Sunday, October 17, 2021

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आर्थिक तबाही को सुनिश्चित करने वाला जन-मनोविज्ञान!

चुनाव में मोदी की भारी जीत लेकिन जनता में उतनी ही ज्यादा ख़ामोशी! मोदी जीत गये, भले जनता के ही मत से, लेकिन विडंबना देखिये कि वही जनता उनकी जीत पर स्तब्ध है! 2019 में मोदी की जीत सांप्रदायिक और राष्ट्रवादी...

देश में आर्थिक मंदी बेहद चिंता का विषय: रघुराम राजन

नई दिल्ली। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुरामन राजन ने अर्थव्यवस्था में मंदी की स्थिति को बेहद चिंताजनक करार दिया है और इसको हल करने के लिए पावर और गैरबैंकिंग वित्तीय क्षेत्र की समस्याओं को तत्काल हल करने का सुझाव दिया...

कब तक छुपा रहेगा ‘राजनीतिक सफलता’ के पर्दे में आर्थिक नाकामी का चेहरा?

भारत के निर्यात सेक्टर में पिछले चार साल(2014-18) में औसत वृद्धि दर कितनी रही है? 0.2 प्रतिशत। 2010 से 2014 के बीच विश्व निर्यात प्रति वर्ष 5.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था तब भारत का निर्यात प्रति वर्ष 9.2 प्रति वर्ष...

गहराता आर्थिक संकट और भारत की विदेश नीति

नोटबंदी की तरह के घनघोर मूर्खतापूर्ण क़दम के अलावा भारत की अर्थ-व्यवस्था को डुबाने में मोदी सरकार की विदेशनीति का कम बड़ा योगदान नहीं है । आज भारत अपने उन सभी पड़ोसी देशों नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से...

क्यों नहीं बाहर दिख रहा है अर्थव्यस्था में मंदी का हाहाकार?

अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में भारत का स्थान फिसल गया है। 2018 में भारत पांचवें नंबर पर आ गया था अब फिर से सातवें नंबर पर आ गया है। 31 जुलाई के बिजनेस स्टैंडर्ड में ख़बर छपी है कि 2018...

गोदरेज और बजाज के बयानों का मतलब क्या है?

नई दिल्ली। कैफे काफी डे के मालिक वीजी सिद्धार्थ की खुदकुशी महज एक घटना नहीं बल्कि कारपोरेट वर्ल्ड में चल रही बड़ी हलचल का एक संकेत भर है। सिद्धार्थ ने अपनी परेशानियों को लेकर प्रतिक्रिया का जो तरीका अपनाया उसे किसी...

अर्थव्यवस्था के विध्वंस के लिये बिछा दिया गया है बारूद का व्यापक जाल

वित्त सचिव सुभाष गर्ग को केंद्र में रख कर शुरू हुए विवादों का जो चारों ओर से भारी शोर सुनाई दे रहा है, वह इतना बताने के लिये काफी है कि भारत की अर्थ-व्यवस्था और वित्त-प्रबंधन के केंद्रों पर अब पूरी...

अर्थव्यवस्था के संकट के केंद्र में हैं मोदी

रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के उस भाषण की अभी काफी चर्चा है जिसमें उन्होंने अर्थ-व्यवस्था की बीमारी के मूल में मोदी सरकार की फिजूलखर्चियों की बातें कही थीं। वे अपने भाषण में तथ्य देकर बताते हैं कि जीडीपी का...

तबाही की तरफ जा रही है मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था

मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था तबाह हो गयी है। बढ़ते एनपीए के कारण बैंकिंग सेक्टर की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि उसके पास एमएसएमई फर्मों को जो बड़े पैमाने पर निर्यात क्षेत्र से जुड़ी हुई...

केवल मोदी ही पेश कर सकते हैं नौकरी और सैलरी विहीन अर्थव्यवस्था का चमकता मॉडल

जून में निर्यात का आंकड़ा 41 महीनों में सबसे कम रहा है। आयात भी 9 प्रतिशत कम हो गया है। जो कि 34 महीने में सबसे कम है। सरकार मानती है कि दुनिया भर में व्यापारिक टकरावों के कारण ऐसा हुआ...
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700 शहादतें एक हत्या की आड़ में धूमिल नहीं हो सकतीं

11 महीने पुराने किसान आंदोलन जिसको 700 शहादतों द्वारा सींचा गया व लाखों किसानों के खून-पसीने के निवेश को...
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