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Thursday, August 5, 2021

अमेरिकी प्रतिबंधों से अडानी का म्यांमार प्रोजेक्ट संकट में

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अमेरिका, चीन और म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बीच म्यांमार में गौतम अडानी का कन्टेनर पोर्ट डेवलपमेंट का करार फंस गया है। अडानी ने म्यांमार में जिस कम्पनी के पोर्ट डेवलपमेंट का कांट्रेक्ट किया है, उस कम्पनी के मालिक पर संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है। म्यांमार की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नागरिक सरकार के खिलाफ सैन्य तख्तापलट के बाद अमेरिका ने म्यांमार सेना द्वारा प्रशासित की जाने वाली कंपनियों के कामकाज पर प्रतिबंध लगा दिया है।

अडानी का कन्टेनर पोर्ट डेवलपमेंट का करार भी ऐसी ही कम्पनी के साथ था जिसके मालिकों में राज्य प्रशासन परिषद के सदस्य के रूप में नियुक्त चार पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं। म्यांमार में विकसित किये जाने वाला यह ऑस्ट्रेलिया के बाद अडानी का दूसरा अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह था।

फिलवक्त प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बिडेन के बीच उस तरह रिश्ते नहीं विकसित हो पाये हैं जैसा ओबामा और ट्रंप के साथ था। इसके पीछे अमेरिका की जमीन पर जाकर ‘अब की बार ट्रम्प सरकार’ का अभियान जिम्मेदार माना जा रहा है।

अडानी ने म्यांमार में जिस कम्पनी के पोर्ट डेवलपमेंट का कांट्रेक्ट किया है उस कम्पनी के मालिक पर संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है। दरअसल म्यांमार की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नागरिक सरकार के खिलाफ सैन्य तख्तापलट हो गया है और इसी कड़ी में संयुक्त राज्य अमेरिका ने बर्मी सेना द्वारा प्रशासित की जाने वाली कंपनियों के कामकाज पर प्रतिबंध लगा दिया है। म्यांमार के सैन्य विद्रोह के पीछे चीन की सेना को शह देना माना जा रहा है।

आर्थिक स्तम्भकार गिरीश मालवीय का कहना है कि अप्रैल -मई 2019 में जब भारत में आम चुनाव हो रहे थे तब अडानी समूह को बड़े बड़े सौदे दिलाए जा रहे थे श्रीलंका में पोर्ट डेवलपमेंट का ठेका भी उसी दौरान दिया गया और उसी समय अडानी ग्रुप ने म्यांमार सशस्त्र बलों द्वारा नियंत्रित एक होल्डिंग कंपनी से पोर्ट डेवलपमेंट का वाणिज्यिक समझौता भी किया।

दरअसल अडानी उन्हीं कपनियों से समझौते कर रहे हैं जिनके खिलाफ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने 2018 में प्रकाशित पूर्ण रिपोर्ट ने सिफारिश की थीं कि किसी भी व्यवसाय को म्यांमार के सुरक्षा बलों या उनके द्वारा नियंत्रित किसी भी उद्यम के साथ आर्थिक संबंधों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। चीन की सुरक्षा बलों से मिलीभगत है और म्यांमार में दमन और हिंसा में चीन की संलिप्तता के भी आरोप हैं।

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा है कि हम म्यांमार की स्थिति को ध्यान से देख रहे हैं और संबंधित अधिकारियों और हितधारकों के साथ मिलकर इस परियोजना को भविष्य में कैसे प्रबंधित करें, यह तय करने से पहले उनकी सलाह लेंगे। मई 2019 में, अडानी समूह ने कहा कि यह 50 मिलियन डॉलर के सौदे पर म्यांमार की यांगून नदी के साथ एक नया कंटेनर टर्मिनल बनाने और चलाने के लिए $ 290 मिलियन का निवेश करेगा, क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया में एबॉट पॉइंट टर्मिनल के बाद इसका दूसरा विदेशी उद्यम है।

म्यांमार की क्रूर सेना के साथ अपने संबंधों के लिए अडानी समूह लगातार जांच के घेरे में आता जा रहा है। म्यांमार के सैन्य संगठनों पर वर्ष 2017 में रोहिंग्या लोगों की हत्याओं, यातनाओं, फैलाव और बलात्कारों के आरोप संयुक्त राष्ट्र की जांच और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का विषय बनते रहे हैं।

म्यांमार की सेना से अडानी समूह के लिंक जग जाहिर हैं। वर्ष 2019 में भारत में अडानी के बंदरगाहों में से एक का दौरा म्यांमार के कमांडर इन चीफ एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी द्वारा किया गया था जबकि उस अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। म्यांमार के लिए एक संयुक्त राष्ट्र मिशन ने पाया था कि अडानी समूह म्यांमार सेना द्वारा किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों का भागीदार है। ऑस्ट्रेलिया ने भी अडानी के यांगून बंदरगाह विकास की मूल कंपनी में निवेश किया है।

गौरतलब है कि म्यांमार में हुए तख्तापलट के तार चीन से जुड़ते हुए नजर आ रहे हैं। म्यांमार की सेना ने स्टेट काउंसलर आंग सान सू की समेत उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर तख्तापलट कर दिया और देश में एक साल के लिए आपातकाल लागू कर दिया है।आरोप है कि म्यांमार में हुए इस पूरे घटनाक्रम की साजिश चीन ने रची थी। दरअसल, पिछल महीने ही चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी ने म्यांमार सेना के कमांडर इन चीफ मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की थी। इसके बाद जब म्यांमार में तख्तापलट हुआ है, तो चीनी प्रतिक्रिया भी काफी ठंडी दिखाई दी है। ऐसे में चीन की भूमिका सवालों के घेरे में है।

दरअसल, चीन, म्यांमार का महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार है और उसने यहां खनन, आधारभूत संरचना और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश किया है। चीन ने म्यांमार में काफी निवेश किया है।इसलिए म्यांमार में चाहे चुनी हुयी लोकप्रिय सरकार हो या सेना के हाथ सत्ता हो चीन सब पर पकड़ बनाये रखना चाहेगा।म्यांमार की सेना तात्मदाव और चीन खास तौर पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के घनिष्ठ संबंध रहे हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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