Thu. Oct 24th, 2019

जस्टिस कुरैशी को मप्र की जगह त्रिपुरा का सीजे बनाने का प्रस्ताव अभी भी लटका

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जस्टिस अकील कुरैशी।

क्या आप जानते हैं कि उच्चतम न्यायालय में 34 न्यायाधीश हैं, जिसमें एक न्यायाधीश मुस्लिम है। जबकि पूरे देश के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 601 पदों के सापेक्ष मात्र 25 स्थायी और छह अपर न्यायाधीश मुस्लिम हैं। इस प्रकार उच्चतम न्यायालय में कुल न्यायाधीशों के पदों के सापेक्ष 5 फीसद से कम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों में लगभग 5 फीसद मुस्लिम हैं, जबकि देश में मुस्लिमों की आबादी 15 से 18 फीसद बतायी जाती है।

देश के कई उच्च न्यायालय ऐसे हैं जहां एक भी मुस्लिम न्यायाधीश नहीं है। वैसे भी क्या फर्क पड़ता है। राजनितिक क्षेत्रों को कौन कहे विधिक क्षेत्रों में भी माना जा रहा है की सत्तारूढ़ पार्टी कभी भी इस असंतुलन को दूर करने में रूचि नहीं लेगी, क्योंकि इसमें उसके राजनीतिक निहितार्थ छिपे हुए हैं। फिर यह तो सर्वविदित है ही कि वर्ष 2010 में जस्टिस कुरैशी ने वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था।

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फिलवक्त जस्टिस अकील कुरैशी का मामला गरमाया हुआ है। केंद्र सरकार ने छह उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्तियों को अधिसूचित किया है, लेकिन जस्टिस अकील कुरैशी का नाम उसमें नहीं है। जस्टिस अकील कुरैशी का नाम उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने त्रिपुरा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाना प्रस्तावित किया है।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में चीफ जस्टिस के रूप में  नियुक्त होने वाले न्यायाधीश अकील कुरैशी को उच्चतम न्यायालय  के कॉलेजियम ने त्रिपुरा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाना प्रस्तावित किया है। इस नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने कॉलजियम से निवेदन किया था कि वह अपने निर्णय पर पुन: विचार करे। इसके बाद कॉलेजियम ने कुरैशी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जगह त्रिपुरा के उच्च न्यायालय का चीफ जस्टिस बनाने का प्रस्ताव दिया।

जस्टिस कुरैशी नियुक्ति के संबंध में 28 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि कानून मंत्रालय को कॉलेजियम की सिफारिशें मिली हैं। गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन की तरफ से जस्टिस कुरैशी के मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिसमें कॉलेजियम की तरफ से उनकी पदोन्नति को लेकर 10 मई की सिफारिशों को केंद्र सरकार के नहीं मानने को चुनौती दी गयी थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि कॉलेजियम द्वारा कुरैशी पर दी गई सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार ने 18 जजों की अन्य हाईकोर्ट में नियुक्ति की है। वहीं जस्टिस कुरैशी के मामले को लटका कर रखा जा रहा है।

इस याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार जस्टिस कुरैशी नियुक्ति को लटका रही है। वहीं केंद्र सरकार ने 7 जून को एक नोटिफिकेशन निकालकर जस्टिस रविशंकर झा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया। 10 मई को कॉलेजियम ने मध्यप्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस कुरैशी की नियुक्ति के रूप में सिफारिश की थी।

इस प्रकरण में 16 अगस्त को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि हम एक सप्ताह में कॉलेजियम की सिफारिश को लेकर कोई फैसला करेंगे। इससे पहले 2 अगस्त को इस मामले में हुई सुनवाई में महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कोर्ट में जानकारी दी कि कॉलेजियम द्वारा सिफारिशों पर विचार करेंगे। जस्टिस कुरैशी 2018 में बांबे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जाने से पहले गुजरात हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे थे। उन्हें 2004 में गुजरात हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार की इसी वर्ष में हस्तक्षेप की यह दूसरी घटना है। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ को आंध्र प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया गया था। लेकिन केंद्र सरकार ने अड़ंगा लगाते हुए कॉलेजियम को अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा था। इसके बाद कॉलेजियम ने उन्हें गुजरात हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया था। इससे एक बात तो पूरी तरह स्पष्ट है की सरकार की चाहत कॉलेजियम पर भारी पड़ रही है।

इस बीच केंद्र सरकार ने एमपी, एपी, केरल, राजस्थान, गुवाहाटी, एचपी और सिक्किम के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। जस्टिस अजय लांबा (इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश) गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अरुप के गोस्वामी (गुवाहाटी हाईकोर्ट के न्यायाधीश) सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रूप में। न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश) आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में।

न्यायमूर्ति एल नारायण स्वामी (कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश) हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति एस मणिकुमार (मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश) केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में। जस्टिस इंद्रजीत मोहंती (बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश) राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में। पंजाब एवं हरियाणा,राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, केरल के उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस रवींद्र भट, जस्टिस रामसुब्रमण्यन और जस्टिस हृषिकेश रॉय को पिछले महीने उच्चतम न्यायालय में नियुक्त किया गया था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह कानूनी मामलों के भी जानकार हैं।)

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