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सीबीआई-ईडी को अब तक नहीं मिले चिदंबरम और कार्ति के खिलाफ कोई सुबूत

संविधान और रूल ऑफ़ लॉ में किसी को चाहे जिस कथित अपराध में गिरफ्तार कर लिया जाए या उसके खिलाफ घपले-घोटाले का आरोप लगा कर न केवल कटघरे में खड़ा कर दिया जाए। आरोपों की आड़ में उसकी सर्वजनिक छवि को धूल-धूसरित करने का षड्यंत्र रचा जाए, पर जब तक अदालत से बिना संदेह के साक्ष्य प्रस्तुत करके दोषी न ठहराया जाए तब तक उसे गुनाहगार नहीं कहा जा सकता। कुछ ऐसा ही पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ हो रहा है। क्या राजनीतिक परिशोध से उत्पीड़न किया जा रहा है? यह सवाल विधिक और न्यायिक क्षेत्रों में पूछा जा रहा है।

सीबीआई ने बृहस्पतिवार को बांबे हाईकोर्ट से कहा कि पूर्व वित्त मंत्री और दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ 63 मून्स टेक्नोलॉजीज कंपनी के आरोपों को साबित करने के लिए उसे कोई सुबूत नहीं मिले हैं। जस्टिस साधना जाधव और जस्टिस एनजे जामदार की खंडपीठ जिग्नेश शाह की कंपनी 63 मून्स (पुराना नाम फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

इसी तरह अभी पिछली 4 अगस्त 2020 को दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस मामले में जारी अपनी जांच के सिलसिले में ब्रिटेन और सिंगापुर को भेजे अनुरोध पत्र पर जवाबी रिपोर्ट हासिल करने के लिए मंगलवार को तीन महीने का वक्त दिया। अभी तक एयरसेल-मैक्सिस मामले में बिना सुबूत के केवल आरोपों के आधार पर चिदंबरम जेल में भी रहे हैं और जमानत पर बाहर हैं।

इसी तरह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अभी तक  कार्ति चिदंबरम के दिल्ली के जोरबाग स्थित बंगले को आईएनएक्स मीडिया से अर्जित आय से खरीदे जाने का कोई पुख्ता सुबूत नहीं जुटा पाई है और स्पष्ट निर्देश के बावजूद पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष जवाब दाखिल नहीं कर सकी है।

बांबे हाईकोर्ट की पीठ के सामने सीबीआई के वकील हितेन वेनगावकर ने एजेंसी की तरफ से एक शपथपत्र दाखिल किया। इसमें कंपनी की तरफ से दाखिल की गई शिकायत वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के चीफ विजिलेंस ऑफिसर को भेज दी गई है। 63 मून्स के वकील ने इस मामले को हाई प्रोफाइल साजिश बताते हुए जांच कराए जाने की गुहार लगाई।

कंपनी की तरफ से 15 फरवरी, 2019 को सीबीआई के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया कि नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लि. (एनसईएल) का अरबों रुपये का पेमेंट डिफॉल्ट घोटाला सामने आने पर चिदंबरम और अन्य दोनों अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर कंपनी को नुकसान पहुंचाया था। कोर्ट ने इस मामले में तीन महीने बाद की तारीख तय की है।

इसके पहले सीबीआई ने मुंबई उच्च न्यायालय के जस्टिस एसएस जाधव और जस्टिस एनजे जामदार की पीठ को सूचित किया था कि वह पूर्व वित्त मंत्री तथा दो अन्य नौकरशाहों के खिलाफ पद के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली 63 मून्स टेक्नोलॉजीज की शिकायत पर शुरुआती जांच कर रही है। सीबीआई के वकील हितेन वेणेगावकर ने पीठ को बताया था कि यह मामला 20 दिसंबर 2013 का है, इसलिए एजेंसी को प्रांसगिक दस्तावेज बरामद करने में समय लगेगा।

अदालत कंपनी के प्रवर्तक जिग्नेश शाह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम तथा नौकरशाह केपी कृष्णन एवं रमेश अभिषेक के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा कार्रवाई करने में देरी पर सवाल उठाया गया है।

कंपनी का पहले नाम फाइनेंशल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड था। जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे तो अभिषेक बाजार आयोग के अध्यक्ष थे, जबकि कृष्णन अतिरिक्त सचिव एवं संयुक्त सचिव थे। वेणेगावकर ने कहा कि हम (सीबीआई) शुरुआती जांच कर रहे हैं। मामला 2012-13 का होने की वजह से हमें अपना दिमाग लगाना है, आरोपों को सत्यापित करना है तथा सभी प्रासंगिक दस्तावेज बरामद करने हैं। शिकायतकर्ता (63 मून्स टेक्नोलॉजीज) को सीबीआई ने बयान दर्ज कराने और आरोपों के समर्थन में और सुबूत देने के लिए समन किया था। वकील ने कहा था कि इस समय तक  सीबीआई को याची कंपनी से और सबूत या दस्तावेज नहीं मिले हैं।

कंपनी की ओर से पेश हुए वकील ए पोंडा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा था कि सभी प्रासंगिक दस्तावेज पहले ही सीबीआई को दिए जा चुके हैं। पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह जांच का विवरण देने के लिए एक हलफनामा दायर करे और मामले को 13 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया था। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड में कई करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद 15 फरवरी 2019 को मून्स टेक्नोलॉजी ने सीबीआई को शिकायत देकर कंपनी को नुकसान पहुंचाने और पद के दुरुपयोग के आरोप में तीनों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आग्रह किया था।

दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस मामले में जारी अपनी जांच के सिलसिले में ब्रिटेन और सिंगापुर को भेजे अनुरोध पत्र पर जवाबी रिपोर्ट हासिल करने के लिए मंगलवार को तीन महीने का वक्त दिया। विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई में दोनों एजेंसियों द्वारा किए गए अनुरोध को मंजूरी दे दी। इससे पहले, उनका प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने अदालत से कहा कि अनुरोध पत्र भेजा गया है, लेकिन जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

अदालत ने मामले की सुनवाई तीन नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत अब इस विषय पर संज्ञान लेने के चरण में पहुंच गई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल संजय जैन ने सीबीआई और ईडी की ओर से पेश होते हुए दलील दी कि अनुरोध पत्रों पर रिपोर्ट का अभी इंतजार है तथा ब्रिटेन और सिंगापुर में सक्षम प्राधिकारों को अनुरोध पत्र पर रिपोर्ट भेजने में तेजी लाने के लिए स्मरण पत्र भेजा गया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एक साल से अधिक समय में कार्ति चिदंबरम के दिल्ली के जोरबाग स्थित बंगले को आईएनएक्स मीडिया से अर्जित आय से खरीदे जाने का कोई पुख्ता सबूत नहीं जुटा पायी है और स्पष्ट निर्देश के बावजूद पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष जवाब दाखिल नहीं कर सकी है। इससे इस आरोप को बल मिल रहा है कि चिदंबरम परिवार पर राजनीतिक प्रतिशोध के तहत निशाने पर लिया गया है।

पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण ने चिदंबरम के जोर बाग के घर को खाली करने के ईडी के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिए हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि ऐसा कोई सुबूत नहीं दिया गया है, जिससे पता चलता हो कि कार्ति चिदंबरम के सह-स्वामित्व वाले जोर बाग हाउस को अपराध से अर्जित आय से खरीदा गया था। इस टिप्पणी को पी चिदंबरम और उनके परिवार के लिए अंतरिम राहत माना जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक अगस्त 2018 को कार्ति को नोटिस जारी कर 10 दिनों में जोरबाग घर को खाली करने को कहा था। 115-ए, ब्लॉक 172, जोर बाग के घर को  ईडी द्वारा 10 अक्टूबर, 2018 को कुर्क  किया गया था, और  दावा किया गया था कि आईएनएक्स मीडिया मामले में ‘अपराध की आय’ से इसे हासिल किया गया था। कुर्की  आदेश की पुष्टि पीएमएलए द्वारा प्राधिकृत अधिकारी ने इसी मार्च में की थी।

पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष  सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने ईडी को चिदंबरम की इस  संपत्ति पर “यथास्थिति” बनाए रखने का निर्देश दिया है। 3 सितंबर 2019 को पारित  अपने आदेश में अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि ऐसा कोई सुबूत नहीं है जिससे प्रदर्शित होता  हो कि उक्त संपत्ति अपराध की आय से अर्जित की गई थी। ऐसा भी  कोई सबूत नहीं है कि अपीलकर्ता (कार्ति चिदंबरम) द्वारा पीएमएलए कार्रवाई को विफल करने के लिए संपत्ति को बेचने की संभावना है।

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा है कि ईडी ने पांच महीने तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया जबकि  न्यायाधिकरण ने 23 अप्रैल को निर्देश दिया था कि  कार्ति के आवेदन पर छह सप्ताह के भीतर ईडी जवाब दाखिल करे।

गौरतलब है कि ईडी ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के दिल्ली के जोरबाग स्थित बंगले को 10 अक्टूबर, 2018 को कुर्क  किया था। ईडी ने दावा किया था कि आईएनएक्स मीडिया घोटाले में मिले पैसों से उन्होंने बेटे कार्ति चिदंबरम के साथ मिलकर देश और विदेशों में कई संपत्तियां खरीदी थीं। ईडी ने पी चिदंबरम को इस केस में बेटे के साथ सह आरोपी बनाया था।

ईडी ने नई दिल्ली के जोरबाग स्थित जिस बंगले को कुर्क किया था, उसकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपये है। ईडी ने कार्ति की चेन्नई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक की नुंगाबक्कम शाखा में एक फिक्सड डिपॉजिट खाते को भी सील कर दिया था। इस खाते में 9.23 करोड़ रुपये हैं। वहीं इसके अलावा डीसीबी बैंक में कार्ति की कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के 90 लाख रुपये की एफडी को भी अटैच किया था।

ईडी ने दावा किया था  कि पीटर मुखर्जी ने एएससीपीएल को 3.09 करोड़ रुपये का भुगतान गलत तरीकों से जारी किए गए डेबिट नोट के जरिए किया था।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार है। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on August 15, 2020 12:13 pm

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