Sunday, October 1, 2023

journalism

कुलदीप नैयर: मानवाधिकार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आजीवन संघर्षरत रहे

नई दिल्ली। यह अस्सी के दशक की बात है। मैं गांधीवादियों, समाजवादियों और आंबेडकरवादियों के विभिन्न आंदोलनकारी समूहों को साथ लाने की कोशिश का हिस्सा बन गया था। इस काम में दिल्ली के विजय प्रताप, पटना के रघुपति और...

पत्रकारिता की मूंछ और सत्ता की पूंछ

करीब पच्चीस-तीस साल की पत्रकारिता से गुजरने के बाद मैंने पाया कि सन् 2014 यानी भाजपा नीत राजग के सत्तारोहण के बाद सब कुछ विध्वंसात्मक और अपमानजनक ढंग से बदल गया। सबसे पहले चैनलों ने घुटने टेके सत्ता के...

सत्ता और संपत्ति के भार से डगमग पत्रकारिता

हिन्दुस्तानियों के हित हेतु तथा उन्हें परावलंबन से मुक्ति दिलाकर स्वतंत्र दृष्टि प्रदान करने के निमित्त 30 मई 1826 को कलकत्ते के कोलू टोला नामक मुहल्ले के 37 नंबर आमड़ातल्ला गली के पते से युगल किशोर शुक्ल ने हिन्दी...

देहरादून: जयसिंह रावत को मिला प्रथम भैरव दत्त धूलिया पत्रकार सम्मान

देहरादून, उत्तराखंड। देहरादून में आयोजित एक समारोह में पुरस्कार वितरण के बहाने पत्रकारिता की मौजूदा हालात पर चिन्तन किया गया। वक्ताओं ने इस मौके पर मीडिया में मौजूदा दौर में घुस आई विसंगतियों को लेकर चिन्ता जताई। कहा गया...

शीतला सिंह: धार्मिक उन्माद व पत्रकारिता के दूषित प्रवाहों के विरुद्ध अलख जगाये रखने वाला महारथी चला गया 

बीती शताब्दी के नवें दशक की बात है। ‘पढ़ाई-लिखाई’ खत्मकर बेरोजगार घूम रहा था और कई मीडिया संस्थानों में खासा बढ़िया इंटरव्यू देने के बावजूद हाथ लगी निराशा ने मनोबल को बुरी तरह तोड़ रखा था। इसलिए अयोध्या (उन...

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे: अभिव्यक्ति की आजादी पर बढ़ते खतरे  

भारत समेत विश्व के कई देशों में अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरे बढ़ गए हैं। इसी बीच, तीन देश: ताजिकिस्तान, भारत और तुर्की जो अभी तक समस्याग्रस्त स्थिति में थे, से सबसे निचली श्रेणी में पहुंच गये हैं। खासकर,...

जयंती पर विशेष: वर्तमान में नहीं रही प्रेमचंद युग की पत्रकारिता

वाराणसी। प्रेमचंद जी कहते हैं कि समाज में ज़िन्दा रहने में जितनी कठिनाइयों का सामना लोग करेंगे उतना ही वहां गुनाह होगा। अगर समाज में लोग खुशहाल होंगे तो समाज में अच्छाई ज़्यादा होगी और समाज में गुनाह नहीं के...

‘तन्हा सेल’ में रखे गए हैं स्वतंत्र पत्रकार रुपेश कुमार सिंह

जनपक्षीय पत्रकारिता कोई फूलों का सेज नहीं है, रूपेश जी ने यह ठीक ही कहा था जब पिछले साल पेगासस जासूस मामले में उनका नाम आया था। हम इसे प्रूफ होता लगातार 17 जुलाई 2022 से देख सकते हैं,...

व्यवसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता पर हावी, लोकतंत्र से समझौता:चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मीडिया पर व्यापारिक घरानों के वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक मीडिया हाउस के अन्य व्यवसायिक हित होते हैं, तो वह बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। अक्सर, व्यवसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता...

उत्पीड़न देखकर डरने लगे हैं पत्रकारिता के पेशे में आने के इच्छुक छात्र

इंडिया प्रेस फ्रीडम रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2021 में कुल छह पत्रकारों की हत्या हुई, 108 पत्रकारों के ऊपर हमले हुए, तो वहीं 13 मीडिया घरानों को तरह-तरह से टारगेट किया गया। पत्रकारों के ऊपर लगातार हुए हमलों से...

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दीगर शायरों से ज़ुदा, बेहद ख़ास और बग़ावती तेवर वाले थे मजरूह सुल्तानपुरी

1 अक्टूबर, 1919 यही वो तारीख है जब तरक़्क़ीपसंद शायर मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म हुआ था। तरक़्क़ीपसंद तहरीक के...