Wednesday, October 27, 2021

Add News

british

पैंडोरा पेपर्स में रेमंड के चेयरमैन की ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में दो कंपनियां

पैंडोरा पेपर्स के खुलासे पर द इंडियन एक्सप्रेस लगातार खोजी रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी 14वीं रिपोर्ट में एक और बड़े नाम का खुलासा करते हुए कहा है कि रेमंड लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग...

माफीनामों के वीर हैं सावरकर

सावरकर सन् 1911 से लेकर सन् 1923 तक अंग्रेज़ों से माफी मांगते रहे, उन्होंने छः माफीनामे लिखे और सन् 1923 के बाद वह लगातार ही इस देश की जनता को बांटने की बात करते रहे। नफरत और हिंसा की...

आखिर कौन हैं निहंग और क्या है उनका इतिहास?

गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी के नाम पर एक नशेड़ी, गरीब, दलित सिख लखबीर सिंह को जिस बेरहमी से निहंगों ने मारा, हाथ काटे और उसकी लाश को बैरिकेड पर लटका दिया गया उससे तमाम संवेदनशील व्यक्ति सदमे में...

एक ऐतिहासिक विवाद का पटाक्षेप करने के लिए राजनाथ सिंह को धन्यवाद!

इसे स्थिति का व्यंग्य कहा जाए या व्यंग्य की स्थिति कि जो व्यक्ति महात्मा गांधी की हत्या का मास्टर माइंड माना गया था लेकिन अदालत में तकनीकी कारणों से संदेह का लाभ पाकर बरी हो गया था, उसे महान...

1857 की क्रांति, उर्दू पत्रकारिता और भारतीय पत्रकारिता का पहला शहीद

सबसे पहले तो इस किताब के शीर्षक में ‘क्रांति’ शब्द पर ध्यान जाता है। अपने देश में सन् 1857 के ब्रिटिश हुकूमत-विरोधी जन-विद्रोह को तरह-तरह की संज्ञाओं और विशेषणों से नवाजा जाता है। तब भारत में ब्रिटिश कंपनी-ईस्ट इंडिया...

राजनीतिक विराटता के साथ अद्भुत थी गांधी जी की सामाजिक व्यापकता

बीसवीं सदी के इतिहास पर जब भी चर्चा छिड़ेगी, महात्मा गांधी की स्थिति उस कालखंड की सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में मानी जायेगी। उनका योगदान भारत के स्वाधीनता संग्राम में तो है ही, पर उनका सबसे बड़ा योगदान...

जन्मदिन पर विशेष: भगत सिंह चाहते थे सर्वहारा की सत्ता

भगत सिंह को भारत के सभी विचारों वाले लोग बहुत श्रद्धा और सम्मान से याद करते हैं। वे उन्हें देश पर कुर्बान होने वाले एक जज़बाती हीरो और उनके बलिदान को याद करके उनके आगे विनत होते हैं। वे...

चीफ जस्टिस ने कहा- नहीं चल पाएगी अंग्रेजों के जमाने की न्याय व्यवस्था

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा है कि भारत की न्याय व्यवस्था औपनिवेशिक है और समय के हिसाब से अब इसमें परिवर्तन की जरूरत है। इसका भारतीयकरण जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि भारतीयकरण से मेरा तात्पर्य है...

संघर्षों और बलिदानों से भरा पड़ा है हिंदी पत्रकारिता का इतिहास

1826 की 30 मई को कोलकाता की आमड़ातल्ला गली से प्रकाशित अल्पजीवी हिंदी पत्र उदन्त मार्तण्ड ने इतिहास रचा था। यह साप्ताहिक पत्र था। पत्र की भाषा पछाँही हिंदी थी, जिसे पत्र के संपादकों ने “मध्यदेशीय भाषा” कहा था।...

अफगानिस्तान की कहानी नेहरू की जुबानी

सन् 1919 को अफगानिस्तान औपचारिक तौर पर ब्रिटिश शासन के चंगुल से मुक्त हुआ था। 19 अगस्त अफगानिस्तान अपनी स्वाधीनता दिवस मनाता है। इस संदर्भ में अपनी किताब विश्व इतिहास की झलक में जवाहर लाल नेहरू लिखते हैं कि...
- Advertisement -spot_img

Latest News

भाई जी का राष्ट्र निर्माण में रहा सार्थक हस्तक्षेप

आज जब भारत देश गांधी के रास्ते से पूरी तरह भटकता नज़र आ रहा है ऐसे कठिन दौर में...
- Advertisement -spot_img