Monday, October 2, 2023

जाकिया जाफरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सिब्बल ने कहा-गुजरात दंगा मामले में जांच एजेंसियों ने आरोपियों की मदद की थी

उच्चतम न्यायालय में वरिष्‍ठ वकील कपिल सिब्बल ने जब यह कहा कि जांच एजेंसियों ने गुजरात दंगों के मामले में आरोपियों की मदद की थी और जांच एजेंसियों का आरोपियों की मदद का यह ट्रेंड अब कई राज्यों में हो रहा है। इस पर उच्चतम न्यायालय ने आपत्ति जाहिर की और कहा कि फिर हम हस्तक्षेप करते हैं, इस मामले में उस विचारधारा को मत लाइए। सिब्बल ने कहा कि मैं किसी राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहता, केवल कानून के शासन को कायम रखना चाहता हूं।

2002 के गुजरात दंगा मामले में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट के खिलाफ जाकिया जाफरी की याचिका पर उच्चतम न्यायालय में जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार कि पीठ के समक्ष बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। जाकिया जाफरी, दिवंगत कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं, जिनकी अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसाइटी में हत्या कर दी गई थी।

जाकिया की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्‍ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जांच एजेंसियों ने गुजरात दंगों के मामले में आरोपियों की मदद की थी। जांच एजेंसियों का आरोपियों की मदद का यह ट्रेंड अब कई राज्यों में हो रहा है। मामले की जांच करने वाली एसआईटी की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि सिब्बल गुजरात के तत्कालीन सीएम (नरेंद्र मोदी) के खिलाफ आरोपों को क्यों नहीं पढ़ रहे हैं, खासकर जब जाकिया जाफरी की शिकायत के सभी आरोप गुजरात के तत्कालीन सीएम के खिलाफ हैं। पूरी विरोध याचिका तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ है। आरोप लगाया गया था कि गुजरात के सीएम ने ट्रेन जलने के बाद 72 घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। हर आरोप गुजरात के तत्कालीन सीएम के खिलाफ है। वह इसे क्यों नहीं पढ़ना चाहते? अगर ये आरोप नहीं है तो और कुछ नहीं है।

इस पर सिब्बल ने कहा कि मुझे लोगों के साथ व्यवहार करने में दिलचस्पी नहीं है। बल्कि जिस तरह से राज्य ने प्रतिक्रिया दी है, उस पर है। मैं उस स्थिति में नहीं रहना चाहता, जहां मुझे किसी ऐसी बात पर बहस करने के लिए कहा जाए जो मैं नहीं चाहता। मेरे काबिल दोस्त कीचड़ भरे पानी में भेजना चाहते हैं। मैं उनके कहने के बाद भी नहीं जाऊंगा। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।

2002 के गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी हत्याकांड में मारे गए कांग्रेस विधायक एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देते हुए एक विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि हमने सुविधा संबंधी शिकायत दर्ज की है और 3 खंड भी जमा किए हैं। मामले में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने डीजीपी के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई जिसमें आरोप लगाया गया कि गोधरा की उस भयानक घटना से पहले भी, कुछ पूर्व घटनाएं थीं जिन्होंने सांप्रदायिक दंगे को भड़काया।

कपिल सिब्बल ने सबूत पेश करते हुए कहा कि मेरे पास सबूत हैं, और ये मेरे द्वारा नहीं बल्कि खुफिया अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। इस सबूत को ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि अपराध किया गया है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य है कि पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी, अभद्र भाषा प्रयोग में लायी जा रही थी, लोगों को झूठी जानकारी प्रदान की जा रही थी।

सूचना को नोट करने और संज्ञान लेने के लिए मजिस्ट्रेट का कर्तव्य है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या एसआईटी ने कहा कि कोई मामला नहीं बनता है, यह पूरी तरह अप्रासंगिक है। न तो मजिस्ट्रेट ने और न ही न्यायालय ने ऐसा किया है। उन्होंने बताया कि 9 जनवरी, 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में रिकॉर्ड किया कि मामले की जटिलता और गंभीरता को देखते हुए, बहुत बड़ी संख्या में गवाहों की जांच की जानी है और राज्य सरकार से बड़ी संख्या में दस्तावेज प्राप्त किए जाने हैं। सिब्बल ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह राज्य की प्रशासनिक विफलता है जिससे मैं चिंतित हूं। मैं सिर्फ जांच चाहता हूं।

कपिल सिब्बल ने कहा कि जब यह सारी सामग्री शिकायत के आधार पर एकत्र की गई थी, यह गुलबर्ग तक ही सीमित नहीं थी। शिकायतकर्ता गुलबर्ग का रहने वाला था, इसलिए वहां भेजा गया। सिब्बल ने एसआईटी रिपोर्ट के जरिए कोर्ट का रुख किया। उन्होंने कहा कि हम एक प्राथमिकी का प्रस्ताव कर रहे थे, लेकिन अदालत ने कहा नहीं, एफआईआर की क्या जरूरत है हम आपको मजिस्ट्रेट के पास भेज रहे हैं। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर हम कोर्ट को कुछ बताते हैं और कोर्ट कहता है कि मैं इसे नहीं देखूंगा, हम कहां जाएं, हम किस कोर्ट में जाएं। इसकी जांच क्यों नहीं हुई?

पेश की गयी रिपोर्ट पर पीठ द्वारा पूछा गया कि रिपोर्ट क्लोजर नहीं थी, इस पर जवाब देते हुए सिब्ब्ल ने कहा कि यह एसआईटी की पहली रिपोर्ट थी। पीठ द्वारा कहा गया कि हमें क्लोजर रिपोर्ट देखनी है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट भी जाकिया की शिकायत से संबंधित है जो गुलबर्ग तक सीमित नहीं है। गुजरात दंगे के दौरान हिंसा फैलाने में पुलिस की मिलीभगत के साथ ब्यूरोक्रेसी की निष्क्रियता और साजिश भी शामिल थी।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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