Wednesday, October 27, 2021

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ओम प्रकाश कश्यप

पेरियार जयंती: सच्ची रामायण का विरोध धार्मिक से कहीं ज्यादा राजनीतिक है

(ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितंबर, 1879—24 दिसंबर, 1973) बीसवीं शताब्दी के महानतम चिंतकों और विचारकों में से एक हैं। उन्हें वाल्तेयर की श्रेणी का दार्शनिक, चिंतक, लेखक और वक्ता माना जाता।‘  भारतीय समाज और भारतीय व्यक्ति का मुकम्मल...

आर्थिक आत्मनिर्भरता : भाषण नहीं लोकोन्मुखी बदलाव से आएगी

घर-वापसी के लिए निकले मजदूरों के प्रति सामान्य राय है कि वे रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। यह कोई नहीं पूछ रहा कि हमारे अर्थतंत्र में आखिर कौन-सी कमी है जो अपने मेहनतकश वर्ग को आपद्काल में दो-चार महीने...

मई दिवस : संघर्ष की याद और संकल्पों का दिन

यदि तुम सोचते हो कि हमें फांसी पर लटकाकर तुम मजदूर आंदोलन को, गरीबी, बदहाली और विपन्नता में कमरतोड़ परिश्रम करने वाले लाखों लोगों के आंदोलन को-कुचल डालोगे....अगर तुम्हारी यही राय है तो हमें खुशी-खुशी फांसी के तख्ते पर...

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आज़ादी के 74 साल बाद भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई फूट की राजनीति का बीज हमारे भीतर अंखुआता -अंकुरित...