Monday, November 29, 2021

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ओह, विदा चितरंजन भाई!

जीवन की इतनी ही सीमा होती है। चितरंजन भाई भी आज छोड़ गए। वे एक भव्य इलाहाबादी विभूति थे। हमारे लिए एक ज्वलंत वैचारिक ज्वाल! हालांकि मैं कभी भी उनके संगठन में नहीं रहा फिर भी उनका स्नेह सदैव...

नहीं रहे जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता चितरंजन, बलिया में ली आखिरी सांस

बलिया/नई दिल्ली। देश के जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता, जनवादी चिंतक व स्वतंत्र पत्रकार चितरंजन सिंह का आज निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक चितरंजन सिंह लम्बे समय से बीमार थे और आखिरी दिनों में कोमा...

हमेशा के लिए शांत हो गयी गरीबों की एक वेशकीमती आवाज, नहीं रहे जस्टिस होसबेट सुरेश

नई दिल्ली। 2002 के गुजरात नरसंहार समेत हिंसा और मानवाधिकारों के हनन की विभिन्न घटनाओं की जाँच करने वाले आयोगों में शामिल रहे मशहूर एक्टिविस्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होसबेट सुरेश का गुरुवार रात को 91...

दुआ और पटेल मामला: प्रगतिशील लेखक संघ ने कहा- आजाद आवाजों को दबाने की हरकतों से बाज आए सरकार

पंजाब/ नई दिल्ली। प्रगतिशील लेखक संघ ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ और आकार पटेल के खिलाफ केस दर्ज करने की सख्त निंदा की है और फौरन यह मामला रद्द करने की मांग रखी...

छह साला जश्न में डूबे मीडिया का यूरोपियन पार्लियामेंट और एनएचआरसी की सरकार को नोटिस से भला क्या वास्ता!

नई दिल्ली। क्या आपको पता है कि यूरोपियन पार्लियामेंट से सम्बंधित मानवाधिकार संगठन ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिख कर गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े और दूसरे ‘एक्टिविस्टों’ की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता ज़ाहिर की है? क्या आप...

सांस्कृतिक संगठनों ने जारी किया खुला बयान, कहा- बंद हो मानवाधिकार-कर्मियों, लेखकों और पत्रकारों की गिरफ़्तारियों का सिलसिला

(जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, प्रतिरोध का सिनेमा, संगवारी और जनवादी लेखक संघ की ओर से आज एक बयान जारी किया गया है जिसमें लेखकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों का देश...

क्या कोई अराजक समाज दे सकता है मानवाधिकारों के रक्षा की गारंटी?

क्या मानवाधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता किसी ताकतवर राष्ट्र की पहली पहचान है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा तभी मजबूत हो सकती है जब हम मानवाधिकारों के प्रश्न को गौण बनाते हुए मुट्ठी भर आतंकवादियों या अलगाववादियों के खात्मे के लिए लाखों...

एक डाक्यूमेंट्री में सनसनीखेज खुलासा; कश्मीर में लोगों से करायी जाती थी बंधुआ मजदूरी, अफसर तक हुए शिकार

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में बेगारी के सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। और यह सिलसिला एक, दो, पांच साल नहीं बल्कि 12 से लेकर 15 साल तक चला है। यह किसी एक इलाके में नहीं बल्कि कई जिलों में बदस्तूर जारी...

डॉक्टर लाखन सिंह जैसे लोग मरा नहीं करते

आज ही अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस है और आज ही साथी डाक्टर लाखन सिंह, बिलासपुर की मृत्यु की सूचना मिली है हिमांशु कुमार जी से। सन 1990 की बात थी- दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता वर्ष मनाया जा रहा था। देशभर के समाजवादी लोग,...

‘चिदंबरम ने कारपोरेट फ़ासिज़्म की ज़मीन तैयार की, मानवाधिकारों को कुचला, सैन्यीकरण की रफ़्तार को तेज़ किया’

प्रख्यात कवि साहित्यकार  असद ज़ैदी ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है  ‘चिदम्बरम अपने बेशतर कारनामों में अकेले नहीं थे। वे उस मशहूर तिकड़ी के सदस्य हैं जिसने सत्ता में रह कर योजनाबद्ध तरीक़े से कारपोरेट फ़ासिज़्म की ज़मीन तैयार की, गणतांत्रिक...
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भारत-माता का संदर्भ और नागरिक, देश तथा समाज का प्रसंग

'भारत माता की जय' भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान सबसे अधिक लगाया जाने वाला नारा था। भारत माता का...
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