Tuesday, October 19, 2021

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सुप्रीम कोर्ट में पेगासस मामले की अगली सुनवाई तक कुछ नहीं करेगी पश्चिम बंगाल की न्यायिक जांच समिति

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पश्चिम बंगाल सरकार पेगासस मुद्दे पर उसके द्वारा गठित न्यायिक जांच की कार्रवाइयों को उच्चतम न्यायालय में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई तक स्थगित रखेगी। यह मौखिक आश्वासन पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दिया। उन्होंने बताया कि वह अदालत के संदेश को राज्य सरकार तक पहुंचाएंगे। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित न्यायिक आयोग के कामकाज पर रोक लगाने के लिए कोई आदेश पारित करने से परहेज किया। उच्चतम न्यायालय ने संकेत दिए हैं कि वह अगले हफ्ते पेगासस जासूसी मामले की जांच पर आदेश दे सकता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि यह राष्ट्रव्यापी मसला है। हम पूरे मामले को अगले हफ्ते देखेंगे।  

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जब तक अदालत मामले पर विचार कर रही है, वह पश्चिम बंगाल सरकार से संयम दिखाने और पेगासस मुद्दे पर उसके द्वारा गठित न्यायिक जांच के लिए आगे बढ़ने से पहले इंतजार करने की अपेक्षा करती है। हालांकि, न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित न्यायिक आयोग के कामकाज पर रोक लगाने के लिए कोई आदेश पारित करने से परहेज किया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने मौखिक आश्वासन दिया कि वह अदालत के संदेश को राज्य सरकार तक पहुंचाएंगे।

चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने पेगासस मुद्दे पर अन्य याचिकाओं के साथ पश्चिम बंगाल सरकार की अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली याचिका को टैग किया, जिन्हें अगले सप्ताह सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है। पीठ ग्लोबल विलेज फाउंडेशन नामक एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया गया था, जो पेगासस स्पाइवेयर घोटाले से संबंधित आरोपों की जांच करेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय इस मामले पर विचार कर रहा है तो समानांतर जांच नहीं हो सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिसूचना राज्य सरकार की क्षमता से परे है क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से संबंधित मुद्दे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। साल्वे ने कहा कि कृपया देखें कि जब अदालत मामले की सुनवाई कर रही है तो वहां की कार्यवाही में कुछ नहीं किया जा सकता। उन्होंने जनता को नोटिस जारी कर सूचना मांगी है।

जब वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने साल्वे की दलीलों पर आपत्ति जताई, तो चीफ जस्टिस ने उनसे कहा, कि जब हम अन्य मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, तो हम कुछ संयम की उम्मीद करते हैं। वर्तमान मुद्दा अन्य मुद्दों से जुड़ा है। इसका उस पर असर होगा। सभी निष्पक्षता में, हमे उम्मीद है कि आप प्रतीक्षा करेंगे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इसका अखिल भारतीय प्रभाव होने की संभावना है।

जब डॉ. सिंघवी ने पीठ से कोई आदेश पारित न करने का आग्रह किया, तो चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि हम कह रहे हैं कि अगले सप्ताह हम सुनेंगे। इस बीच, यदि आप एक जांच शुरू करते हैं तो हमें एक आदेश पारित करना होगा।

डॉ सिंघवी ने याचिकाकर्ता के लोकस पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इसके राजनीतिक जुड़ाव हैं। उन्होंने तर्क दिया कि न्यायालय को एक एनजीओ के कहने पर एक वैधानिक अधिसूचना पारित नहीं करनी चाहिए, जिसका मकसद स्पष्ट नहीं है। सिंघवी ने कहा कि अब और अगले सप्ताह के बीच कुछ भी नहीं होने वाला है। आपका कोई भी शब्द धूम मचा देगा।

चीफ जस्टिस ने कहा कि आप हमें आदेश पारित करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। हम जो चाहते हैं वह है कि प्रतीक्षा करें, संयम दिखाएं। इस बिंदु पर, सिंघवी राज्य सरकार को संदेश देने के लिए सहमत हुए और पीठ से आदेश में कुछ भी नहीं कहने का अनुरोध किया।

साल्वे ने कहा कि हम सिर्फ राज्य से आश्वासन चाहते हैं। अगर एक वरिष्ठ वकील ने इस अदालत के समक्ष आश्वासन दिया है, तो यह हमारे लिए पर्याप्त है। अंत में, पीठ ने याचिका में नोटिस जारी करने और अन्य पेगासस मामलों के साथ इसे टैग करने का एक सरल आदेश पारित किया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैसे ही मामले को राष्ट्रव्यापी कहा। सिंघवी ने जजों से आग्रह किया कि वह फिलहाल मामले पर कोई टिप्पणी न करें। सिंघवी ने कहा कि जजों की कोई भी टिप्पणी मीडिया की हेडलाइन बन जाएगी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगले हफ्ते कोर्ट पूरे मामले पर जरूरी आदेश देगा।

इसके पहले पश्चिम बंगाल राज्य ने आज इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा दायर किया, जिसमें कहा गया कि पेगासस मुद्दे में केंद्र सरकार की निष्क्रियता के कारण आयोग का गठन करने के लिए बाध्य किया गया था।

दरअसल 26 जुलाई को, पश्चिम बंगाल सरकार ने पेगासस स्पाइवेयर घोटाले से संबंधित आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्योतिर्मय भट्टाचार्य की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया। इस आशय की एक अधिसूचना पश्चिम बंगाल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी पी गोपालिका द्वारा जारी की गई। यह ये खुलासा होने के कुछ दिनों बाद आया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के समय मुख्यमंत्री के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को कथित तौर पर पेगासस स्पाइवेयर द्वारा जासूसी की गई थी।

उच्चतम न्यायालय में पेगासस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 15 याचिकाएं लंबित हैं। इनके जवाब में केंद्र सरकार ने एक विशेषज्ञ कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है। कोर्ट ने 17 अगस्त को केंद्र को विस्तृत जवाब का समय देते हुए सुनवाई 10 दिन के लिए टाली थी।

( वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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