आईटी नियमों को विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष चुनौती दी गई है और केंद्र सरकार ने उन सभी को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए एक याचिका दायर की है। सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से वर्तमान याचिकाओं के साथ स्थानांतरण याचिकाओं को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

पीठ में शामिल जस्टिस सूर्यकांत ने आईटी नियमों पर केंद्र की स्थानांतरण याचिकाओं को याचिकाओं के वर्तमान बैच के साथ सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की। याचिकाकर्ता को अपनी प्रार्थनाओं में संशोधन करने की छूट दी गई थी। मामले को 6 सप्ताह के बाद पोस्ट किया जाएगा।

केबल रूल्स 2021 में संशोधन और डिजिटल मीडिया आईटी रूल्स 2021को चुनौती देने वाली याचिकाओं को उच्चतम न्यायालय में लाए जाने की अर्जी पर चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ में सुनवाई करते हुए पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इससे निपटने के लिए कोई तंत्र है? आपके पास इलेक्ट्रानिक मीडिया और अखबारों के लिए तो व्यवस्था है लेकिन वेब पोर्टल के लिए कुछ करना होगा। कई हाईकोर्ट्स में इन दोनों कानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं लंबित हैं।

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर सोशल और डिजिटल मीडिया पर निगरानी के लिए आयोग बनाने के वायदे का क्या हुआ? इस पर कितना काम आगे बढ़ा! एनबीए ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इन नियमों को चुनौती दी है क्योंकि ये नियम मीडिया को स्वायत्तता और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन नहीं करते।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमारे विशेषज्ञों ने इसी संतुलन को व्यवस्थित करने के लिए हर दृष्टिकोण से ये नियम मीडिया और नागरिकों को तीन स्तरीय सुविधा देते हैं। चीफ जस्टिस  ने पूछा कि हम ये स्पष्टीकरण चाहते हैं कि प्रिंट प्रेस मीडिया के लिए नियमन और आयोग है, इलेक्ट्रानिक मीडिया स्वनियमन करते हैं लेकिन बाकी के लिए क्या इंतजाम है? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टीवी चैनल्स के दो संगठन हैं लेकिन ये आईटी नियम सभी पर एक साथ लागू हैं। सभी याचिकाओं पर छह हफ्ते बाद एक साथ सुनवाई होगी।

य‌ाचिकाओं में एक प्रतिवादी न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने पीठ को बताया कि केरल हाईकोर्ट ने उन्हें नए आईटी नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। चीफ जस्टिस की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक मामले में एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ को बताया कि ट्विटर ने उन्हें डिप्लेटफॉर्म किया है और उन्होंने अपने खाते के निलंबन को चुनौती देने वाला मामला दर्ज किया है।

27 नवंबर को पिछली सुनवाई के दौरान तबलीगी जमात के मामले में कुछ मीडिया की गलत रिपोर्टिंग पर सवाल उठाने वाली जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर सवाल उठाया था और कहा था कि केंद्र सरकार ने टीवी के कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए मैकेनिज्म के बारे में कोई बात नहीं की। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि पहले तो केंद्र सरकार ने सही तरह से हलफनामा दायर नहीं किया और जब किया तो उसमें रेगुलेटरी मैकेनिज्म के बारे में बताया जाना चाहिए कि कैसे टीवी के कंटेंट को डील किया जाएगा।

पिछली सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि विचार अभिव्यक्ति के अधिकार का हाल के दिनों में सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2020 को उस याचिका पर केंद्र व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था जिसमें याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा ए हिंद ने अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि कुछ टीवी चैनलों ने कोरोना के दौरान तबलीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज की घटना से संबंधित फर्जी खबरें दिखाई। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील दुष्यंत दवे ने कहा था कि मरकज मामले में फेक न्यूज दिखाने से देश की सेक्युलर छवि को ठेस पहुंचा है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी की है। केंद्र सरकार ने आज बिल्कुल नए कोड ऑफ एथिक्स पेश किए हैं, जिनमें ऑनलाइन कंटेट को लेकर नए नियम और कानून बनाए गए हैं, जिनमें विशेष सावधानी बरती जाएगी। अब सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर किस प्रकार कंटेंट जाएगा इसके लिए गाइडलाइन्स जारी कर दी गई हैं। सोशल मीडिया कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए नए नियमों के तौर पर काम नई चीजें लागू होंगी। सरकार ने यूजर्स के स्वैच्छिक वेरिफिकेशन, अनुपालन अधिकारी और शिकायत अधिकारी का भी प्रस्ताव किया है। इसके अलावा सरकार ने 24 घंटे और सातों दिन कॉन्टेक्ट करने के लिए अधिकारी नियुक्त करने के लिए भी कहा है।

वह व्यक्ति कानून या नियमों के अनुसार किए गए उनके आदेशों या जरूरतों के हिसाब से काम करेगा। बिल्कुल नए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नियम 2021 सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग सर्विस को एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाएगा। नए नियमों में डिजिटल और ऑनलाइन मीडिया सेफ्टी के तहत काम करेंगी।

अब अगर किसी सोशल मीडिया जैसे फेसबुक या ट्विटर पर कोई आपत्तिजनक कंटेट डाला जाता है तो उसे सरकारी आदेश के बाद 24 घंटे की समय सीमा में हटाना है। केंद्र सरकार ने कंप्लेंट का समाधान निकालने के लिए एक थ्री-टियर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। थ्री-टियर स्ट्रक्चर (लेवल 1) एप्लिकेबल एंटीटी द्वारा सेल्फ रेगुलेशन (लेवल 2) एप्लिकेबल एंटीटी की सेल्फ-रेगुलेटिंग बॉडी का सेल्फ रेगुलेशन (लेवल 3) केंद्र सरकार द्वारा ओवरसीज मैकेनिज्म।

ऐसा कंटेंट जो कि देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करता है, ऐसा कंटेंट जो कि राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा या धमकी भरा है, ऐसा कंटेंट जो कि भारत के मित्र देशों के संबंध के लिए हानिकारक है उसे नहीं दिखाया जा सकता है। सरकार के नए कानून ऑनलाइन कंटेंट प्लटफॉर्म्स को सावधान करते हैं कि वह देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित नहीं करें।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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