Tuesday, October 26, 2021

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journalism

1857 की क्रांति, उर्दू पत्रकारिता और भारतीय पत्रकारिता का पहला शहीद

सबसे पहले तो इस किताब के शीर्षक में ‘क्रांति’ शब्द पर ध्यान जाता है। अपने देश में सन् 1857 के ब्रिटिश हुकूमत-विरोधी जन-विद्रोह को तरह-तरह की संज्ञाओं और विशेषणों से नवाजा जाता है। तब भारत में ब्रिटिश कंपनी-ईस्ट इंडिया...

संघर्षों और बलिदानों से भरा पड़ा है हिंदी पत्रकारिता का इतिहास

1826 की 30 मई को कोलकाता की आमड़ातल्ला गली से प्रकाशित अल्पजीवी हिंदी पत्र उदन्त मार्तण्ड ने इतिहास रचा था। यह साप्ताहिक पत्र था। पत्र की भाषा पछाँही हिंदी थी, जिसे पत्र के संपादकों ने “मध्यदेशीय भाषा” कहा था।...

सुप्रीम कोर्ट ने ‘द वायर’ को यूपी पुलिस की तीन एफआईआर पर अंतरिम सुरक्षा दी

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार 8 अगस्त, 21 को कहा कि वह नहीं चाहता कि प्रेस की स्वतंत्रता कुचली जाए लेकिन पत्रकारों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को रद्द कराने के लिए सीधे उसके पास चले जाने के लिए वह उनके...

सरकार को उसकी परेशानी और डर मुबारक: पेगासस सूची में शामिल ईप्शा शताक्षी

अगर आप ग्रासरूट पर पत्रकारिता करते हो, आप एक्टिविज्म में हो, किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन से ताल्लुक रखते हो या ऊंचे पद पर आसीन हो, तब तो आप सर्विलांस पर हो। मगर जब आप ऐसा कुछ नहीं करते...

गोपनीयता कानून, खोजी पत्रकारिता और राफेल के बीच रिश्ता

मीडियापार्ट, फ्रांस की एक खोजी पत्रिका है जिसने राफेल के सौदे पर पहली बार घोटाले का संकेत दिया था, जब उसने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के हवाले से यह खबर छापी थी कि, नए और संशोधित सौदे में...

युवकधारा की खेती में सुरेश सलिल ने पैदा किए सैकड़ों लेखक-पत्रकार

हिंदी, साहित्य और पत्रकारिता में अमूल्य योगदान करने वाले 19 जून, 1942 को जन्मे जनपक्षीय कवि, लेखक सुरेश सलिल 79 बसंत पार कर चुके हैं। 1980 के दशक के मध्य के वर्षों में युवकधारा में सलिल जी के संपादकत्व...

पुस्तक समीक्षा: ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ यानी संगीत के बहाने समाज की चीर-फाड़

रणेंद्र का ताजा उपन्यास 'गूंगी रुलाई का कोरस' चर्चा में है। राजकमल प्रकाशन से आया यह उपन्यास अमेजन पर उपलब्ध है। रणेंद्र ने झारखंड में प्रशासनिक दायित्व निभाते हुए साहित्य की दुनिया में राष्ट्रीय पहचान बनाई। इससे पहले उनके...

‘द लिस्ट : मीडिया ब्लडबाथ इन कोविड टाइम्स’ यानी पत्रकारों पर कोरोना कहर की जिंदा दास्तान

ऐसा माना जाता है कि पत्रकारिता एवं फिल्में समाज का आईना होती हैं। समाज में जो कुछ हो रहा होता है उसे मुकम्मल तौर पर समाज के सामने लाने की जिम्मेदारी पत्रकारिता की ही होती है। फिल्मों को कुछ...

फर्जीवाड़ा: उत्तराखंड में एक विश्वविद्यालय के पीआरओ को बना दिया पत्रकारिता विभाग में प्रोफेसर

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, नैनीताल में हाल में हुई प्रोफेसरों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं। ज़्यादातर मामलों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। सबसे सनसनीखेज...

टीवी डिबेट में गाली-गलौच: यहां भी पीड़ित ही निशाने पर

रिपब्लिक भारत के टीवी डिबेट में पैशाचिक गाली-गलौच की घटना के बाद हाथरस की घटना याद आ रही है। इसलिए नहीं कि यह सामूहिक बलात्कार की घटना थी, बल्कि इसलिए कि जबरदस्ती रात के अंधेरे में ‘अंतिम संस्कार’  करने...
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में रिश्वत के दोषी पाए गए एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश की फाइल पर चार साल से कार्रवाई नहीं

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल भले ही राजनेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों के समयबद्ध निपटान का संकल्प व्यक्त किया...
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