Monday, November 29, 2021

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आत्मनिर्भर भारत के बहाने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ती सरकारें

आज कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण एक ओर देश की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति बद से बदतर बनती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भरता की घोषणा के द्वारा जनता के...

अमेरिका अर्थव्यवस्था का अगर दिवाला निकल गया है तो भारत की क्या बिसात!

कोरोना संकट के दौर में जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था दस साल के सबसे बुरे दौर में पहुंच गयी है तो उधार यानि कर्ज़ पर आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था की बदहाली स्वयं समझी जा सकती है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम...

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फ़िच ने भी कह दिया- संकट से उबरने में अक्षम है निर्मला का पैकेज

अभी तक देश में कांग्रेस सहित विपक्षी दल ही मोदी सरकार के 20.97 लाख करोड़ रुपए के पैकेज पर जीडीपी के 10 फीसद होने पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन अब तो अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने भी इसकी सफलता पर...

कर्ज़ों वाले पैकेज़ से नहीं बल्कि सरकारी ख़र्चों से ही बचेगी अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था अलग आकारों वाले चार पहियों की सवारी है। यही पहिये ‘ग्रोथ-इंज़न’ भी कहलाते हैं। इन पहियों पर होने वाला खर्च ही GDP (सकल घरेलू उत्पाद) का ईंधन है। खर्च तीन तरह के होते हैं – सरकारी, कारोबारी और...

क्या घोषित राहत पैकेज असल में 2 लाख करोड़ रुपये से भी कम का है?

प्रधानमंत्री जी द्वारा 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद 13 मई से ही वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा उस 'भारी-भरकम' पैकेज की प्रतिदिन की जा रही धारावाहिक व्याख्या और माहात्म्य की पांचवीं...

जनता के पैसे पर सरकारी डाका का नाम है एफआरडीआई

देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था ने देश की जीडीपी को अंध महासागर में धकेल दिया है। सरकार की असफल आर्थिक नीति नहीं बल्कि गलत आर्थिक नीति और अलगाववादी राजनैतिक एजेंडों को पूरी करने की सनक ने देश की अर्थव्यवस्था को...

गिरती अर्थव्यवस्था और आम बजट

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की मौजूदा विकास दर अपने छह सालों में सबसे निचले स्तर पर है। वर्तमान में विकास दर 4.5 फीसद है। साल 2019 खत्म हो चुका और 2020 आ गया है। बजट आने वाला...

सक्षम अर्थशास्त्री के बगैर चल रही है भारतीय अर्थव्यवस्था

हर कोई अर्थशस्त्री है - घरेलू बजट तैयार करने वाली गृहणी से लेकर दूध बेचने वाले गोपालकों तक और पुर्जे बनाने वाले छोटे उद्यमी से लेकर बड़े भवन निर्माता तक, जो बड़े-बड़े अपार्टमेंट बना कर बेचते हैं। इन सभी को चाहे मजबूरीवश, खेल...

नोटबंदी के बाद से ही इकॉनमी पर दूरगामी की बूटी पिला रही है सरकार

नोटबंदी एक बोगस फ़ैसला था। अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा कर जनता के मनोविज्ञान से खेला गया। उसी समय समझ आ गया था कि यह अर्थव्यवस्था के इतिहास का सबसे बोगस फ़ैसलों में से एक है लेकिन फिर खेल खेला गया। कहा...

मुंह के बल गिरी अर्थव्यवस्था, जीडीपी विकास दर घटकर हुई 4.5 फीसदी

नई दिल्ली। जीडीपी विकास दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गयी है। दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच यह दर घटकर 4.5 फीसदी रह गयी है। पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर 5 फीसदी थी। 2018-19...
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भारत-माता का संदर्भ और नागरिक, देश तथा समाज का प्रसंग

'भारत माता की जय' भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान सबसे अधिक लगाया जाने वाला नारा था। भारत माता का...
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