Sunday, March 3, 2024

किसानों-मजदूरों की एकजुटता संदेश के साथ आरसीएफ एंप्लाइज यूनियन का अधिवेशन कपूरथला में संपन्न

18 दिसंबर, 2021 को आरसीएफ एंप्लाइज यूनियन सम्बद्ध IREF व ऐक्टू का अधिवेशन वारिश शाह हाल में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में 15 सदस्यों की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ, जिसमें अध्यक्ष कॉ. अमरीक सिंह और महासचिव कॉ. सर्वजीत सिंह को पुनः चुना गया। इस अधिवेशन में वरिष्ठ किसान नेता कॉ रुलदू सिंह मानसा, कॉ मनजीत सिंह धनेर, बैंक एसोसिएशन से कॉ दिलीप पाठक, केंद्रीय ट्रेड यूनियंस से ऐक्टू राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड राजीव डिमरी, ऐक्टू पंजाब राज्य सचिव राजेन्द्र सिंह राणा व नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे से डॉ कमल उसरी व रेलवे के विभिन्न जोन से IREF आईआरइएफ के नेतागण शामिल हुए।

अधिवेशन में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए पंजाब किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष व अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉम रुलदू सिंह मानसा व भारतीय किसान यूनियन दकौदा वरिष्ठ उपाध्यक्ष कॉम मनजीत सिंह धनेर ने संयुक्त रूप से कहा कि मोदी सरकार ने कारपोरेट घरानों व वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के दिशा निर्देशों के दबाव में कारपोरेट हितैषी तीन खेती कानूनों को कोरोना महामारी मैं बहुत ही जल्दीबाजी में पास कर दिए गए थे। तीनों काले कृषि कानूनों के लागू हो जाने से खेती किसानी और कृषि क्षेत्र में कार्यरत किसान और मजदूर तो पूरी तरह से बर्बाद हो जाने थे, साथ ही अभी तक जो गरीब मेहनत कश सस्ते में अनाज खरीद कर अपना पेट भर लेता था, उसके ऊपर जबरदस्त महंगाई की मार पड़ना तय था, सरकारी मंडियों के ख़ात्मे से बेरोजगारी और बढ़ जाती, लगभग 13 महीने दिल्ली के बॉर्डर पर एकजुटता के साथ पंजाब की 32 किसान व मजदूर संगठन व पूरे देश के लगभग 500 किसान व मजदूर संगठनों ने एक साथ होकर संघर्ष किया, जिसने मोदी सरकार को यह काले कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया। किसान नेताओं ने कहा कि इस आंदोलन ने जहां किसान संगठनों, किसानों, मजदूरों, इत्यादि में एकता बढ़ाया है, वहीं देश की आम जनता में धार्मिक साम्प्रदायिकता के खिलाफ गंगा जमुनी तहजीब की कौमी एकजेहनियत की भावना को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इसी एकता और चेतना के बदौलत सार्वजनिक क्षेत्रों के निगमीकरण / निजीकरण को रोका जा सकता है।

कॉमरेड रुलदू सिंह मानसा ने कहा कि जनता की सवारी रेलवे सार्वजनिक क्षेत्र में बचाए रखने की लड़ाई में रेलवे कर्मचारियों के साथ रहेगा किसान,पंजाब बैंक फेडरेशन के संयुक्त महासचिव कॉ दिलीप पाठक ने बताया कि किस तरह भारत सरकार सरकारी बैंकों का निजीकरण करने जा रही है। इस निजीकरण के साथ जहां बैंकों के लाखों कर्मचारी बेरोजगार होंगे, वहीं सबसे बड़ा खतरा देश के आम लोगों को होने वाला है क्योंकि जो आम नागरिक अपना पैसा सरकारी बैंकों में पूरे विश्वास के साथ रखते हैं, वह अब जब बैंक प्राइवेट हाथों में जाएंगे तो बैंकों में जमा उनके पैसों की कोई गारंटी नहीं रहेगी। प्राइवेट बैंक अपनी मर्जी से आम लोगों का शोषण करेंगे। बैंकों के निजीकरण को हर हालत में सब लोगों को मिलकर से रोकना ही पड़ेगा।

ऑल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ऐक्टू महासचिव का. राजीव डिमरी ने कहा कि बात अब पूरी तरह से स्पष्ट है चूंकि मोदी सरकार देशी- विदेशी पूंजीपतियों के समर्थन से सत्ता में आई है, और पूंजीपतियों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देखते हुए देश के कर्मचारियों तथा मजदूरों को हमेशा सतर्क रहते हुए एक बड़े और निर्णायक संघर्ष के लिए तैयारी शुरु कर देनी चाहिए, किसान आंदोलन के चलते अभी जो मोदी सरकार 44 श्रम कानूनों को खत्म करके जो 4 श्रमिक कोड बनाई है उसे लागू नहीं कर पा रही थी, और ना ही देश के सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण उतनी तेज़ी से कर पा रही थी। जितनी तेजगति से वो करना चाहती है, लेकिन अब पूंजीपति वर्ग कृषि कानूनों को वापस लेने की भरपाई करने के लिए 44 श्रम कानूनों के निरस्तीकरण और देश में अंधाधुंध निजीकरण करने के लिए मोदी सरकार पर दबाव बना रहा है। इसलिए अब रेलवे कर्मचारियों को किसानों के ऐतिहासिक जीत से सीख लेते हुए निगमीकरण /निजीकरण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की शुरुआत कर देनी चाहिए।

फ्रंट अगेंस्ट एनपीएस इन रेलवे के प्रमुख नेताओं में कॉ. अमरीक सिंह, कॉ राजिंदर पाल,कॉ कृशानु भट्टाचार्य, कॉ तरसेम सिंह, कॉ भरत राज, कॉ तरलोचन सिंह, कॉ तलविंदर सिंह ने कहा कि हमारे एनपीएस विरोधी फ्रंट अगेंस्ट एन पी एस इन रेलवे ने अपने अस्तित्व में आने के बाद से ही नई पेंशन स्कीम तथा रेल के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश भर में अपनी एक जुझारू फ्रंट के रूप में पहचान बनाई है। हमें किसान संघर्ष तथा उनकी जीत ने नई ऊर्जा ताकत व शिक्षा दी है, हम अपनी पूरी ताकत के साथ एनपीएस को रद्द करवाकर पुरानी पेंशन बहाल करवाने के संघर्ष को अंजाम तक़ पहुंचाने तक़ जारी रखेंगे।

इंडियन रेलवे एएम्प्लाईज फेडरेशन के महासचिव कॉ सर्वजीत सिंह, संगठन सचिव कॉ जुमेरदीन, सम्मानित अध्यक्ष रवि सेन, राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉ मनोज कुमार पांडेय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कॉम डॉ कमल उसरी,राष्ट्रीय सहायक सचिव कॉम उमेद सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से कहा कि हम तमाम संघर्षशील कर्मचारियों तथा संगठनों को एक साथ मिलकर रेलवे के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष करने के लिए आना होगा। सभी ने कहा कि तमाम रेलवे कर्मचारियों तथा सभी संघर्षशील संगठनों को एक मंच पर आना वक्त की जरूरत है, इसीलिए हम सब सभी संगठनों, एसोसिएशन, फेडरेशनों, यूनियनों, मेहनतकश मजदूरों से अपील करते हैं कि आओ मिलकर संघर्ष के मैदान में लड़ें तभी हम सबकी जीत सुनिश्चित होगी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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