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Friday, September 24, 2021

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कांग्रेस का किसानों के चक्का जाम का समर्थन, मोर्चे ने जारी किया कार्यक्रम के लिए दिशा निर्देश

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने किसान संगठनों द्वारा कल आयोजित होने राष्ट्रव्यापी चक्का जाम का समर्थन किया है। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच आयोजित होगा। पार्टी ने कहा है कि वह शनिवार को राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर तीन घंटे के घोषित देशव्यापी अहिंसक और शांतिपूर्ण चक्का जाम का समर्थन करेगी। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता किसानों के साथ अपनी प्रतिबद्धता और एकजुटता निभाते हुए इस सांकेतिक और गांधीवादी बंद में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना पूरा सहयोग व समर्थन देंगे।

किसान संगठन पहले ही इमरजेंसी और आवश्यक सेवाओं को इस बंद से अलग कर चुके हैं, उसी भावना के अंतर्गत कांग्रेस कार्यकर्ता एंबुलेंस, स्कूल बस, वृद्धों, रोगियों और महिलाओं व् बच्चों को इस सांकेतिक बंद से कोई असुविधा ना हो, इसका भी पूरा ध्यान रखेंगे।

उन्होंने कहा कि किसान पिछले 73 दिन से तीन कृषि कानूनों के विरोध में एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर शांतिपूर्ण और गांधीवादी ढंग से विरोध में धरने पर बैठे हैं।

यह आंदोलन किसानों की खेती बचाने के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बचाने का भी आंदोलन है, जिसमें पूरे देश का गरीब, खेत मजदूर, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग मजबूती से खडा है। सत्ता के अहंकार में चूर मोदी सरकार इस आंदोलन को बदनाम करने और आंदोलनकारियों को थकाने के लिए नित रोज नए हथकंडे अपना रही है।

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री ने सदन में आज अपने वक्तव्य में भी संसद को गुमराह करने और देश को भटकाने की एक नयी कोशिश की। सार्वजनिक तथ्य है कि किसान संगठन सरकार से 11 दौर की बैठकें कर चुके हैं, जिसमें किसानों ने तीन कृषि कानूनों में विभिन्न खामियों का बिंदुवार ब्यौरा दिया है, जिसके बाद केन्द्र सरकार तीन कानूनों में 18 संशोधन करने की बात स्वीकार कर चुकी है। ऐसे में कृषि मंत्री का संसद में दिया गया वक्तव्य बेहद आपत्तिजनक और तथ्यों से परे है।

वेणुगोपाल ने कहा कि बहुमत के घमंड में और अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए इन कृषि कानूनों को लागू करने से पहले केन्द्र सरकार ने ना तो विपक्षी दलों की सलाह ली, ना ही किसान संगठनों से कोई चर्चा की। कोरोना के मुश्किल समय में चोरी-छुपे इन कानूनों को किसानों पर थोप दिया, जिसका देश के सभी किसान संगठन विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी, किसान आंदोलन का पूर्ण रुप से समर्थन करती रही है। कांग्रेस पार्टी, केन्द्र सरकार से एक बार फिर अनुरोध करती है कि वह अहंकार को त्यागे और किसानों की जायज मांगों को मानते हुए तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा करे।

किसान मोर्चा ने जारी किया चक्का जाम को लेकर दिशा निर्देश-

देश भर में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक जाम किया जाएगा।

इमरजेंसी और आवश्यक सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, स्कूल बस आदि को नहीं रोका जाएगा।

चक्का जाम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अहिंसक रहेगा। प्रदर्शनकारियों को निर्देश दिए जाते हैं कि वे इस कार्यक्रम के दौरान किसी भी अधिकारी, कर्मचारियों या आम नागरिकों के साथ किसी भी टकराव में शामिल न हों।

दिल्ली NCR में कोई चक्का जाम प्रोग्राम नहीं होगा क्योंकि सभी विरोध स्थल पहले से ही चक्का जाम मोड में हैं। दिल्ली में प्रवेश करने के लिए सभी सड़कें खुली रहेंगी, सिवाय उनके, जहां पहले से ही किसानों के पक्के मोर्चे लगे हुए हैं।

3 बजे 1 मिनट तक हॉर्न बजाकर, किसानों की एकता का संकेत देते हुए, चक्का जाम कार्यक्रम संपन्न होगा। हम जनता से भी अपील करते हैं कि वे अन्न दाता के साथ अपना समर्थन और एकजुटता व्यक्त करने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हों।

यूपी और उत्तराखंड के कार्यक्रमों में तब्दीली-

कल के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कार्यक्रम में थोड़ी तब्दीली की गयी है। मोर्चे के नेताओं के मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान शनिवार को सड़क पर जाम नहीं लगाएंगे, बल्कि शांतिपूर्वक जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालय पर ज्ञापन देंगे। इन दोनों राज्यों में जाम की कॉल वापस लेने पर एक सवाल के जवाब में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड के किसानों को स्टैंड बाई में रखने का फैसला लिया गया है। इस दौरान यूपी गेट (गाजीपुर बार्डर) पर टिकैत के साथ संयुक्त मोर्चा के सदस्य और किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल भी मौजूद थे। राजेवाल ने कहा कि विशेष कारणों से यूपी और उत्तराखंड के लिए शनिवार के चक्का जाम कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव किया गया है।
राकेश टिकैत ने कहा कि चक्का जाम की कॉल वापस नहीं ली गई, बल्कि कार्यक्रम में मामूली सा फेरबदल किया गया है। यूपी और उत्तराखंड के किसान अपने तहसील और जिला मुख्यालय पर जाकर अधिकारियों को ज्ञापन देंगे। ज्ञापन में तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी पर कानून की मांग की जाएगी। किसानों से यह कार्यक्रम शांतिपूर्वक करने की अपील की गई है। टिकैत ने कहा कि आंदोलन को बैकअप देने के लिए यूपी और उत्तराखंड के एक लाख किसानों को बैकअप में रखा गया।

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