Monday, April 15, 2024

संवैधानिक मूल्यों को जीने की एक पहल

उनकी आंखों में समता मूलक समाज बनाने का एक सपना जागा है। वे चाहते हैं कि उनके गांव में कोई भूखा, कोई कुपोषित न रहे। वे समाज में जारी छुआछूत, जाति-पंथ और लैंगिक भेदभाव को मिटाने के लिए स्वयं से समुदाय तक व्यवहारिक बदलाव का हिस्सा बनने को उत्सुक हैं। संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले ऐसे 40 युवा प्रतिनिधियों ने हाल ही में उमरिया जिले के ग्राम घोघरी में सम्पन्न 5 दिवसीय अहिंसा के रास्ते युवा प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेकर अपने संकल्प को दुहराया है।

मप्र के उमरिया जिले से 23 किमी दूर ग्राम घोघरी के हरित वादियों में स्थित प्रकृति मंडपम में स्वयं सेवी संस्था विकास संवाद द्वारा 18 से 22 मार्च के दौरान अहिंसा के रास्ते युवा शिविर का आयोजन किया गया। जीवन में संवैधानिक मूल्य विषय पर केन्द्रित इस शिविर में उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, सतना, रीवा, शिवपुरी एवं भोपाल जिले के सामाजिक कार्यकर्ता एवं दस्तक युवा समूह प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर बंधुता, न्याय, समता, समानता और गरिमा जैसे मूल्यों को समझने-समझाने के साथ ही एक साथ जीने का अभ्यास किया और अपने गांव में बंधुत्व बढ़ाने का संकल्प लिया।

सामाजिक कार्यकर्ता भूपेंद्र बताते हैं कि लोगों के लिए संविधान एक कानूनी और कठिन शब्दजाल वाला पाठ रहा है किन्तु उसके प्रस्तावना में बंधुता जैसे मूल्य लिखित हैं जो राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए जरूरी है। इसलिए इन मूल्यों को युवाओं द्वारा जीवन में उतारने और समाज में उन्हें बढ़ावा देने के लिए अध्ययन, प्रशिक्षण और अभ्यास की प्रक्रिया चलायी जा रही है। विकास संवाद के कार्यक्रम समन्वयक विश्वंभर त्रिपाठी के अनुसार खाद्य एवं पोषण असुरक्षा से जूझ रहे 15000 परिवारों की स्थिति में सामुदायिक भागेदारी के परिणाम कुपोषण मुक्त गाँव के रूप में दिखाई देने लगे हैं। इस पहल में बंधुता, गरिमा और समता के मूल्य निहित हैं। युवा शिविर में दलित आदिवासी समुदाय के साथ जारी जातीय भेदभाव और लैंगिक हिंसा की घटनाओं का उदाहरण देते हुए अश्विनी जाधव ने युवाओं को स्वयं जाति-धर्म से ऊपर उठकर समता और समानता के मूल्य को मजबूत करने की बात कही।

खेल-खेल में जाना संविधान

शिविर की शुरुआत बंधुत्व जाल खेल से हुई जिसमें युवाओं ने अपने अंदर निहित मूल्यों की पहचान की। रविकांत, पूजा, लक्ष्मी, राजेंद्र, सम्पत के लिए चढ़ती और उतरती सीढ़ी का खेल संवैधानिक मूल्यों को समझने का रोचक और सरल तरीका रहा। इस खेल में कोई हारा नहीं बल्कि सभी को एक नई सीख मिली। सचिन, अरविंद, दिनेश कोल, पूर्वी गुप्ता, वैशाली, बबली, राधा विश्वकर्मा और भारती ने लीडर को फॉलो करो, बोल भाई कितने, मेरी मर्जी जैसे खेल में एकता और न्याय का पहलू तलाशा। छोटेलाल, जय कुमार, ज्योति, समीर,कामना और मोनिका के लिए रोज सुबह 6 बजे जागना, उगते सूर्य को देखना और चिड़ियों की चहचहाहट सुनना स्वतन्त्रता की सुखद अनुभूति पाने का अनुभव रहा। महिमा के अनुसार प्रकृति सबसे समान व्यवहार करती है यही संविधान की सीख है। विजय, दुर्गेश और अवधेश के लिए जंगल में नेटवर्क न होने से दोस्तों से मित्रता बढ़ाने का अच्छा अवसर बन पड़ा।

आकाशकोट में सद्भावना पिकनिक

शिविर के अंतिम दिन आकाशकोट अंचल के ग्राम धवईझर में अजमत, दिनेश और संतोष ने दस्तक समूह के साथ मिलकर सद्भावना पिकनिक का आयोजन किया। इस मौके पर स्थानीय फाग गीतों का गायन भी हुआ। अवनीश, रमता, ममता, हिरेश, अजय, नगीना,छत्रसाल और रामाश्रय रावत के लिए यह प्रयोग भाईचारा और समानता को बढ़ाने की सीख देने वाला रहा। यहां सभी ने स्थानीय व्यंजन कोदो भात और कुटकी की खीर का लुफ्त उठाया। इस बीच युवाओं ने ग्राम डोंगरगवां की प्राकृतिक खेती और बाजाकुंड गांव में समुदाय की सहभागिता से हुए जल संरक्षण कार्य का अवलोकन किया। इस आयोजन को सफल बनाने में भूपेंद्र त्रिपाठी, बिरेन्द्र गौतम, जितेंद्र, वृन्दावन एवं फूलबाई की विशेष भूमिका रही।

(मध्य प्रदेश से रामकुमार विद्यार्थी की रिपोर्ट।)

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