Wednesday, December 8, 2021

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‘हूल दिवस’ पर विशेष: आज झारखंड में जरूरत है एक और हूल की!

भले ही 'हूल दिवस' (संताल दिवस) को बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक स्तर पर याद किया जाता हो, लेकिन झारखंड के आम आदिवासी हूल दिवस के औपचारिक ज्ञान से भी दूर हैं। मैंने लगभग 50 आम आदिवासियों से यह...

बिरसा मुंडा: 25 साल का जीवन, 5 साल का संघर्ष और भगवान का दर्जा!

भारत के इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे आदिवासी नायक हैं जिन्होंने झारखंड में अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आदिवासी समाज की दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। अंग्रेजों द्वारा थोपे...

पुरानी इमारत में संसद नहीं तो पुराने कानून से राजद्रोह कैसे?

सोमवार को जब केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी पत्रकारों को समझा रहे थे कि जो पुराना संसद भवन है वह आजाद भारत के लिए नहीं बना था, उसी समय देश का सर्वोच्च न्यायालय राजद्रोह के अपराध को परिभाषित...

जब जलियांवाला बाग बन गया आजादी की लड़ाई का नया लांचिंग पैड

भारत की आजादी के आंदोलन में जिस घटना ने देशवासियों पर सबसे ज्यादा असर डाला, वह है जलियांवाला बाग हत्याकांड। इस हत्याकांड ने हमारे देश के इतिहास की पूरी धारा को ही बदल के रख दिया था। एक सदी...

स्वाधीनता संग्राम में कहीं नहीं था आरएसएस

हमारे देश के सत्ताधारी दल भाजपा के पितृ संगठन आरएसएस के स्वाधीनता संग्राम में कोई हिस्सेदारी न करने पर चर्चा होती रही है। पिछले कुछ वर्षों में संघ की ताकत में आशातीत वृद्धि हुई है और इसके साथ ही...

अंग्रेज भी नहीं कर सके इस तरह का काला कानून बनाने की हिम्मत: अखिलेन्द्र

लखनऊ। गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही कारपोरेट अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार ने किसान विरोधी तीन अध्यादेशों को संसद में घोर गैर लोकतांत्रिक ढंग से पारित करके कानून बना दिया। इसी तरह मजदूर विरोधी...

ज्योतिराव फुले: आधुनिक युग में दलितों-बहुजनों, महिलाओं एवं किसानों के संघर्ष के पहले नायक

तुम कैसे बेशर्म हुए, वश में होकर इन ब्राह्मणों के नित छूने को चरण अरे तुम झुक जाते हो यों कैसे। आर्यों की मनुस्मृति को देखो, ध्यानपूर्वक देखो उसमें धोखा है सब देखो, पढ़ो ज़रा इनके ग्रंथों को।। - ज्योतिराव फुले “मेरे तीसरे गुरु...

बेमिसाल थी अशफाकुल्ला और बिस्मिल की दोस्ती, खेल के मैदान से लेकर फांसी के फंदे तक रहा साथ

"कभी तो कामयाबी पर मेरा हिन्दोस्तां होगा। रिहा सैय्याद के हाथों से अपना आशियाँ होगा।।" अंग्रेजी शासन से देश को आज़ाद कराने के लिए हंसते−हंसते फांसी का फंदा चूम कर अपने प्राणों की आहुति देने वाले अशफ़ाक़ुल्ला खान जंग−ए−आजादी के महानायक...

विन्सेंट शीनः जिसने कहा था कि गांधी कभी भी मारे जा सकते हैं

विन्सेंट शीन ऐसे अमेरिकी पत्रकार थे जिन्होंने बहुत साफ शब्दों में कह दिया था कि महात्मा गांधी की कभी भी हत्या हो सकती है। यह बात उन्होंने प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रकार और लेखक विलियम एल. शरर से कही और उसके...

6 दिसम्बर 1992, यानी न्याय का विध्वंस

सरकारों के मुंह पर पुलिस का खून तो लगा ही हुआ था अब अदालतों का खून भी लग गया है। कहते हैं ब्रिटिश राज ने दुनिया भर में फैले अपने औपनिवेशिक साम्राज्य को चलाने के लिए उतना पुलिस की...
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सरकार की तरफ से मिले मसौदा प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर किसान मोर्चा मांगेगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा को सरकार की तरफ से एक लिखित मसौदा प्रस्ताव मिला है जिस पर वह...
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