Friday, September 29, 2023

बिहार में माले ने निकाला ट्रैक्टर मार्च, छत्तीसगढ़, झारखंड में भी कई स्थानों पर हुई किसानों की परेड

पटना। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भाकपा-माले और अखिल भारतीय किसान महासभा के आह्वान पर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग पर आज पूरे बिहार में ट्रैक्टर जुलूस का आयोजन किया गया। झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी किसान कानून के खिलाफ मार्च निकाला गया।

पटना के फुलवारी शरीफ में स्थानीय विधायक गोपाल रविदास के नेतृत्व में पचास से अधिक ट्रैक्टर और सैकड़ों मोटरसाइकिल के जत्थे ने एम्स से निकलकर चितकोहरा गोलबंर तक मार्च किया और फिर चितकोहरा गोलबंर से वापस एम्स लौट गया। इस ट्रैक्टर मार्च में अखिल भारतीय खेत और ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर, ऐपवा की राज्य सचिव शशि यादव, गुरुदेव दास, जयप्रकाश पासवान, साधु शरण, इंसाफ मंच की आसमां खान, हिरावल के संतोष झा, माले के युवा नेता पुनीत कुमार, इनौस नेता विनय कुमार, माले के लोकप्रिय नेता मुर्तजा अली आदि शामिल हुए। मार्च में राजद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया।

लाल झंडे और तिरंगों से पटे ट्रैक्टरों और मोटरसाइकिलों का जत्था एम्स से लेकर चितकोहरा तक लगभग दो घंटे तक मार्च करता रहा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाते रहे।

चितकोहरा गोलबंर पर सैंकड़ों लोगों की सभा को संबोधित करते हुए धीरेंद्र झा ने कहा कि देश में चल रहे किसान आंदोलन ने आजादी के आंदोलन के दौर के जागरण जैसी स्थिति पैदा की है। आज पूरा देश मोदी सरकार की विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट हो रहा है। देश की जनता किसान आंदोलन के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और वह कह रही है कि इस देश में दूसरा कंपनी राज हम किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

देश के संविधान और लोकतंत्र पर लगातार हो रहे हमले के खिलाफ उन्होंने देश की जनता से गणतंत्र की अपनी दावेदारी को फिर से बुलंद करने का आह्वान किया। उन्होंने 30 जनवरी को महागठबंधन के आह्वान पर आयोजित मानव शृंखला को ऐतिहासिक बनाकर तानाशाह मोदी सरकार को सबक सिखाने का आह्वान किया।

राज्य के अन्य जिलों में भी ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। बेगूसराय में किसान महासभा और अन्य किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से मार्च का आयोजन किया। इसमें हजारों की भागीदारी हुई। वैशाली के लालगंज में किसान महासभा के कार्यकर्ताओं ने मोटरसाइकिल जुलूस निकाला। दरभंगा में सौ से अधिक ट्रैक्टर सड़क पर उतरे। एनएच 57 पर विशाल जुलूस निकाला गया। इसमें माले के अलावा इंसाफ मंच और इनौस के कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

पटना जिला के धनरुआ, पालीगंज, अरवल, बक्सर आदि जगहों पर भी मार्च निकाले गए। पालीगंज में आज के ट्रैक्टर मार्च का नेतृत्व युवा विधायक संदीप सौरभ ने किया। भोजपुर के गड़हनी में आइसा औ इनौस के कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टर मार्च का आयोजन किया, जिसमें विधायक मनोज मंजिल शामिल हुए। कटिहार के बारसोई में विधायक महबूब आलम और जूही महबूबा के नेतृत्व में मार्च निकाला गया।

उधर, झारखंड में तीनों जनविरोधी कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग में किसान आंदोलन एकजुटता मंच ने जमशेदपुर के आमबगान मैदान, साकची से तिलका मांझी स्टेडियम बालीगुमा, डिमना तक विशाल ट्रैक्टर-बाइक-कार रैली निकाली। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में बाइक, ट्रैक्टर और सैकड़ों कारें शामिल रहीं।

रैली आमबगान मैदान से प्रारंभ होकर बंगाल क्लब, बिरसा चौक, 9 नंबर रोड, आई हॉस्पिटल चौक, बिरसा चौक, अंबडकर चौक, मानगो चौक, तिलका मांझी चौक डिमना होते हुए तिलका मांझी स्टेडियम, बालीगुमा में समाप्त हुई।

रैली में शामिल लोग नारा लगा रहे थे कि ‘किसान आंदोलन को हूल जोहार’, ‘किसान आंदोलन जिंदाबाद’, ‘जनविरोधी कृषि कानून रद्द करो’, ‘मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी’ नारे लगा रहे थे।रैली का विभिन्न जगहों पर स्वागत किया गया, जिसके तहत हरपाल सिंह हॉस्पिटल के सामने और तिलका मांझी चौक के समीप स्थानीय लोगों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया।

तिलका मांझी स्टेडियम पहुंचने के बाद बाबा तिलका मांझी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद यहां एक छोटी सी सभा का भी हुई। सभा में वक्ताओं ने कहा कि किसान आंदोलन के समर्थन में निकाली गई इस रैली का एक संदेश यह भी है कि जब तंत्र गण को समर्थित समर्पित न हो तो गण इसी तरह सड़कों पर उतरकर गणतंत्र दिवस मनाते रहेंगे। संचालन समिति के सदस्यों ने मांग की कि जनविरोधी तीनों कृषि कानून बिना शर्त और अविलंब वापस हों।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न सामाजिक राजनीति संगठनों के अलावा किसान आंदोलन एकजुटता मंच के संचालन समिति के बाबू नाग, भगवान सिंह, सुमित राय, दीपक रंजीत, विश्वजीत देव, रविंदर प्रसाद, गीता सुंडी, मंथन ने मुख्य भूमिका निभाई।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर आज छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा ने कोरबा, सूरजपुर, बिलासपुर और सरगुजा जिलों समेत प्रदेश में कई जगहों पर किसान गणतंत्र परेड आयोजित की। ये परेड मोदी सरकार द्वारा बनाए गए चार कॉरपोरेटपरस्त श्रम संहिता और तीन किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आयोजित किए गए थे।

इन परेडों के जरिए छत्तीसगढ़ किसान सभा द्वारा केंद्र सरकार से कॉर्पोरेटपरस्त और किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल की सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाने की मांग की गई। किसान सभा और छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से जुड़े अन्य घटक संगठनों के सैकड़ों किसानों ने भी आज दिल्ली में किसान गणतंत्र परेड में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने यह जानकारी दी। दिल्ली में किसान गणतंत्र परेड में हुई हिंसा के लिए पुलिस और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने बताया कि पलवल बॉर्डर के जत्थे को बदरपुर तक जाने की सहमति बनी थी, लेकिन इसे सीकरी के पास ही रोक देने से किसानों को बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ना पड़ा और फिर पुलिस द्वारा की गई हिंसा का सैकड़ों लोगों को शिकार बनना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि देशव्यापी किसान आंदोलन को तोड़ने के लिए सरकार द्वारा ही यह हिंसा प्रायोजित की गई थी। देश के किसान इसका माकूल जवाब देंगे और एक फरवरी को संसद पर जबरदस्त प्रदर्शन करेंगे।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि इस देश का किसान अपने अनुभव से जानता है कि निजी मंडियों के अस्तित्व में आने के बाद और खाद्यान्न व्यापार को विश्व बाजार के साथ जोड़ने के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य की पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त हो जाएगी। इसलिए इस देश का किसान अपनी अंतिम सांस तक अवाम के साथ मिलकर खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले इन कॉर्पोरेटपरस्त कानूनों के खिलाफ लड़ने को तैयार है। इन कानूनों को वापस लेने और सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का कानून बनाने के अलावा इस सरकार के पास और कोई रास्ता बचा नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के किसान न केवल अपने जीवन-अस्तित्व और खेती-किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, बल्कि वे देश की खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए भी लड़ रहे हैं। उनका संघर्ष उस समूची अर्थव्यवस्था के कॉरपोरेटीकरण के खिलाफ भी हैं, जो नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका को तबाह कर देगा। इस संघर्ष के अगले चरण में 1 फरवरी को संसद पर प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ से सैकड़ों किसान हिस्सा लेंगे।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार के इनुपट के साथ)

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