Monday, January 24, 2022

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खाकी की होगी सत्ता और देश पर चलेगा कार्पोरेट लूट का राज

(1)पुलिसकर्मी अपने कार्यों, शक्तियों और कर्तव्यों का उपयोग सामान्य जनता और मौजूदा सरकार के निष्पक्ष सेवक के रूप में करेंगे.... किसी भी पुलिसकर्मी को,  उसके कार्यों या शक्तियों, या पुलिस संसाधनों का उपयोग करते वक्त, किसी भी राजनीतिक पार्टी...

पुण्यतिथि पर विशेष: शहीद ऊधम सिंह, सात समंदर पार जाकर जिसने की अपनी शपथ पूरी

पंजाब की सरजमी ने यूं तो कई वतनपरस्तों को पैदा किया है, जिनकी जांबाजी के किस्से आज भी मुल्क के चप्पे-चप्पे में दोहराए जाते हैं, पर मुहम्मद सिंह आज़ाद उर्फ ऊधम सिंह की बात ही कुछ और है। ऊधम...

साझी शहादत- साझी विरासत के नायाब उदाहरण हैं शहीद वारिस अली:इंसाफ मंच

मुजफ्फरपुर। शहीद वारिस अली का नाम स्वतंत्रता संग्राम में बिहार के उन चंद शहीदों की सूची शामिल होने का गौरव हासिल है जिन्होंने सबसे पहले कुर्बानी दी थी। यह पहले बिहारी योद्धा थे जिन्हें अंग्रेजों ने 6 जुलाई 1875 को...

‘हुल दिवस’ पर विशेष: आज भी बनी हुई है ‘संथाल हुल’ की प्रासंगिकता

कहना ना होगा कि भारत के इतिहास में 30 जून 1855 को प्रारंभ हुआ 'संथाल हुल' भारत में प्रथम सशस्त्र जनसंघर्ष था। जिसे मार्क्सवादी दर्शन के प्रणेता कार्ल मार्क्स ने भी अपनी पुस्तक 'नोट्स ऑफ इण्डियन हिस्ट्री' में इस...

आजादी की लड़ाई की क्रांतिकारी धारा के अगुवाओं में शामिल थे बिस्मिल

11 जून, अमर शहीद और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर योद्धा राम प्रसाद बिस्मिल की जन्मतिथि है। उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर में 11 जून 1897 को जन्मे, राम प्रसाद बिस्मिल, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन के एक...

जयंती पर विशेष: आज़ादी की लड़ाई की मुकम्मल नींव थे बिस्मिल

"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है" भारत की आज़ादी के आंदोलन में ये पंक्तियां क्रांतिकारियों का मशहूर नारा बनीं। 1921 में बिस्मिल अज़ीमाबादी द्वारा लिखी जोश-ओ-खरोश से लबरेज़ इन पंक्तियों ने जिस...

अमर शहीद बिरसा मुंडा की विरासत

अमर शहीद बिरसा मुंडा 19 वीं सदी के अंतिम दशक में हुए स्वतंत्रता आंदोलन के महान लोकनायक थे। उनका ‘उलगुलान’ (आदिवासियों का जल-जंगल-जमीन पर दावेदारी का संघर्ष) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। इस आंदोलन ने...

बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर विशेष : “नहीं बदली व्यवस्था, बनी हुई है उलगुलान की जरूरत”

''मैं केवल देह नहीं मैं जंगल का पुश्तैनी दावेदार हूँ पुश्तें और उनके दावे मरते नहीं मैं भी मर नहीं सकता मुझे कोई भी जंगलों से बेदखल नहीं कर सकता उलगुलान! उलगुलान!! उलगुलान!!!'' 'बिरसा मुंडा की याद में' शीर्षक से यह कविता आदिवासी साहित्यकार हरीराम मीणा ने...

स्वास्थ्य ढांचे का विकास और महामारी कानून, जानिए पूरा इतिहास

आपात स्थितियों से निपटने के लिये कानून और कानूनी ढांचे का सुदृढ़ होना बहुत ज़रूरी होता है। महामारी भी एक आपात स्थिति है जो जनता के स्वास्थ्य को न केवल खतरा पहुंचा सकती है, बल्कि अपने व्यापक कुप्रभाव से, समाज...

पत्रकारिता दिवस के स्मरण का मतलब

आज हिंदी पत्रकारिता 194 वर्ष पुरानी हो गई। 30 मई 1826 को कलकत्ते से हिंदी के पहले साप्ताहिक अखबार `उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन हुआ था। संपादक थे पंडित जुगल किशोर शुकुल। इस शब्द का अर्थ है समाचार-सूर्य। यह अखबार...
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कब बनेगा यूपी की बदहाली चुनाव का मुद्दा?

सोचता हूं कि इसे क्या नाम दूं। नेताओं के नाम एक खुला पत्र या रिपोर्ट। बहरहाल आप ही तय...
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