Tuesday, October 26, 2021

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मजाज़ जन्मदिन विशेष: एक शायर जिसका गम से था ख़ास रिश्ता

कहने की जरूरत नहीं कि आज मजाज दुनिया पे छाए हुए हैं। लेकिन, हिंदी हो या उर्दू अदब, मजाज का मूल्यांकन ठीक से आज तक नहीं किया गया। एक तरक्कीपसंद शायर, जिसने कभी नरगिस को देखकर कहा था- तेरे...

1857 की क्रांति, उर्दू पत्रकारिता और भारतीय पत्रकारिता का पहला शहीद

सबसे पहले तो इस किताब के शीर्षक में ‘क्रांति’ शब्द पर ध्यान जाता है। अपने देश में सन् 1857 के ब्रिटिश हुकूमत-विरोधी जन-विद्रोह को तरह-तरह की संज्ञाओं और विशेषणों से नवाजा जाता है। तब भारत में ब्रिटिश कंपनी-ईस्ट इंडिया...

जन्मदिवस पर विशेष: फ़ारूक़ी में हिंदुस्तानी तहज़ीब और अदबी रिवायत की थी गहरी समझ

समूचे दक्षिण एशिया की उर्दू-हिंदी अदबी दुनिया में शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी का नाम किसी तआरुफ़ का मोहताज़ नहीं। उनका नाम बड़े ही इज़्ज़त-ओ-एहतराम के साथ लिया जाता है। आधुनिक उर्दू आलोचना में किया गया फ़ारूक़ी का काम संगे मील है।...

कृश्न चंदर की पुण्यतिथि: कड़वी हकीकत का सच्चा अफसानानिगार

उर्दू अदब, खास तौर से उर्दू अफसाने को जितना कृश्न चंदर ने दिया, उतना शायद ही किसी दूसरे अदीब ने दिया हो। इस मामले में सआदत हसन मंटो ही उनसे अव्वल हैं, वरना सभी उनसे काफी पीछे। उन्होंने बेशुमार लिखा, हिंदी और उर्दू...

जोश मलीहाबादी की पुण्यतिथि: मेरा नाम इंकलाबो, इंकलाबो, इंकिलाब

उर्दू अदब में जोश मलीहाबादी वह आला नाम है, जो अपने इंकलाबी कलाम से शायर-ए-इंकलाब कहलाए। जोश का सिर्फ यह एक अकेला शे’र,‘‘काम है मेरा तगय्युर (कल्पना), नाम है मेरा शबाब (जवानी)/मेरा नाम ‘इंकलाबो, इंकलाबो, इंकिलाब।’’ ही उनके तआरुफ और अज्मत को बतलाने के लिए...

गुलाम रब्बानी की जयंती: रब्बानी ने थामा था घर से बगावत करके लाल झंडा

मौलाना हामिद हसन कादरी और मैकश अकराबादी की अदबी सोहबतों में उनका शे’री शौक परवान चढ़ा। तालीम पूरी होने के बाद, उन्होंने कुछ दिन वकालत की। शायराना मिज़ाज की वजह से उन्हें यह पेशा ज्यादा समय तक रास...

फ़ैज़ की जयंतीः ‘अब टूट गिरेंगी ज़ंजीरें, अब जिंदानों की खैर नहीं’

उर्दू अदब में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का मुकाम एक अजीमतर शायर के तौर पर है। वे न सिर्फ उर्दू भाषियों के पसंदीदा शायर हैं, बल्कि हिंदी और पंजाबी भाषी लोग भी उन्हें उतनी ही शिद्दत से मोहब्बत करते हैं।...

उर्दू के क्लासिक अदब को जिंदा कर गए शम्सुर्रहमान फारूकी

यह सन् 1998 की बात है। तब मैं प्रकाशन विभाग से निकलने वाली उर्दू मैगजीन आज कल में सब एडिटर था और मेरे संपादक थे शम्सुर्रहमान फारूकी के भाई महबूब रहमान फारूकी साहब। तब शम्सुर्रहमान साहब का एक मजमून...

हंसाते हुए संजीदा कर देने वाले शायर अकबर इलाहाबादी

दबंग फिल्म में सलमान खान का dialogue आपने सुना होगा ‘मैं दिल में आता हूं समझ में नहीं’। गुलाम अली की वो गज़ल भी कभी न कभी आपके कानों से होकर गुज़री होगी, ‘हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी...

राहत की स्मृति: ‘वो गर्दन नापता है नाप ले, मगर जालिम से डर जाने का नहीं’

अब ना मैं हूं ना बाक़ी हैं ज़माने मेरेफिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरेकुछ ऐसे ही हालात हैं, शायर राहत इंदौरी के इस जहान-ए-फानी से जाने के बाद। उनको चाहने वाला हर शख्स, इस महबूब शायर को...
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वो जो तारीक राहों में मारे गये: खाद शहीद भोगीलाल पाल की याद को सलाम

शुक्रवार ( 22 अक्टूबर) को dap खाद कि लाइन में खड़े-खड़े, उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के नया गांव...
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