Tuesday, January 18, 2022

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भारत-पाक की क्रिकेट पिच पर तैयार होता है मुनाफे का बाजार!

आखिरकार वो दिन आया जिसका क्रिकेटप्रेमियों को बेसब्री से इंतजार था, 24 अक्टूबर। भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला हुआ और पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी। आप तक पहुंचाया गया कि भारतीय फैंस दुखी हुए, पाकिस्तानी...

कांग्रेस ने पूछा- 350 करोड़ रुपये सालाना लाभ देने वाली कोनकोर को आखिर क्यों बेचना चाहती है सरकार?

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कोनकोर को बेचे जाने पर कड़ा एतराज जाहिर किया है। कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने आज एक स्पेशल प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि सरकार न तो रेलवे बेच सकती है और न ही कोनकोर,...

“डॉक्टर का काम मुनाफा कमाना नहीं, मरीज की जान बचाना है”

वाराणसी। मरीज और डॉक्टर का रिश्ता बड़ा संवेदनशील होता है  डॉक्टर पर मरीज का विश्वास किसी भी डॉक्टर के लिए सबसे बड़ी पूंजी होती है और मरीज को तकलीफ़ से दर्द से निजात दिलाना ही डॉक्टर की सबसे बड़ी...

मोदी का हिंदुत्व हारा है कोरोना से, सिस्टम नहीं

यह अंदाजा किसी को नहीं रहा होगा कि हिंदुत्व के रथ के सामने कोई अदृश्य शक्ति खड़ी हो जाएगी और उसे हरा देगी। आक्सीजन के लिए तड़प कर मर रहे लोगों तथा गंगा में तैरती लाशों को मौजूदा मीडिया...

कोरोनाकाल में देश के अरबपतियों की संपत्ति में बेतहाशा इजाफा

कोविड-19 महामारी के चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्थायें तबाह हो गईं। काम-काज और नौकरी खोकर गरीब और गरीब हो गया। छात्रों की पूरी एक साल की पढ़ाई चौपट हो गई। सब कुछ अस्त-व्यस्त और ठप्प हो गया। लेकिन एक...

वादा था स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का, खतरे में पड़ गयी एमएसपी

वादा फरामोशी यूं तो दुनिया भर की सभी सरकारों और राजनीतिक दलों का स्थायी भाव होता है, पर चर्चा उसी की होती है जो वर्तमान में सामने है। 20 सितंबर को राज्यसभा से किसी तरह ध्वनिमत के सहारे सरकार...

स्कूल और छात्र के बीच महज मध्यस्थ नहीं है अध्यापक

महामारी ने हमारी सामूहिक सोच को अव्यवस्थित कर दिया है। और यह मान लिया गया है कि दुनिया बिखर चुकी है। मैं खुद से एक जरूरी सवाल पूछता हूंः हम खुद को एक अध्यापक के बतौर कैसे परिभाषित करें?...

मन नहीं मुनाफे की बात! जीओ के बाद पीएम मोदी बने रिलायंस के खिलौने के ‘ब्रांड अम्बेसडर’

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने कल रविवार को अपने मन की बात में जब कहा कि भारत खिलौने का हब बनता जा रहा है और लोगों को देश में निर्मित खिलौने खरीदने चाहिए तो यह सुनकर लोगों के अचरज...

हिन्दुस्तान में कार्पोरेट सोशल मीडिया : नफरत बेचो, मुनाफा कमाओ

"कुछ वाकई में मनोरोगी जैसे दिख रहे थे। लोगों का बहुलांश चिथड़े लपेटे और निरक्षर किसानों का था, जो तुत्सी के प्रति नफरत की भावना से आसानी से उन्माद में आ सकते थे। मैं जिनसे मिला उनमें शायद सबसे...

कॉरपोरेट लूट की वेदी पर अब भारतीय रेलवे के बलि की तैयारी

इंडियन रेलवे जिसे 'आम भारतीय जनमानस की जीवन रेखा' कहा जाता रहा है, अब इसके जीवन की बागडोर कॉरपोरेट के हाथों होगी। और भारतीय रेलवे की धड़कनें पूँजीवादी शोषकों के इशारों पर निर्देशित होंगी। ऐसा नहीं कि अचानक से भारतीय...
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पुस्तक समीक्षा: सर सैयद को समझने की नई दृष्टि देती है ‘सर सैयद अहमद खान: रीजन, रिलीजन एंड नेशन’

19वीं सदी के सुधारकों में, सर सैयद अहमद खान (1817-1898) कई कारणों से असाधारण हैं। फिर भी, अब तक,...
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