जर्मनी में बढ़ता अंधराष्ट्रवादी फासीवाद और नाजीवाद का खतरा

आज विश्व भर में आर्थिक संकट के कारण अंधराष्ट्रवादी फासीवाद और नाजीवाद का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न देशों में फासीवादी पार्टियाँ और नेता सत्ता में आ रहे हैं, जो अल्पसंख्यकों और प्रवासियों के खिलाफ खुलेआम नफरत फैला रहे हैं। यह परिघटना अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में देखी जा रही है। जर्मनी में, द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर की पराजय के बाद नाजीवाद के प्रतीकों और समर्थक दलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालाँकि ये प्रतिबंध आज भी लागू हैं, फिर भी विशेष रूप से पूर्वी जर्मनी में दक्षिणपंथी नाजीवादी पार्टियों का प्रभाव बढ़ रहा है।

जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट के डेसाउ शहर में दक्षिणपंथी कट्टरता और नस्लवाद तेजी से फैल रहा है। शहर की सड़कों पर नाजी प्रतीक (स्वास्तिक), हिटलर के समर्थन में चित्र और नफरत भरे नारे अब आम हो गए हैं। यह समस्या केवल डेसाउ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जर्मनी, खासकर पूर्वी क्षेत्रों में एक चलन बनता जा रहा है। मई 2025 में, जर्मनी की फेडरल क्रिमिनल पुलिस के प्रमुख होल्गर म्यूनिख ने चेतावनी दी कि कम उम्र के बच्चे भी दक्षिणपंथी और हिंसक विचारों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, और कुछ तो अपराध करने के लिए समूह बना रहे हैं।

डेसाउ में दक्षिणपंथी सोच के खिलाफ काम करने वाली संस्था ‘प्रोजेक्ट गेगेनपार्ट’ के लुकास योशर ने बताया, “पूर्वी जर्मनी के ग्रामीण इलाकों में ‘नाजी’ होना अब पॉप संस्कृति का हिस्सा बन गया है। दीवारों पर अमेरिकी रैपर कान्ये वेस्ट के गाने ‘हाइल हिटलर’ जैसे नारे लिखना कुछ लोगों को ‘कूल’ लगता है।” डेसाउ के कुछ युवाओं ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में स्वीकार किया कि उनके लिए दक्षिणपंथी सोच सामान्य हो गई है। उन्होंने कहा, “हिटलर की बहुत तारीफ होती है।” स्कूलों में ‘हिटलर सलाम’ देना और पार्टियों में “विदेशी बाहर निकलो” जैसे नारे लगाना आम बात हो गई है।

आखिर यह स्थिति कैसे बनी? कोई भी युवा अचानक कट्टरपंथी नहीं बनता; यह एक धीमी प्रक्रिया है, जो समय के साथ असर दिखाती है। डेसाउ की आबादी लगभग 75,000 है, और यह अपने आसपास के क्षेत्रों का मुख्य केंद्र है, जहाँ लोग खरीदारी और चिकित्सा सुविधाओं के लिए आते हैं। जर्मनी की लगभग एक-चौथाई आबादी ऐसे मध्यम आकार के शहरों में रहती है। 1990 के एकीकरण के बाद डेसाउ-रॉस्लाउ (पास के एक कस्बे के साथ विलय के बाद नया नाम) में आजादी और नए अधिकार तो मिले, लेकिन आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और पढ़े-लिखे युवाओं का पलायन भी बढ़ा। इन कारणों से शहर धीरे-धीरे सिकुड़ता गया।

हालाँकि, सरकार ने इस क्षेत्र में भारी निवेश किया है। एकीकरण के बाद डेसाउ में उद्योग, सड़कें, इमारतें और सांस्कृतिक संस्थानों के सुधार में एक अरब यूरो से अधिक खर्च किए गए हैं। आज डेसाउ एक स्वच्छ और सुंदर शहर है, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है, क्योंकि यहाँ 20वीं सदी की प्रभावशाली वास्तुकला शैली ‘बाउहाउस’ की शुरुआत हुई थी। बाउहाउस आधुनिकता, नवीनता, बेहतर और न्यायपूर्ण भविष्य तथा मानवतावाद का प्रतीक है। लगभग एक हजार अंतरराष्ट्रीय छात्र यहाँ पढ़ते हैं, और डेसाउ की यूनिवर्सिटी वैश्विक शिक्षा का केंद्र है। फिर भी, सरकारी निवेश, सांस्कृतिक प्रयासों और जागरूकता अभियानों के बावजूद, डेसाउ नफरत और हिंसा की घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है।

साल 2000 में दक्षिणपंथी युवाओं ने 39 वर्षीय अल्बर्टो एड्रियानो की बेरहमी से हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए कि वह अश्वेत था। तत्कालीन चांसलर गेरहार्ड श्रोडर ने जनता से दक्षिणपंथी कट्टरता के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी। 2005 में, शरणार्थी ओउरी जलोह पुलिस हिरासत में एक गद्दे से बंधे होने के कारण जिंदा जल गया। सबूत तीसरे व्यक्ति की संलिप्तता की ओर इशारा करते थे, लेकिन मामला अनसुलझा रहा। 2016 में, डेसाउ की वास्तुकला यूनिवर्सिटी में पढ़ रही चीनी छात्रा ली यांगजी की डिग्री पूरी होने से कुछ दिन पहले निर्मम हत्या कर दी गई। 2018 में, एक पुलिस अधिकारी के बेटे सेबास्टियान एफ. को इस हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा मिली।

2025 में, धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ (AfD) देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है और पूर्वी जर्मनी में अग्रणी है। जुलाई 2024 में, डेसाउ-रॉस्लाउ का मेयर एक कट्टरपंथी AfD नेता लॉरेंस नोथडुर्फ्ट चुना गया, जिसे अन्य पार्टियों का भी समर्थन प्राप्त हुआ। 8 मई 2025 को, नाजी शासन के अंत और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर, नोथडुर्फ्ट ने एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने न जर्मन युद्ध अपराधों का उल्लेख किया, न ही होलोकॉस्ट की बात की।

1990 के दशक में नोथडुर्फ्ट एक धुर दक्षिणपंथी युवा संगठन ‘हाइमाटट्रोए डॉयच युगेन्ड’ के नेता थे, जिसे 2009 में नाजी विचारधारा से समानता के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। तकनीकी रूप से, नाजी विचारधारा से जुड़े लोग AfD की सदस्यता नहीं ले सकते, लेकिन सैक्सनी-अनहाल्ट में 2025 के चुनाव में AfD को 37% वोट मिले, जो सबसे अधिक है। पार्टी अब 2026 के प्रांतीय चुनावों में पूर्ण बहुमत की उम्मीद कर रही है।

डेसाउ के नागरिक समूह ‘बुंटस रॉस्लाउ’ (रंग-बिरंगा रॉस्लाउ) के सदस्य मार्कुस गैगर और उनकी पत्नी मैंडी म्युक ने बताया कि कट्टरपंथ अब समाज में सामान्य और स्वीकार्य हो रहा है। मैंडी कहती हैं, “हमें सड़कों पर गालियाँ दी जाती हैं, ‘लेफ्टिस्ट गंद’ कहकर बुलाया जाता है। हमारे घर की खिड़की पर बीयर की बोतल फेंकी गई और बगीचे के गेट पर कीलें डाली गईं। पड़ोसी भी हमसे दूरी बनाते हैं।” सबसे चिंताजनक बात यह है कि हमलावरों की उम्र लगातार कम हो रही है।

‘प्रोजेक्ट गेगेनपार्ट’, ‘बुंटस रॉस्लाउ’, ईसाई स्काउट समूह, शिक्षक, स्थानीय संगठन, सिविक ग्रुप, यूनिवर्सिटी, स्कूल और कुछ रूढ़िवादी राजनेता भी अब इस नफरत और भेदभाव के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। युवा भी इस लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, हालाँकि वे मानते हैं कि दक्षिणपंथी विचार युवाओं में तेजी से फैल रहे हैं। ‘अल्टरनेटिव यूथ सेंटर’ की सोफी ने बताया, “मैंने बच्चों को कहते सुना कि एक क्लास में केवल ‘शुद्ध जर्मन खून’ वाले बच्चे होने चाहिए।” उनके दोस्त मैक्स ने कहा कि वे केवल अपने घर के आसपास ही रहते हैं, क्योंकि डेसाउ में त्योहारों पर शराब के नशे में हिंसा का डर रहता है।

शहर की नगर परिषद के प्रतिनिधि पॉल नोल्टे ने बताया, “मुझे और मेरे दोस्त टिम को चाकू से धमकाया गया।” फिर भी, वे आशावादी हैं और कहते हैं, “डेसाउ में हर व्यक्ति मायने रखता है, यहाँ सुधार संभव है।”

जर्मनी में नव-नाजीवादी पार्टियों और संगठनों का उभार एक खतरनाक भविष्य की ओर इशारा करता है। यह समस्या केवल ज-dot: जर्मनी तक सीमित नहीं है, बल्कि फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देशों में भी दक्षिणपंथी नाजीवादी विचारधारा का खतरा बढ़ रहा है, जो द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के भयावह दिनों की याद दिलाता है।

(स्वदेश कुमार सिन्हा लेखक और टिप्पणीकार हैं)

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