Wednesday, October 20, 2021

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theater

हिंदी रंग आलोचना के शिखर पुरुष नेमिचन्द्र जैन की रचनावली का प्रकाशन एक ऐतिहासिक घटना

नेमि जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। कम्युनिस्ट पार्टी से लेकर इप्टा आंदोलन में सक्रिय रहे नेमि जी कवि, आलोचक  रंग चिंतक  संपादक  नाटक कार और अनुवादक  भी। साहित्य की हर विधा में योगदान दिया। 8 खण्डों में छपी...

‘कोरस’ की नाट्य प्रस्तुति: ‘नीच’ में दिखा समानता के लिए स्त्री का संघर्ष

पटना। कोरोना महामारी के दौर में जहां सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियां लगभग ठप हैं, वैसे में 'कोरस' ने सामाजिक उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के ख़िलाफ़ पटना के छज्जू बाग स्थित 13 नं. विधायक आवास के प्रांगण में कोरोना गाइडलाइन का पालन...

भारतीय संविधान के मूल तत्वों को बचाने का संकल्प है धनंजय कुमार का शाहकार नाटक ‘सम्राट अशोक’

26 जनवरी, 1950 में संविधान को अपनाकर भारत एक सार्वभौम राष्ट्र के रूप में अवतरित हुआ। विश्व ने भारत के इक़बाल को सलाम किया। भारत में पहली बार जनता को देश का मालिक होने का संवैधानिक अधिकार मिला। संविधान का मतलब...

सुरेखा सीकरी; अभिनय के लिए 70 एमएम का पर्दा भी छोटा था

दुनिया के लिए 'सुरेखा सीकरी' , पर हमारे लिए 'फ़याज़ी, नहीं 'फैज्जी'। जब सब तरफ़ से तुम्हारे इस जहां से रुख़्सत हो जाने की आवाज़ें आ रही हैं, जुलाई की उमस से भरी गर्मी में पेड़ भी शिथिल खड़े...

प्रयागराज: अस्पताल में गैंगरेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता की मौत, प्रशासन ने कहा-लड़की गलतफहमी का शिकार

उत्तर प्रदेश के जिला प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर में अपने साथ गैंगरेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता की आज मंगलवार की सुबह मौत हो गयी। फिलहाल मौके पर मेडिकल कॉलेज व पुलिस प्रशासन के कई अफसर...

“25 वाला आटा 150 रुपये प्रति किलो पहुंच जाएगा, तब आप क्या करेंगे?”

“जिस मुजारा आंदोलन का अंत पंजाब में 1953 में हुआ था आज वैसा ही आंदोलन नए रूप में कृषि कानूनों के जरिए आया है। यहां शामिल हुए सभी किसान अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।...

दिनेश ठाकुर, थियेटर जिनकी सांसों में बसता था

हिंदी रंगमंच में दिनेश ठाकुर की पहचान शीर्षस्थ रंगकर्मी, अभिनेता और नाट्य ग्रुप 'अंक' के संस्थापक, निर्देशक के तौर पर है। दिनेश ठाकुर के नाट्य ग्रुप 'अंक' का सफर साल 1976 में शुरू हुआ था जो उनके इस दुनिया...

जन्म दिवस विशेष: सदा रहेगी गुरशरण सिंह की रोशनी

गुरशरण सिंह हमारे दौर के योद्धा थे। एक विलक्षण सांस्कृतिक महा-लोकनायक। एक ऐसी मशाल जो मनुष्य विरोधी हर अंधेरे को चीरने के लिए सदैव तत्पर रहती है। उन्होंने लोक चेतना के लिए जो किया और जैसा जीवन जिया, उसे...

जन्मदिन पर विशेष: जनवादी रंगमंच के पितामह गुरशरण सिंह का अधूरा सपना

नाटककार गुरशरण सिंह जनवादी रंगमंच के पितामह थे। उन्हें सब प्यार से ‘भा जी’ (भाई साहब) कहते थे। वह दोज़ख के खौफ से इबादत करने वालों में से नहीं थे, नास्तिक थे। उन्हें यकीन नहीं था कि दुआ की...

जन्मदिन विशेषः हबीब तनवीर ने कह दिया था सामाजिक-राजनीतिक उद्देश्यों के लिए फिल्मों को अलविदा

आधुनिक रंगमंच में हबीब तनवीर की पहचान लोक को पुनर्प्रतिष्ठित करने वाले महान रंगकर्मी की है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 1 सितंबर, 1923 को जन्मे हबीब तनवीर, रंगमंच में अपने आगाज से लेकर अंत तक उन सांस्कृतिक मूल्यों-रंगों...
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लखीमपुर मामले से पैर खींचती नहीं दिखनी चाहिए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अवकाश लेने से पहले...
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