मनरेगा में काम लेने के बावजूद नहीं किया जा रहा मजदूरों को भुगतान: दारापुरी

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लखनऊ। मनरेगा के प्रावधानों के अनुसार कार्यरत हर मजदूर को जॉब कार्ड देने और जॉब कार्ड पर प्रतिदिन हाजिरी लगाने के लिए सुस्पष्ट आदेश की मांग आज मजदूर किसान मंच ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्रक में उठाई। इसके अलावा हर हाल में मनरेगा में मजदूरों को समयबद्ध मजदूरी और साल भर काम देने और इसका विस्तार शहरी क्षेत्रों के लिए भी करने, हर प्रवासी मजदूर को अभियान चलाकर सरकार द्वारा घोषित एक हजार रुपये व राशन किट देने, कोविड़-19 के जांच के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट बड़े पैमाने पर कराने और विशेषकर हर प्रवासी मजदूर की कोविड-19 जांच सुनिश्चित करने, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली व बुंदेलखंड जैसे अति पिछडे़ इलाकों में वाटरशेड़ कार्यक्रम के तहत बड़े पैमाने पर तालाब, कुओं, बाऊली, चेकडैम, बांध आदि मनरेगा के तहत बनाने और सरकारी व निजी अस्पतालों में बहिरंग व अंतरंग रोगी विभाग खोलने की तत्काल अनुमति देने की मांग भी उठाई गयी। मजदूर-किसान मंच के अध्यक्ष और पूर्व आईजी एसआर दारापुरी व महासचिव डॉ. बृज बिहारी द्वारा भेजे गए पत्रक की प्रति मुख्य सचिव व अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गयी है।

पत्रक में कहा गया कि सरकार लगातार प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार देने की घोषणा कर रही है। सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने गांव में बड़े पैमाने पर मनरेगा के तहत कार्यों को प्रारम्भ भी कर दिया है। इस सम्बंध में मजदूर किसान मंच ने प्रदेश के सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, सीतापुर और गोंडा जनपदों की गांव स्तर पर जांच करायी जिसमें जो तथ्य सामने आए हैं वह बेहद दुखद हैं। इन जनपदों में कराई जांच रिपोर्ट के अनुसार मनरेगा के तहत कराए जा रहे कामों में कार्यरत श्रमिकों की हाजिरी जॉब कार्ड पर दर्ज नहीं की जा रही है।

कई श्रमिकों के पास तो जॉब कार्ड तक नहीं है। उन्हें ग्राम स्तरीय अधिकारियों ने रखा हुआ है। हफ्तों काम करने के बावजूद मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। जिन मजदूरों को भुगतान किया भी गया उनको किए गए काम के सापेक्ष कम मजदूरी दी गयी है। अभी भी बड़ी संख्या में रोजगार चाहने वाले मजदूर हैं पर उनको रोजगार उपलब्ध नहीं हो सका है। यही नहीं प्रवासी मजदूर जिनके परिवार के सामने जिंदा रहने का ही संकट हो गया है उन्हें भी रोजगार नहीं मिल रहा है।

मजदूर किसान मंच के पत्रक में कहा गया है कि देश के सर्वाधिक पिछड़े जनपदों में से एक सोनभद्र जनपद की दुद्धी तहसील में की गयी जांच में यह बात भी सामने आयी कि ओला वृष्टि और भारी वर्षा से तबाह हुए किसानों को आज तक एक पैसा मुआवजा नहीं मिला। रोजगार के अभाव में बाहर पलायन कर गए मजदूर भारी संख्या में गांव वापस लौटे हैं। इन श्रमिकों के लिए सरकार ने कहा कि एक हजार रुपये और बारह सौ पचास रुपये का पंद्रह दिनों का राशन किट दिया जायेगा लेकिन अभी तक ज्यादातर मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिला।

बाहर से आए मजदूरों से संक्रमण फैलने का खतरा है लेकिन इनकी कोरोना जांच तक नहीं की गयी है और महज थर्मल स्कैनिंग करके छोड़ दिया गया है। ऐसी स्थिति में यदि सोनभद्र समेत अन्य जनपदों में सामाजिक स्तर पर संक्रमण फैल गया तो लोग बेमौत मरने के लिए अभिशप्त होंगे। हालत इतनी बुरी है कि पूरे प्रदेश में सरकारी व निजी अस्पतालों में ओपीडी/आईपीडी तक बंद कर दी गयी है। इन स्थितियों में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की गयी है।

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