Saturday, April 20, 2024

ये बेटियां इम्तहान छोड़कर देश और संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं

फरवरी महीने के दूसरे पख के साथ ही दसवीं और बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। केंद्रीय बोर्ड समेत सभी राज्यों की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी के दूसरे-तीसरे पखवाड़े से शुरू हो रही हैं। सीबीएसई की परीक्षाएं जहां 15 फरवरी से शुरू हो रही हैं। वहीं सबसे बड़े राज्य यूपी की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से। बिहार बोर्ड की परीक्षाएं चीन फरवरी से शुरू हो चुकी हैं। सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ़ पिछले दो महीने से आंदोलनरत होने के कारण लाखों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि उनके लिए पढ़ाई बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन मुल्क से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं।

आंदोलन में शामिल होकर लगातार धरना देने वाले कुछ छात्र-छात्राओं से हमने बात करके उनकी प्रतिक्रियाएं लीं।

मेरी पढ़ाई से ज़्यादा ज़रूरी है ये मुल्क 
इलाहाबाद की तूबा 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। वो कहती हैं, “मेरी बोर्ड परीक्षा नज़दीक है। फिर भी मैं 30 दिन से लगातार रोशन बाग़ के धरने में शामिल हूं, क्योंकि ये मेरी पढ़ाई से ज़्यादा ज़रूरी है।” इलाहाबाद की ही एक और छात्रा निशा कहती हैं, “मैं कक्षा 12 में हूं। मेरा इस बार बोर्ड है। फिर भी मैं यहां बैठी हूं धरने पर, क्योंकि बात हमारे देश और हमारी नागरिकता की है। हमारी पढ़ाई हमारे मुल्क से बढ़कर नहीं है।”

रोशन बाग़ धरने में शामिल सानिया कहती हैं, “मेरा हाईस्कूल है। मैं सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ़ हूं। अपनी पढ़ाई छछोड़कर यहां बैठी हूं, क्योंकि ये देशहित के लिए है।” उन्होंने कहा कि हम इम्तहान देकर डिग्री हासिल भी कर लें तो क्या वो डिग्री डिटेंशन कैंप में दिखाएंगे।

सीलमपुर जाफ़राबाद की 12वीं कक्षा की छात्रा निशात कहती हैं, “इस साल हमारा बोर्ड का इम्तहान है, लेकिन परीक्षा की तैयारी करने के बजाय हमें यहां विरोध प्रदर्शन में बैठने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। हमारे साथ इस आंदोलन में दसवीं और बारहवीं की सैकड़ों छात्राएं हिस्सा ले रही हैं। हमारे लिए पढ़ाई और परीक्षा से ज़्यादा ज़रूरी ये मुल्क और इसकी अवाम की ज़िंदगी के अधिकार हैं। हम बोर्ड का इम्तहान देकर डिग्री हासिल भी कर लें तो क्या वो डिग्री डिटेंशन कैंप में दिखाएंगे। हम अपनी कम्युनिटी, अपने संविधान अपने मुल्क को बचाने के लिए यहां हैं।”

शाहीन बाग़ की नाजिया 12वीं की छात्रा हैं। वो कहती हैं, “इस आंदोलन ने हमें जो सबक पढ़ा दिया वो इतने कम समय में कोई स्कूल कॉलेज क्या खाक पढ़ा पाते। आप बताइये आज की तारीख से दो महीने पहले तक कितने लोगों को मालूम था कि इस मुल्क के संविधान की प्रस्तावना में क्या लिखा है, लेकिन इन दो महीने में इस मुल्क के अधिकांश लोगों ने संविधान की प्रस्तावना को देखा, सुना और पढ़ा है।”

उन्होंने कहा कि लोगों को पंथनिरपेक्षता, संविधान के मौलिक अधिकार, नागरिकता अधिकार, एकता, अखंडता, भाईचारा, बराबरी, अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता, धार्मिक आजादी का मतलब पता है। जिस इम्तहान ने हमारे मुल्क की आवाम को इतना कुछ सिखा दिया उसे छोड़कर बोर्ड की परीक्षा की हम कैसे सोच सकते हैं। इस साल मैं बोर्ड की परीक्षा छोड़ रही हूं, लेकिन हां अगर सब कुछ सही सलामत रहा तो अगले साल बोर्ड की परीक्षा में ज़रूर बैठूंगी।

कसाबपुरा की आयशा 10वीं की छात्रा हैं। वो कहती हैं, “जब हमारे मुल्क पर, हमारे संविधान और अवाम पर आफत टूटी हो ऐसे में हम पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा के बारे में सोच भी कैसे सकते हैं। वैसे भी हम जीवन के सबसे बड़े इम्तहान में शामिल हैं। देश और आईन को बचाने के इम्तहान में। अगर हमारा मुल्क और आईन महफूज़ रहा तो बोर्ड इम्तहान देने के बहुत से मौके मिलेंगे।”

उन्होंने कहा कि बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री जी से गुजारिश है कि आप एनआरसी-एनपीआर में पैसा फूंकने के बजाये उस पैसे से कारखाने लगवाइए और जो बेरोजगार युवा घरों में बैठे हैं, उन्हें आप रोजगार दीजिए ताकि इस मुल्क की तरक्की में वो भी योगदान दे सकें। प्रधानमंत्री जी प्लीज आप सीएए कानून को वापिस ले लीजिए। ये बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। आप इसे वापिस ले लीजिए और हमारे हिंदुस्तानी एकता की खूबसूरती को बढ़ाइए।

निजामुद्दीन की तरन्नुम 12वीं की छात्रा हैं। वो कहती हैं, “सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख ने हम लड़कियों की शिक्षा के लिए जो संघर्ष किया था उनके उस संघर्ष का जो हासिल था उसे बचाए रखने का जिम्मा अब हम लड़कियों का है। बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ने संविधान के जरिए हमारे लिए लैंगिक समानता का जो अधिकार कायम किया था, उसे बचाने का जिम्मा हमारा है। हम अपने उन अधिकारों को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। हम अपने उन पुरखों, पुरखिनों की विरासत और वसीयतनामे को बचाने के लिए लड़ रहे हैं, जिसे आइन कहते हैं। जिससे हमारे मुल्क की सच्ची तस्वीर बनती है। जिंदगी का सबसे बड़ा सबक हम यहां धरना स्थल पर सीख रहे हैं। जिंदगी का सबसे मुश्किल इम्तहान हम सड़कों पर दे रहे हैं।”

इलाहाबाद के सैफ कक्षा 12 में हैं। वो कहते हैं, “जब हमारा मुल्क ही महफूज नहीं है, हमारा आईन, हमारी कौम ही महफूज़ नहीं है तो ऐसे में भला मैं पढ़ाई और करियर के बार में कैसे सोच सकता हूं। पढ़ाई, नौकरी, कमाने-खाने के बारे में सोचने से ज्यादा ज़रूरी है, कि ये मुल्क महफूज हो, हम महफूज हों। और जब तक हमारे मुल्क और संविधान पर चोट करने वाला सीएए खत्म नहीं होता हम नहीं हटेंगे। ये सरकार तो खैर शिक्षा विरोधी है ही। ये शिक्षा को खत्म देना चाहते हैं। इस मुल्क से पढ़ी-लिखी क़ौम खत्म कर देना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि हमें इसके खिलाफ़ लड़ना होगा। हम लड़ रहे हैं देश की सुरक्षा के लिए, संविधान की सुरक्षा के लिए, परिवार की सुरक्षा के लिए। मेरी पढ़ाई चौपट हो गई है। दो महीने से कुछ भी पढ़ाई नहीं हुई है। मैं पेपर दूं या न दूं, अभी डिसाइड नहीं कर पाया हूं।” सैफ ने कहा कि उनके बहुत से सहपाठी और दोस्त गैर मुस्लिम हैं। उनमें से कई सीएए-एनआरसी के खिलाफ़ हैं। जबकि कुछ पक्ष में भी हैं। जो पक्ष में हैं वो बहुत हिंसक हैं। जो जहर उन्होंने घोला है ये उसका असर है, लेकिन हम साथ हैं। मैं उनसे लगातार कहता हूं कि नफ़रत से कुछ न हासिल होगा। हमें साथ ही रहना है वो तो पांच या दस साल के मेहमान हैं, इसके बाद तो उन्हें जाना ही है।

जामिया नगर की रिया कक्षा 12 की छात्रा हैं। वो कहती हैं, “जब देश में हर ओर इतनी अशांति हो तो हम फोकस पढ़ाई पर कैसे कर सकते हैं। कोई भी कॉलेज आज सुरक्षित नहीं है। हमने देखा उनके गुंडे गार्गी कॉलेज में घुसकर लड़कियों से बदतमीजी करते हैं और सरकार उनके खिलाफ़ कुछ नहीं बोलती। कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होती। सिर्फ़ इसलिए कि वो गुंडे उनके काले कानून सीएए के समर्थन में रैलियां निकालते हैं। जामिया, जेएनयू, अलीगढ़ यूनिवर्सिटी की छात्राओं पर हमले किए जाते हैं। अभी कल ही जामिया में प्रदर्शन कर रही छात्राओं के प्राइवेट पार्ट पर पुलिस ने मुक्के मारे हैं। उन्हें लाठियों से मारा है। ये सब देख सुनकर दिमाग सुन्न हो जाता है। हम ऐसे में पढ़ाई पर फोकस कैसे कर सकते हैं।”

प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ’ का नारा दिया तो सीएए, एनआरसी और एनपीआर लाकर पूरे मुल्क के साथ विश्वासघात किया। बेटियों को बचाने का नारा दिया और बलात्कारियों को संरक्षण देते रहे। बेटियां चीखती रही, जिंदा जलाई जाती रहीं और सरकार के मंत्री बलात्कारियों के पक्ष में तिरंगा यात्रा निकालते रहे। बलात्कारियों से केस वापिस लिए जाते हैं! सरकार बेटियों को पढ़ाने का नारा देती है और आज की तारीख में बेटियां बोर्ड परीक्षा छोड़कर मुल्क और आईन बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं।

(सुशील मानव लेखक और पत्रकार हैं। वह इन दिनों दिल्ली में रहते हैं।)

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles