धनबाद जज मौत मामले में सीबीआई की 20 सदस्यीय टीम ने शुरू की जांच

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धनबाद के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत की सीबीआई जांच शुरू हो गयी है। इस कथित हत्याकांड में गिरफ्तार ऑटो चालक लखन वर्मा तथा उसका सहयोगी राहुल वर्मा को सीबीआई जल्द रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। झारखंड सरकार की अनुशंसा और हाईकोर्ट के निर्देश पर जज उत्तम आनंद मौत मामले की 05 जुलाई से सीबीआई ने विधिवत जांच शुरू कर दी।

बता दें कि सीबीआई के एएसपी विजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में बनी 20 सदस्यीय टीम 04 जुलाई की देर रात ही धनबाद पहुंच गयी थी और टीम ने 05 जुलाई को सर्किट हाउस में एसआईटी के अधिकारियों के साथ बैठक की।

धनबाद थाना में केस से संबंधित कागजात व सबूतों की जांच, शहर में लगे सीसीटीवी व पाथरडीह क्षेत्र में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई।

टीम 05 जुलाई को दोपहर 12 बजे के करीब सर्किट हाउस पहुंची। एसआईटी टीम में शामिल बोकारो रेंज के डीआइजी कन्हैया मयूर पटेल, एसएसपी संजीव कुमार, सिटी एसपी आर रामकुमार, एएसपी मनोज स्वर्गीयारी वहां पहले से मौजूद थे। धनबाद थानेदार व कांड के आईओ इंस्पेक्टर विनय कुमार को बुलाया गया। उनसे पूछा गया कि घटना की जानकारी बड़े अधिकारियों को देर से क्यों दी गयी ? इसको ले उनको फटकार लगायी गयी।

घटना की जानकारी मिलने के बाद क्या-क्या कार्रवाई की गयी यह भी जानकारी सीबीआई टीम ने ली। शाम को सीबीआई एएसपी विजय शुक्ला स्वयं धनबाद थाना पहुंचे व केस से संबंधित जानकारी ली। सारे कागजातों की जांच की गयी।

टीम ने आरोपियों से जब्त मोबाइल को अपने पास ले कर उसकी जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा एसआईटी की ओर से अब तक के अनुसंधान पर तैयार केस डायरी भी कब्जे में लिया है। इस संबंध में धनबाद थाना में ही एक जेरोक्स मशीन मंगायी गयी। तकरीबन एक हजार पेज की केस डायरी की जेरोक्स कॉपी टीम ने निकाली। फोरेंसिक टीम व फिंगर प्रिंट टीम ने भी जांच की आरोपियों के कपड़े, जूते का मिलान करवाया।

मुख्य आरोपी ऑटो चालक लखन वर्मा व राहुल वर्मा को सीबीआई भी जल्द रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। सूत्रों के अनुसार आरोपियों की ब्रेन मैपिंग व नार्को टेस्ट भी सीबीआई करा सकती है। हालांकि अभी तक एसआईटी की टीम प्रथम दृष्ट्या में इसे दुर्घटना मान कर ही चल रही थी। आरोपियों से पूछताछ होने के बाद ही इस मामलें में आगे की रणनीति तय हो सकती है।

जज उत्तम आनंद की मौत के बाद बनी एसआईटी यह खुलासा नहीं कर पायी कि घटना हत्या है या हादसा। नतीजतन झारखंड सरकार की अनुशंसा और हाइकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। हालांकि सीबीआई के लिए भी इस मामले का खुलासा आसान नहीं है। एसआईटी द्वारा की गयी अभी तक की जांच में कुछ भी साफ नहीं हो पा रहा है। एसआईटी की टीम ने लगभग 250 लोगों से पूछताछ की है, लेकिन कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

बता दें कि 05 जुलाई को सीबीआई ने एसडीजेएम सह सीबीआई के विशेष न्यायालय शिखा अग्रवाल की अदालत में प्राथमिकी की एक कॉपी सौंपी। राज्य सरकार की अनुशंसा और झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई की दिल्ली स्पेशल क्राइम यूनिट-1 ने नए सिरे से एफआईआर दर्ज की है।

उल्लेखनीय है कि धनबाद के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 04 जुलाई को पुलिस को फटकार लगाते हुए उस पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा है कि जांच में देरी या किसी तरह की चूक से मामले की सुनवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद न्यायाधीश उत्तर आनंद की कथित हत्या की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस सही तरीके से सवाल नहीं पूछ रही है और एक विशेष जवाब के लिए सवाल पूछे जा रहे हैं, जिसकी सराहना नहीं की जा सकती।

मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही अदालत ने कहा कि अटॉप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि मौत सिर पर गहरी चोट लगने की वजह से हुई है।

अदालत ने पूछा फिर ऐसे में पुलिस इस तरह के सवाल क्यों पूछ रही है कि क्या इस तरह की चोट गिरने की वजह से संभव है ?

चीफ जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण की पीठ ने कहा, ‘हमने धनबाद एसएनएमएमसी के सहायक प्रोफेसर डॉ. कुमार शुभेंदु के लिए जांच अधिकारी विनय कुमार द्वारा तैयार किए गए सवालों का अध्ययन किया है, जिसमें कहा गया है कि कृपया बताएं क्या सड़क पर गिरने से सिर पर इस तरह की चोट संभव है या नहीं ? जब जांच एजेंसी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए घटना की जांच कर रही है, तो जांच अधिकारी द्वारा संबंधित डॉक्टर से इस तरह के सवाल किन और कैसी परिस्थितियों में पूछे जा रहे हैं ? वह भी तब जब सीसीटीवी वीडियो से घटना का पूरे दृश्य स्पष्ट हो गया है।’

अदालत ने कहा, ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट पता चलता है कि सख्त चीज से टकराकर यह चोट लगी है। अब जांच एजेंसी को आपराधिक हथियार की तलाश करनी है। एक विशेष जवाब की चाह में डॉक्टर से सवाल पूछने को सराहा नहीं जाएगा।’ अदालत ने कहा कि उन्हें अभी तक पुलिस से इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि एएसजे उत्तम आनंद (50), 28 जुलाई को सुबह की सैर के लिए निकले थे कि एक खाली सड़क पर एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गहरी चोट लगने और मस्तिष्क की प्रोटेक्शन लेयर में फ्रैक्चर और खून के थक्के जमने का पता चला है।

पुलिस ने इस मामले में शुरुआत में दो लोगों को गिरफ्तार किया था और घटना में शामिल ऑटो रिक्शा को जब्त कर लिया था। बाद में पता चला कि यह ऑटोरिक्शा चोरी किया हुआ था।

अदालत ने कहा, ‘इस साजिश का पता लगाने और घटना के मास्टरमाइंड को पकड़ना जरूरी है, सिर्फ मोहरे को गिरफ्तार कर लेने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इस जांच में समय महत्वपूर्ण हैं। जांच में देरी या किसी तरह की चूक से मामले की सुनवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।’

अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘घटना का सीसीटीवी वीडियो घटना के दो से चार घंटे के भीतर ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। जज आनंद को 28 जुलाई को तड़के 5.30 बजे अस्पताल ले जाया गया लेकिन मृतक जज की पत्नी की शिकायत के बाद एफआईआर दोपहर 12.45 पर दर्ज हुई। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज की नियमित तौर पर निगरानी करनी चाहिए। अस्पताल के डॉक्टरों को भी पुलिस को सूचित करना चाहिए था।’

उल्लेखनीय है कि धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश-8 उत्तम आनंद 28 जुलाई की सुबह सैर पर निकले थे। रणधीर वर्मा चौक के पास सड़क पर एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

पहले इस घटना को हिट एंड रन केस माना जा रहा था, लेकिन घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पता चला कि ऑटो रिक्शा चालक ने कथित तौर पर जान-बूझकर जज को टक्कर मारी थी।

पुलिस ने बताया था कि ऑटो चालक लखन कुमार वर्मा धनबाद के सोनार पट्टी का रहने वाला है, जबकि दूसरा आरोपित राहुल वर्मा भी स्थानीय निवासी है। लखन कुमार वर्मा ने स्वीकार किया है कि घटना के वक्त ऑटो वही चला रहा था। उसकी गिरफ्तारी गिरिडीह से हुई, जबकि दूसरे आरोपित राहुल वर्मा की गिरफ्तारी धनबाद स्टेशन से हुई।

दोनों को घटना के अगले दिन बीते 29 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इस बीच 31 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा कर दी, जिसका दिवंगत न्यायाधीश के परिजनों ने स्वागत किया।

मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करने का यह फैसला चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ द्वारा घटना का स्वत: संज्ञान लेने और झारखंड के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश देने के एक दिन बाद लिया गया।

सीबीआई ने इससे पहले किन-किन मामलों में की है जांच

सुशांतो सेनगुप्ता हत्याकांड

05 अक्टूबर, 2002 को निरसा विधायक अपर्णा सेनगुप्ता के पति सुशांतो सेनगुप्ता, उसके भाई संजय सेनगुप्ता और ड्राइवर डीडी पाल की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। इस मामले की जांच लखनऊ सीबीआई ने की थी। मामले में हलधर महतो, ठाकुर बनर्जी और प्रशांतो बनर्जी को आरोपी बनाया गया था।

कोयला व्यवसायी प्रमोद सिंह हत्याकांड

वर्ष 2003 में कोयला व्यवसायी प्रमोद सिंह हत्याकांड की जांच दिल्ली सीबीआई ने की थी। धनसार में कोल कारोबारी प्रमोद सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां चलायी गयी थी। सीबीआई जांच के बाद जब इसमें कोल व्यवसायी दिवंगत सुरेश सिंह का नाम आया था, तो दिल्ली सीबीआई की टीम ने उन्हें अपने साथ ले गयी। अभी यह मामला धनबाद में सीबीआई के विशेष न्यायालय के अंतिम दौर में है।

माले विधायक महेंद्र सिंह हत्याकांड

16 जनवरी, 2005 को भाकपा माले विधायक महेंद्र सिंह की हत्या की जांच लखनऊ सीबीआई की क्राइम ब्रांच ने की थी। वह बगोदर से सभा कर वापस लौट रहे थे। एक गांव के समीप दो युवक बाइक से आये और गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। करीब पांच साल तक अनुसंधान के बाद लखनऊ सीबीआई की स्पेशल क्राइम डिवीजन ने धनबाद विशेष न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसमें हार्डकोर नक्सली साकीम उर्फ रमेश मंडल उर्फ उदय और रामचंद्र महतो उर्फ प्रमोद महतो को मुख्य आरोपी बनाया था।

(झारखण्ड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट)

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