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कोरोना से लड़ने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं संबंधी सरकार की तैयारी नाकाफी

नई दिल्ली। भारत में कोरोना से लड़ने के लिए ऊपरी स्तर पर जो भी माहौल बनाया गया हो लेकिन उसके लिए जरूरी आंतरिक तैयारियों का घोर अभाव है। यह बात अब उस समय खुलकर सामने आ रही है जब वायरस से प्रभावित लोगों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा है। स्पेन से आए कोरोना से प्रभावित ऐसे संभावित लोगों को जब क्वैरेंटाइन के लिए ले जाया गया तो उसकी असलियत सामने आ गयी।

इन प्रभावितों में से एक ने न्यूज़ क्लिक पोर्टल को बताया कि संभावित मरीज़ों को क्वैरंटाइन करने के लिए बनाए गए आइसोलेशन कैंपों की व्यवस्था बेहद लचर है। उनमें न तो ज़रूरी सुविधाएं हैं और न ही वहाँ लोगों को ज़्यादा दिनों तक रखे जाने की व्यवस्था। उन कैंपों की हालत और भी दयनीय है।

मनन शर्मा उन्हीं में से एक हैं। शर्मा उन 25 संदिग्ध लोगों में शामिल थे जो सोमवार को स्पेन से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे हैं। उन्होंने बताया कि “तकरीबन 60 यात्री क़तर एयरवेज़ से सुबह एयरपोर्ट पर उतरे। इन 60 यात्रियों में 25 के कोरोना से प्रभावित होने की आशंका थी। उन्हें बग़ैर थर्मल चेकिंग के अलग कर दिया गया और एक कमरे में बैठा दिया गया।

तीन-चार घंटे इंतज़ार करने के बाद हमें नरेला स्थित सुविधा केंद्र ले जाया गया। जब हम साइट पर पहुँचे तो देखा कि कमरों की हालत दयनीय थी। क्योंकि यह निर्माणाधीन बिल्डिंग थी। हमें पीने के लिए और न ही हाथ धोने के लिए पानी था। शौचालय इस कदर गंदे थे कि उनका इस्तेमाल करने पर हम दूसरे वायरसों के शिकार हो सकते थे। इस बीच उन लोगों ने हम लोगों को कुछ खाने के लिए देना भी मुनासिब नहीं समझा।”

शर्मा ने बताया कि संदिग्धों को केवल एक आत्मघोषणा वाले फार्म पर हस्ताक्षर करने के बाद घर जाने के लिए कह दिया गया जिसमें लिखा गया था कि वे ख़ुद को अगले 14 दिनों तक के लिए लोगों से अलग रखेंगे। सैंपल लिए जाने के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने बताया कि “उन्होंने हमारा बुख़ार नापा और फिर जाने दिया। मैं नहीं सोचता कि इस रवैये से हम नियंत्रित (कोरोना को) कर सकते हैं।”

इसी तरह की चीजें द्वारका के पास पुलिस ट्रेनिंग एकैडमी में बने दूसरे कैंप में भी देखने को मिलीं। एक यात्री ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि संदिग्धों को बग़ैर किसी बचाव का उपाय किए एक बस में लाद दिया गया और फिर उन्हें कैंप भेज दिया गया। और उन यात्रियों को अलग रखने के लिए होटलों में शिफ़्ट कर दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक साक्षात्कार में एक छात्र ने बताया कि “क्वैरंटाइन सेंटरों पर सुविधाएं बेहद लचर हैं। अलग रखने के निर्देश पर वो कैसे 8 लोगों को एक कमरे में रख सकते हैं? यहाँ तक कि वाशरूम भी बहुत गंदे थे।”

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए काम करने वालों का कहना है कि ऐसा सरकार द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य के मद के ख़र्चों में लगातार कटौती के चलते बन रही जेहनियत का यह नतीजा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्ध संगठन जन स्वास्थ्य अभियान ने एक बयान में कहा कि “हम नहीं जानते कि सामुदायिक लेनदेन स्थापित हुआ है या नहीं। और न ही बीमारी के फैलने के स्तर के बारे में हमको पता है। क्योंकि हमारी टेस्टिंग की मौजूदा क्षमता बेहद सीमित है। इस तरह के परीक्षण की ग़ैरमौजूदगी में बीमारियों के क्लस्टर फैल सकते हैं और नोटिस में आने से पहले वो रूप ले सकते हैं।“

इसमें आगे कहा गया है कि “एक बार अगर सामुदायिक आदान-प्रदान स्थापित हो गया तो फिर आँकड़ों में खतरनाक स्तर तक बढ़ोत्तरी होगी।…..यह बीमारी देश की मौजूदा बालिग़ आबादी के 30 से लेकर 50 फ़ीसदी लोगों को संक्रमित कर सकती है। और इसमें अगर एक फ़ीसदी के भी मौत की दर तय की जाए तो मरने वालों की संख्या लाखों में हो सकती है।“

स्वास्थ्य पर खर्चे में हो रही लगातार कटौती अब देश पर भारी पड़ रही है। जो टेस्ट किट्स और वैक्सीन विकसित न कर पाने के नतीजे के तौर पर सामने आ रही है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के पूर्व वैज्ञानिक सत्यजीत रथ ने बताया कि देश में स्वास्थ्य इंफ़्रास्ट्रक्चर इस संकट से निपटने के लिए नाकाफ़ी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा बीमारी के वैश्विक ख़तरे को देखते हुए सरकार को अपनी तैयारियों की फिर से समीक्षा करनी चाहिए। जिस तरह से यह बीमारी फैल रही है अगर उसमें एक फ़ीसदी लोग भी उसके शिकार बनते हैं तो यह संख्या एक करोड़ के आस-पास होगी।

इसमें अगर 80-90 फ़ीसदी का इलाज हो जाता है उसके बाद भी 10 लाख लोग बचेंगे। अब इन मरीज़ों के इलाज के लिए आईसीयू से लेकर तमाम क़िस्म की जटिल स्वास्थ्य सुविधाओं की ज़रूरत पड़ेगी। लेकिन हमारी क्षमता क्या है? मौजूदा समय में हमारे पास देश में 70 हज़ार आईसीयू हैं। इन यूनिटों के लिए देश में अलग तरह की नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ़ की ज़रूरत होगी। जिन्हें ऑपरेटिंग वेंटिलेटर को संचालित करने की जानकारी हो।

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This post was last modified on March 19, 2020 10:36 am

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