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‘जो उचित समझो, वह करो’ ही नहीं, जनरल नरवणे की किताब में और भी बहुत कुछ है जिससे सरकार हो जाएगी शर्मिंदा”

पूर्व जनरल एम एम नरवणे की किताब पर आधारित लेख लिखने वाले रणनीतिक मामलों के विश्लेषक सुशांत… Read More

सफ़ाई कर्मचारियों के जीवन में झांकने पर कई नज़ारे दिखते हैं “ज़हर जो हमने पिया” किताब में

किसी को यह जानने के लिए कि महिला सफाई कर्मियों के साथ भेदभाव होता है, उन की… Read More

किताब समीक्षा :साम्यवाद के सिद्धांतों से ही बेहतर जीवन की संकल्पना साकार होगी

साल 2025 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का जन्मशती वर्ष है। सौ साल पहले 26 दिसम्बर, 1925 को उत्तर… Read More

‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-2: दो संघर्ष, दो जीवन, दो लालसाएं, दो महत्वाकांक्षाएं, दो ज़िदें, दो अरमान

और इस संस्मरण में मानो अलग-अलग विधाएं ऐसे ही बैठ गई हैं आकर जैसे तार पर कुछ… Read More

‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-1: ये है मेरी यातना और मेरी अपार ख़ुशी

(अरुंधति रॉय के लेखन की सबसे बड़ी ख़ूबियां उसकी सच्चाई और उसकी मौलिकता हैं। ये खूबियां उन्हें… Read More