Saturday, November 27, 2021

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क्या डेल्टा प्लस वेरिएंट के जरिये आएगी भारत में कोरोना की तीसरी लहर?

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कोरोना की दूसरी लहर का कारण कोरोना का डेल्टा वेरिएंट (B.1.617.2) प्रमुख था। अब विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि वैरिएंट के नए म्यूटेशन डेल्टा प्लस या A… या AY.01 तेजी से बढ़ रहा है और ये तीसरी लहर का प्रमुख कारक बन सकता है। विशेषज्ञों ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट वैक्सीन और इंफेक्शन इम्यूनिटी को भी चकमा दे सकता है। पूरी दुनिया में वायरस के इस वेरिएंट के मामले 200 के करीब पाये गये हैं, जिसमें भारत में 40 मामले हैं। कई एक्सपर्ट्स का दावा है कि यह डेल्टा प्लस वेरिएंट ही कोरोना की तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार होगा। अल्फा वेरिएंट की तुलना में यह वेरिएंट 35 से 60 फीसदी ज्यादा संक्रामक है।

उसी क्रम में कल मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के डेल्टा प्लस (B.1.617.2.1) वेरिएंट को ‘चिंताजनक’ (variant of concern) श्रेणी में वर्गीकृत करते हुये उन राज्यों को जहाँ ये वेरिएंट्स डिटेक्ट हुआ है, के लिये दिशानिर्देश जारी करते हुये तत्काल ज़रूरी कदम उठाने को कहा है।

गौरतलब है कि देश के तीन राज्यों में इस वेरिएंट के दो दर्जन से ज्यादा मामले मिले हैं। कोरोना वायरस का यह वेरिएंट डेल्टा (B.1.617.2) वेरिएंट से म्यूटेशन के बाद बना है, जो पहली बार भारत में पाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के तीन राज्यों महाराष्ट्र के रत्नागिरी और जलगांव जिलों, केरल के पलक्कड़ और पठानमथिट्टा जिलों और मध्य प्रदेश के भोपाल और शिवपुरी जिले से एकत्र किये गये नमूनों के जीनोम सिक्वेंस में ये वायरस पाये पाये गये हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देश बिंदुवार इस प्रकार हैं- 

•          स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेल्टा प्लस वेरिएंट की तीन विशेषताओं की पहचान की है। पहला, इसका तेजी से संचार होता है, दूसरा फेफड़ों की कोशिकाओं के रिसेप्टर्स से मजबूती से चिपक जाता है और तीसरा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्रतिक्रिया में संभावित कमी कर देता है।

•          जिन तीन राज्यों में ये वेरिएंट पाये गये हैं, उन तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों को सलाह दी गई है कि वे जिलों और समूहों में तत्काल रोकथाम के उपाय करें। भीड़ को रोकना और लोगों को आपस में मिलने से रोक लगना होगा। व्यापक परीक्षण, शीघ्र ट्रेसिंग के साथ-साथ वैक्सीन कवरेज को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करना होगा।

•          स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि भारत उन नौ देशों में शामिल है जहां डेल्टा प्लस संस्करण का पता चला है। यूएस, यूके, पुर्तगाल, स्विटजरलैंड, जापान, पोलैंड, नेपाल, चीन और रूस में वेरिएंट का पता चला है।

•          वेरिएंट के समूहों की पहचान भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम या INSACOG द्वारा की गयी है। सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि उनके नमूने INSACOG की नामित प्रयोगशालाओं में भेजे जायें ताकि यह नैदानिक महामारी विज्ञान के संबंध के आधार पर मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

•          सरकार के मुताबिक, देश में कोरोनावायरस के डेल्टा प्लस संस्करण के 40 मामलों का पता चला है, जिनमें से 20 से ज्यादा महाराष्ट्र और शेष मध्य प्रदेश और केरल से हैं।

कितना ख़तरनाक है कोरोना डेल्टा प्लस वेरिएंट

कोरोना की दूसरी लहर, जिसने भारत में तबाही मचाई, उसके आने के पीछे डेल्टा वेरिएंट प्रमुख रूप से शामिल था। लेकिन अब असल ख़तरा डेल्टा वेरिएंट के विकसित रूप यानी डेल्ट प्लस (B.1.617.2.1) वेरिएंट से है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर के पीछे यह वेरिएंट प्रमुख रूप से शामिल हो सकता है, एक्सपर्ट्स द्वारा हाल में ऐसी ही चिंता जतायी गयी है।

डेल्टा प्लस वेरिएंट दरअसल डेल्टा वेरिएंट के रूप में हुए बदलावों की वजह से बना है। डेल्टा वेरिएंट यानी B.1.617.2 जो कि पहले भारत में मिला और फिर बाद के महीनों में यह दूसरे कई देशों में भी पाया गया। कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट में इसके स्पाइक प्रोटीन में K417N बदलाव हुआ है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट को पहले B.1.617.2.1 कहा जाता था। यह सबसे पहली बार यूरोप में मिला था।

भारत के टॉप विषाणु विज्ञानी और INSACOG के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहिद जमील ने मीडिया से बात करते हुये इस पर चिंता जतायी है। उनका कहना है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट वैक्सीन और इम्युनिटी दोनों को चकमा दे सकता है। ऐसे में वैक्सीन, जिसे अब तक कोरोना से लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा था, अगर डेल्टा प्लस वेरिएंट उसे भी भेदकर अपनी चपेट में ले सकने की ताक़त रखता है, तो स्थिति गंभीर होने की आशंका है।

प्रोफेसर जमील का कहना है कि डेल्टा प्लस में सिर्फ़ ओरिजनल डेल्टा वेरिएंट की ही विशेषतायें नहीं हैं। बल्कि इसमें K417N का म्यूटेशन भी है, जो कि साउथ अफ्रीका में मिले बीटा वेरिएंट में भी मिला था। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खेप यह कहकर लौटा दिया था कि यह वैक्सीन वहां वायरस के वैरिएंट के ख़िलाफ़ कारगर नहीं है।

हालांकि डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन के असर को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद है। कुछ का मानना है कि वैक्सीन कारगर है, जबकि कुछ नहीं मानते। भारत के प्रमुख वायरोलॉजिस्ट और INSACOG के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहीद जमील ने कहा है कि हमें यह अच्छे से पता है कि वैक्सीन का असर बीटा वेरिएंट पर कम है। बीटा वेरिएंट वैक्सीन को चकमा देने में अल्फा और डेल्टा वेरिएंट से भी ज्यादा तेज हैं। यह तथ्य भी है कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खेप वापस कर दी थी उनका कहना था कि यह वैक्सीन वहां वायरस के वेरिएंट के ख़िलाफ़ कारगर नहीं थी।

महाराष्ट्र ने तीसरी लहर की तौयारी शुरू की

 कोरोना की पहली और दूसरी लहर में सबसे प्रभावित रहे महाराष्ट्र ने तैयारी भी शुरू कर दी हैं। महाराष्ट्र सरकार लगभग यह मानकर चल रही है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर डेल्टा प्लस वेरिएंट की वजह से ही आयेगी, ऐसे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अधिकारियों को अलर्ट मोड पर कर दिया है। बता दें कि महाराष्ट्र के नीलगिरी में 20 से अधिक डेल्टा प्लस वेरिएंट से सक्रमित मरीज मिले हैं। गौरतलब है कि कोरोना वायरस लगातार अपना रूप बदल रहा है। कोरोना वायरस का एक  नया वेरिएंट सामने आया है। इस वेरिएंट को ‘डेल्‍टा प्‍लस’ या ‘एवाई.1’ नाम दिया गया है।

बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट फिलहाल तीन राज्यों में दस्तक दे चुका है। मध्य प्रदेश (भोपाल), महाराष्ट्र और केरल में कुल मिलाकर कोराना डेल्टा प्लस वैरिएंट के 40 मरीज मिल चुके हैं। अब विशेषज्ञों ने भी चिंता जतायी है कि अगर तीसरी लहर आयी तो इसके पीछे डेल्टा प्लस वैरिएंट प्रमुख रूप से शामिल होगा।

28 लैब्स का व्यापक सिस्टम बनाया गया

मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने कहा कि डेल्टा प्लस वेरिएंट स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन है जो मार्च के महीने में यूरोप में देखा गया। उन्होंने कहा कि 28 लैब्स का एक व्यापक सिस्टम बनाया गया है। हम इसे ट्रैक कर रहे हैं। हमने सुना है कि ये मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट को नुकसान पहुंचा रहा है। हम साइंस के जरिए इसके बार में और पता लगा रहे हैं।

वहीं संवाददाता सम्मेलन में, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने कहा कि महामारी की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। लेकिन लोगों को कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार का पालन करना जारी रखना चाहिए और भीड़ और पार्टियों से बचना चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि 7 मई को रिपोर्ट की कि संक्रमितों की उच्चतम संख्या (पीक नंबर) की तुलना में भारत के दैनिक कोविड-19 मामलों में लगभग 90 प्रतिशत की गिरावट आयी है। उन्होंने यह भी कहा कि साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट में 84 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई है, जो कि 4 और 10 मई के बीच दर्ज की गयी 21.4 प्रतिशत की उच्चतम साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट के बाद से दर्ज की गयी है। मंगलवार के डेटा के अनुसार पिछले 24 घंटों में भारत में 42,640 नये संक्रमण दर्ज किए गये, जो 23 मार्च के बाद सबसे कम हैं। इसी अवधि में 1,167 मौतें भी हुईं हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पॉजिटिव मामलों की संख्या अब 29.98 मिलियन हो गयी है, जिसमें 389,302 लोगों की मौत शामिल है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा है कि हमारे पास कोरोना प्रबंधन के लिए पांच तरीके हैं। टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, आइसोलेट, कंटेनमेंट जोन, कोरोना संबंधी नियमों का पालन और वैक्सीनेशन। उन्होंने कहा की वेरिएंट हो ना हो लेकिन वायरस रिटायर नहीं हुआ है। हमें इसके ख़िलाफ़ जंग जारी रखनी है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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