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पंजाब में सीएए-एनआरसी के खिलाफ परचम बनता आंचल!, महिलाओं ने विरोध में अपने खून से लिखा अहदनामा

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पंजाब में रोज हजारों महिलाएं सड़कों पर आकर विरोध कर रही हैं। तीन दिनों से यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। विभिन्न शहरों में हो रहे रोष प्रदर्शनों में सब समुदाय की महिलाएं हजारों की तादाद में एकजुट होकर सड़कों पर उतर रही हैं। लुधियाना में विभिन्न  समुदायों की महिलाओं ने खून से सीएए के खिलाफ अहदनामा (शपथपत्र) तैयार किया।

पंजाब में ऐसा मंजर पहली बार देखा जा रहा है। संभवत पंजाब देश का पहला ऐसा सूबा है, जहां महिलाएं इस मानिंद बड़ी संख्या में घरों से बाहर आकर सीएए का पुरजोर विरोध कर रही हैं। लगता है, आंचल अब सचमुच परचम बन गया है।

रविवार को लुधियाना में हजारों महिलाओं ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ जोरदार रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने कई किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला। इस जुलूस में बड़ी संख्या में सभी धर्मों के महिलााएं शामिल थीं। जुलूस इतना विशाल था कि जनजीवन एकबारगी थम-सा गया। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की छात्र नेता कनुप्रिया, फतेह चैनल की नवदीप कौर, नसरीन सुल्ताना और रहनुमा खातून ने इस विशाल महिला रोष प्रदर्शन की अगुवाई की। इसके बाद उन्होंने अपने खून से लिखा अहदनामा लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम को सौंपा।

इस संवाददाता ने पाया कि शिरकत करने वाली तमाम महिलाएं और लड़कियां नागरिकता संशोधन विधेयक के एक-एक पहलू से बखूबी वाकिफ हैं और तार्किक होकर विरोध जता रही हैं। लुधियाना के रोष मार्च में यह भी साफ देखने को मिला कि सरकार में बैठे और सीएए के समर्थकों के यह दावे निहायत झूठे हैं कि सिर्फ मुस्लिम वर्ग इस कानून का विरोध कर रहा है।

लुधियाना में महिलाओं ने हाथों में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्ले कार्ड उठाए हुए थे, जिन पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में हैं भाई-भाई और एक भारत अटूट भारत, प्यारा भारत जैसे संदेश लिखे थे। इस मौके पर पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की चर्चित छात्र नेता कनुप्रिया ने सीएए और एनआरसी का विरोध करते हुए कहा कि भारत की एकता और अखंडता को फिरकापरस्त ताकतें तोड़ना चाहती हैं। देश की मां-बहनें और बेटियां मोदी सरकार के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होने देंगी।

रोटी, कपड़ा और मकान का वायदा करने वाले आज देश में अपनी ही जनता से नागरिकता का प्रमाण मांग रहे हैं। कनुप्रिया कहती हैं, “हम दिल्ली जाकर भी विरोध करेंगे। पंजाब के हर शहर में महिलाएं हजारों की संख्या में एकजुट होकर इस कानून की मुखालफत कर रही हैं और औसत में यह संख्या लाखों में बैठती है।”

फतेह चैनल की नवदीप कौर कहती हैं, “सीएए और एनआरसी के समर्थकों को होश में आकर देखना चाहिए कि तमाम समुदायों-वर्गों की महिलाएं इस फासीवादी कानून के खिलाफ हैं। कहीं और दिखाई नहीं दे रहा तो पंजाब आकर देख लेना चाहिए।”

गौरतलब है कि विरोध मंच से इस मौके पर रहनुमा खातून ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नजम ‘हम देखेंगे’ पढ़ी तो सैंकड़ों लड़कियों-महिलाओं ने सुर में सुर मिलाए और जोशीले नारे लगाए। नसरीन सुल्ताना ने पंजाबी में बोलते हुए नागरिकता संशोधन विधेयक का तीखा विरोध किया और कहा कि पंजाब में इस कानून के खिलाफ महिलाओं की एकजुटता मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती और खतरे की घंटी है।

लुधियाना का रोष मार्च घंटों तक महानगर की मुख्य सड़कों से होता हुआ पंजाब की मुख्य जामा मस्जिद पहुंचा। वहां महिलाओं ने शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी को अपने खून से लिखा अहदनामा पेश किया। यह भी पंजाब के इतिहास में पहली बार है जी महिलाओं ने खून से लिखा अहदनामा तैयार किया हो।

शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी इसकी पुष्टि करते हुए इस संवाददाता से कहते हैं, “मोदी सरकार देश की बेटियों के सवालों से भाग रही है। अफसोस की बात है कि सत्ता में होते हुए भी उनको अपने बनाए कानून के हक में रैलियां करनी पड़ रही हैं। तमाम मजहबों की महिलाओं का इस तरह विरोध करना असाधारण है।”

खून से लिखे अहदनामा में महिलाओं ने लिखा है कि वे अपने खून के आखरी कतरे तक संविधान को तोड़ने की साजिश के तहत बनाए गए इस विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करती रहेंगीं। भारत देश की जंग-ए-आजादी में हम सब साथ थे और कोई भी ताकत हमारा भाईचारा जो अनेकता में एकता का प्रतीक है, को तोड़ नहीं सकता। शरणार्थी हमारे भाई बहन हैं लेकिन धर्म के आधार पर नहीं, इंसानियत और भारतीयता के आधार पर।

सरकार शरणार्थियों की आड़ लेकर देश में लोकतंत्र की हत्या का प्रयास कर रही है, जिसे कभी पूरा न होने दिया जाएगा। जिक्रेखास है कि यह अहदनामा हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई महिलाओं के संयुक्त लहू से लिखा गया है।

लुधियाना से ठीक एक दिन पहले मलेरकोटला में हजारों महिलाओं ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ विशाल रोष मार्च निकाला था। वहां भी तमाम समुदाय की महिलाओं ने शिरकत की और लंबे जुलूस के चलते शहर ठहर सा गया था। मलेरकोटला में महिला रोष रैली का नेतृत्व करने वाली पंजाब स्टूडेंट यूनियन की उपप्रधान हरदीप कौर कोटला ने इस संवाददाता से कहा, “नागरिकता संशोधन विधेयक और उस जैसे अन्य कानून सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ ही नहीं बल्कि देश के तमाम अल्पसंख्यकों, मेहनतकशों और दलितों के विरोध में भी हैं।”

लुधियाना और मलेरकोटला में सीएए और एनआरसी के खिलाफ महिलाओं ने विशाल रोष प्रदर्शन किया।

जबकि महिला रोष रैली में खासतौर पर हिस्सा लेने आईं दिल्ली यूनिवर्सिटी की कानून विभाग की छात्रा स्वाति खन्ना कहती हैं, “सीएए, एनआरसी और एनपीआर समूचे भारतीयों के खिलाफ है। इन कानूनों के खिलाफ हर इंसाफपसंद व्यक्ति को डटना चाहिए। पूरे देश में महिलाएं विरोध कर रही हैं और उनकी इस तरह की शमहूलियत अच्छा संकेत है।”

सामाजिक कार्यकर्ता जुलेखा जहीन के मुताबिक, “मौजूदा हाकिम देश की एकता अखंडता के साथ अमानवीय खिलवाड़ कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत तथ्य रखकर विश्व बिरादरी को गुमराह किया जा रहा है।”

प्रख्यात मानवाधिकारवादी डॉ. नवशरण कहती हैं, “पंजाब में केंद्र के काले कानूनों के खिलाफ पहली बार बड़े पैमाने पर महिलाओं की ऐसी एकजुटता देखने को मिल रही है। यह स्त्री-जागृति की नई लहर है जो यकीनन दूर तक जाएगी और इसके काफी सुखद नतीजे आने वाले दिनों में सामने आएंगे।”

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और लुधियाना में रहते हैं।)

This post was last modified on January 20, 2020 3:30 pm

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