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जम्मू: सवर्ण बीजेपी नेताओं के टॉर्चर से परेशान हो कर दलित सरपंच महिला ने दिया इस्तीफा

आखिरकार दलित सरपंच कमलेश कुमारी की हिम्मत ने जवाब दे ही दिया। सरपंच ने पूछाल ब्लॉक विकास कमेटी के अपर कास्ट हिंदू सदस्यों के टॉर्चर से तंग आकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 18 जुलाई को सिस्टम से हार मानकर दलित महिला सरपंच कमलेश कुमारी ने सरपंच के पद से इस्तीफा दे दिया है इस मौके पर उन्होंने एक प्रेस वार्ता को भी संबोधित किया जिसमें उन्होंने बताया कि इससे अधिक दबाव वो बर्दाश्त नहीं कर पाएँगी वो और उनके साथ-साथ उनका पूरा परिवार बड़े कठिन दौर से गुज़र रहा है इसलिए उन्होंने ये फैसला लिया कि वे अपने पद से ही इस्तीफा देंगीं क्योंकि उनके लिये उनका पद उनके परिवार से महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन इसके साथ-साथ एक मलाल भी है कि उनको भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

किश्तवाड़ के पूछाल गाँव की रहने वाली कमलेश कुमारी जो पिछले कुछ महीने से पूरे जम्मू-कश्मीर में चर्चाओं में बनी हुई थीं उनका आरोप है कि (आरडीडी) विभाग जिसको आम बोलचाल की भाषा में ब्लॉक डिपार्टमेंट कहते हैं उसके कुछ कर्मचारी और ऑफिसर तथा भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं के साथ मिलकर उन्हें पद से हटाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने इस सारे षड्यंत्र के पीछे भाजपा का हाथ बताया उन्होंने किश्तवाड़ से भाजपा के पूर्व विधायक सुनील शर्मा भाजपा के ज़िला अध्यक्ष प्रदीप परिहार भाजपा के बीडीसी चेयरमैन सुरेश शर्मा का इस षड्यंत्र में शामिल होने की बात कही।

कमलेश कुमारी आगे बताती हैं कि किश्तवाड़ की भाजपा अब दो ही लोगों तक सीमित रह गई है सुनील शर्मा और प्रदीप परिहार और दोनों खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

कमलेश कुमारी ने एक बार फिर दोहराया कि उन्होंने हर एक ऑफिसर को लिखित में अपनी फरियाद सुनाई लेकिन किसी ने उस पर गौर नहीं किया इसलिए थक हारकर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा लेकिन जिन लोगों ने भी उनकी जाति पर टिप्पणी की है और जिन लोगों ने भ्रष्टाचार किया है या जो लोग उनके पीछे हैं उनके साथ उनकी जंग और उनका संघर्ष जारी रहेगा।

कमलेश कुमारी ने ये भी कहा कि “यदि मुझे या मेरे परिवार को किसी भी प्रकार की हानि पहुँचती है तो सुनील शर्मा, प्रदीप परिहार, सुरेश शर्मा और शीतल शर्मा (बी डी ओ) ज़िम्मेवार होंगे।”

एट्रोसिटी एक्ट के तहत दलित उत्पीड़न का जम्मू कश्मीर का पहला केस

पूछाल गांव की पूर्व सरपंच कमलेश कुमारी ने 2 जून 2020 को बीडीसी चेयरमैन सुरेश शर्मा के खिलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज़ करवाया था। इत्तफाक से ये एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज़ कराया गया जम्मू का पहला केस है। बता दूँ कि एससी/एसटी एक्ट यहां लागू नहीं था। इसे लागू करने को लेकर लगातार विवाद था। धारा 370 डायल्यूट करने और जम्मू-कश्मीर के तीन टुकड़े करने के बाद यहाँ एससी/एसटी एक्ट लागू हो गया। ये एक्ट जातीय उत्पीड़न के खिलाफ़ एक कारगर हथियार है। लेकिन एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज़ होने के बावजूद अभी तक आरोपी को गिरफ्तार तक नहीं किया गया है।

पूर्व सरपंच कमलेश कुमारी ने आरोप लगाया है कि चेयरमैन ने कई लोगों के सामने बीडीसी कार्यालय में उन्हें धक्का दिया मारपीट की और जाति सूचक गालियां दी।

पूरा मामला कुछ यूँ है

कमलेश कुमारी का कहना है कि ‘मेरी पंचायत में जितना भी काम था वो सब हुआ है। फिर चाहे वो मनरेगा का हो, चाहे फूड सिक्योरिटी का। पूछाल गांव में कुल सात वार्ड  हैं। 2 वार्ड में राजपूत हैं। वहाँ ज़्यादा पैसा गया है 14-14 हजार रुपए डाला गया है। जबकि बाकी के पांच वार्डों में जिनमें एससी के दो वार्ड और मुस्लिम के तीन वार्ड हैं वहां पैसा कम डाला गया। इन वार्डों के जॉब कार्ड धारकों के खाते में 3-4 हजार रुपए डाला गया है जबकि 100 दिनों का रोजगार है। इसके खिलाफ़ जब मैंने आवाज़ उठाया कि मजदूरों ने इस लॉक डाउन में इस महामारी में काम किया है उनके काम होने के बावजूद वेतन कम डाला गया है।

जबकि जॉब कार्ड में हाजिरी किसी की 90 दिन, किसी की 100 दिन किसी की 75 दिन चढ़ा हुआ है। उनकी हाजिरी के बावजूद उनके खाते में पैसा कम डाला गया। आवाज़ उठाने पर जेई विजय परिहार ने पाँच पंचों को अपने पक्ष में कर लिया है। इन पांचों पंचों के भी अपने निजी हित हैं। पंच राजेंद्र कुमार (अपने वॉर्ड में ठेकेदारी भी करता है और फूड डिस्ट्रीब्यूशन का काम खुद करता है), पंच सीमा देवी (इनका पति मुलाजिम है और वॉर्ड की ठेकेदारी और मनरेगा का काम खुद करता है), तीसरा पंच भी फूड डिस्ट्रीब्यूशन का काम अपने घर में करता है। पांचों पंच और जेई मिलकर एक पक्ष हो गए। 

इसके बाद उनका कहना था कि उन्होंने जेई के खिलाफ़ डायरेक्टर शीतल नंदा को सीधे कंप्लेन किया। इसके बाद जेई विजय परिहार ने उन्हें जातिगत शब्दों को कहकर अपमानित किया और धक्के मारे, नीच कहा। उन्हें टॉर्चर किया। और मारने की धमकी दी। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाने पर उनके साथ ये बर्ताव हो रहा था। तंग आकर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सवर्ण भाजपाई बनाम दलित सरपंच

कमलेश कुमारी दलित सरपंच को हटाने के लिए जिम्मेदार भाजपा की सवर्णवादी राजनीति पर कहती हैं, “भाजपा का जो जिलाध्यक्ष है वो मुझे अंदरूनी तौर पर सरपंच के पद से हटाना चाह रहा है। और मुझे सरपंची से हटाने के लिए पूरी भाजपा पार्टी लगी है। क्योंकि मैं सवर्णों के भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठा रही हूँ”।

मामला मीडिया में दलित कमलेश कुमारी बनाम सवर्ण भाजपाई होने पर कई भाजपाई कह रहे हैं कि कमलेश कुमारी भाजपा के सहयोग से ही सरपंच बनी हैं। इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए कमलेश कुमारी कहती हैं, “ आज़ाद कैंडीडेट के रूप में निर्वाचित हुई थी। पूछाल ब्लॉक विकास कमेटी (बीडीसी) में सारे लोग ऊँची जाति के हैं। जेई के खिलाफ़ कंप्लेन करने के बाद मुझे ब्लॉक में बुलाकर जेई के साथ कंप्रोमाइज करने के लिए विभाग और चार पंचों द्वारा मुझ पर दबाव बनाया गया। बीडीसी चेयरमैन दो महीने से मुझे टॉर्चर कर रहा है कि मैं जेई के खिलाफ कंप्लेन वापस लूँ और उसके पैर पकड़कर माफी माँगूं। लेकिन मैंने स्पष्ट कर दिया जब तक 100 दिन का पैसा बाकी वार्ड के लोगों को नहीं मिलता है। मैं कंप्रोमाइज नहीं करूंगी। इसी बात पर मुझे बीडीसी कार्यालय चेयरमैन द्वारा धक्का मारा गया, मुझे जलील किया गया और जाति सूचक गालियां दी गईं”।

कमलेश कुमारी भाजपा की विभाजन कारी राजनीति पर कहती हैं, “जहां-जहां बीजेपी की सरकार है वहां वो जातिवादी तंत्र को बढ़ावा देते हैं। इनकी जहां सरकार है वहां वो जातिवादी व्यवस्था को मजबूत करते हैं और फर्जी झगड़े फसाद में फँसाकर दलित समुदाय के लोगों को परेशान करते हैं।”

बीडीसी, चेयरमैन का कहना है कि एंटी बीजेपी लोगों का ये षड्यंत्र है और वो लोग कमेलश कुमारी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कमलेश कुमारी को पूरे प्रदेश भर से दलित संगठनों का ज़बरदस्त साथ भी मिला था प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दलित समुदाय के लोग इनके समर्थन में सड़कों पर उतर रहे हैं। मामला पीएमओ तक पहुँचने की भी सूचना है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 28, 2020 9:48 pm

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