कोरोना से इंदौर के डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी की मौत

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इंदौर के डॉक्टर शत्रुघ्न पंजवानी को नमन। कोरोना के संक्रमण ने इनकी जान ले ली। दो दिन पहले पोजिटिव आया था। उसके एक दो दिन पहले डॉ. पंजवानी ने अपना एक वीडियो जारी किया था। बीमारी का सामना कर रहे थे। बेफिक्र थे। लोगों से नहीं घबराने की बात कर रहे थे। वीडियो में बिल्कुल ठीक लग रहे थे मगर तबीयत इतनी तेज़ी से बिगड़ी और उन्हें नहीं बचाया जा सका।

भले ही डॉ. पंजवानी कोरोना के इलाज से नहीं जुड़े थे न ही सरकारी डाक्टर थे। मगर इस संकट में कोई डॉक्टर चला जाए यह सबका नुकसान है। परिवार का तो है ही। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तीन-तीन प्राइवेट अस्पतालों में ले जाया जो कोरोना के इलाज के लिए चिन्हित किए गए थे। फिर भी नहीं बचाए जा सके। मौत के कारणों की बात तो तभी सामने आती जब ऐसे संकट के वक्त हमारे देश में रिसर्च की व्यवस्था होती। तो पता चलता कि मरीज़ आखिर तक कैसे लड़ रहा था। उसके साथ वहां मौजूद डॉक्टर स्वास्थ्यकर्मी कैसे लड़ रहे थे। यह सब जानना ज़रूरी है।

62 साल के डॉ. पंजवानी ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की थी। 1983 में यूनिवर्सिटी ऑफ सिंध के छात्र थे। उनका जन्म 1958 में हुआ था।

वहीं इंदौर के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने कहा है कि प्राइवेट अस्पताल वाले कोरोना की लड़ाई में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ज़िलाधिकारी ने साफ कहा है कि यदि सहयोग नहीं मिलता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। नर्सिंग होम एक्ट के तहत चिकित्सालय के ऊपर कार्रवाई होगी और पंजीयन रद्द किया जा सकता है।

पूरे भारत ने सभी डाक्टरों के लिए थाली बजाई। लोगों ने यह नहीं देखा कि प्राइवेट के लिए बजानी है या सिर्फ़ सरकारी के लिए। लेकिन संकट की इस घड़ी में प्राइवेट अस्पताल बंद हैं जबकि उन्हें बंद करने के लिए नहीं कहा गया है। आम इलाज के लिए लोग बहुत परेशान हैं। कई शहरों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं। इंदौर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी कहा है कि शहर के प्राइवेट अस्पतालों से सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्हें अस्पताल खुला रखना है और सारे स्टाफ काम पर हों ताकि आपात स्थिति में उनकी भी सेवा ली जा सके। इंदौर के तीन प्राइवेट अस्पतालों को अधिगृहीत किया गया है। क्या इस डर से प्राइवेट अस्पताल बंद हैं या फिर वे कोरोना के संक्रमण से घबरा गए हैं।

चिकित्सा अधिकारी के अनुसार इंदौर के कलेक्टर ने कहा है कि अगर प्राइवेट अस्पतालों द्वारा सहयोग नहीं मिलता है तो उनके खिलाफ निश्चित तौर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।

(वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का यह लेख उनके फ़ेसबुक पेज से लिया गया है।)

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