Friday, July 1, 2022

secularism

मौजूदा समय में नहीं लड़ी जा सकती हैं अतीत की लड़ाइयां

ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने के अधिकार की मांग करते हुए पांच महिलाओं द्वारा अदालत में प्रकरण दायर करने के बाद से पूरे देश में अतीत से जुड़े कई मुद्दे और विवाद सार्वजनिक विमर्श के केन्द्र में आ गए...

गैर-बराबरी और कट्टरता भरे समाज का सेक्युलरिज्म बनाम हिजाब-विवाद

बात पिछली शताब्दी के सन् साठ दशक की है। हम लोग स्कूल में पढ़ते थे। वह गांव का एक सरकारी स्कूल था। उसमें आसपास के कई गांवों के बच्चे आते थे। ज्यादातर बच्चे हिन्दू-उच्चवर्णीय समुदाय के होते थे। उन...

हिन्दुत्व की काशी करवट

बनारस में पूरी धजा में था हिंदुत्व। डूबता, उड़ता, तैरता, तिरता, घंटे-घड़ियाल बजाता, शंखध्वनियों में मुण्डी हिलाता, दीपज्योतियों में कैमरों को निहारता, झमाझम रोशनी में भोग लगाता खुद पर खुद ही परसादी चढ़ाता, रातबिरात घूमता; पूरी आत्ममुग्ध धजा में...

धर्म के लबादे में राजनीति का नंगा नाच

ये मानते हुए कि हमारे संविधान ने अनुच्छेद 25 में प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदत्त की है, अनुच्छेद 28 भी इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत के संविधान में जोड़ा गया है कि भारत के संविधान को...

धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की आत्मा है : प्रो.मंडल

वाराणसी। जिस आइडिया ऑफ इंडिया का सपना आजादी के आंदोलन के दौरान परवान चढ़ा था आज वह बर्बाद हो रहा है। मुल्क नफरत, गैर बराबरी और कारपोरेट फासीवाद की आग में झुलस रहा है। यदि समय रहते स्वतन्त्रता, समता,...

क्या यूपी में पश्चिम बंगाल जैसा ही जहरीला चुनाव अभियान चलाएंगे मोदी-योगी?

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों के लिए प्रचार ने जोर पकड़ लिया है और उसी के साथ भारतीय जनता पार्टी का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का अभियान भी। मीडिया का बड़ा हिस्सा हर बार की तरह सत्ताधारी पार्टी की शाखा के...

मोदी के न्यू इंडिया का मकसद भारत को भूत के अंधेरे में ले जाना है: सीताराम येचुरी

"मोदी के न्यू इंडिया का मकसद  आजादी के बाद भविष्य के उजाले की तलाश में लगे भारत को भूतकाल के अँधेरे में ले जाना है।  आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संवैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करने की...

क्या भारत में धर्मनिपेक्षता अतीत का अवशेष बन गई है ?

करोड़ों भारतीय आतुर थे कि हमारे देश के खिलाड़ी टोक्यो ओलम्पिक में शानदार प्रदर्शन करें और अधिक से अधिक संख्या में पदक लेकर स्वदेश लौटें। अनेक भारतीय खिलाड़ियों ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित खेल स्पर्धा में पदक जीते। परन्तु...

अजय बिष्ट से योगी आदित्यनाथ और अब ठोंक दो!

कहने को तो यूपी देश का सबसे बड़ा सूबा है। और लोकतंत्र के भी वहां सबसे ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद की जाती है। लेकिन हो बिल्कुल उल्टा रहा है। क्योंकि यहां के मुख्यमंत्री का लोकतंत्र, सामंजस्य और किसी...

क्या धर्मनिरपेक्षता भारत की परंपराओं के लिए खतरा है?

भारत को एक लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश राज से मुक्ति मिली। यह संघर्ष समावेशी और बहुवादी था। जिस संविधान को आजादी के बाद हमने अपनाया, उसका आधार थे स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के...
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ग्राउंड रिपोर्ट : नाम, नमक और निशान पाने के लिए तप रहे बनारसी नौजवानों के उम्मीदों पर अग्निवीर स्कीम ने फेरा पानी 

वाराणसी। यूपी और बिहार में आज भी किसान और मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे किशोरावस्था में कदम रखते ही...
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