Friday, March 1, 2024

वीपी सिंह की मूर्ति का अनावरण: उत्तर और दक्षिण के सामाजिक न्याय के बीच सेतु बनता डीएमके  

नई दिल्ली। चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम ने सामाजिक न्याय की राजनीति को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) ने संघ-भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे के सामने ‘सामाजिक न्याय’ की राजनीति को विकल्प के रूप में रखा है। विपक्षी एकता के शुरुआती पैरोकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं तो उत्तर और दक्षिण के सामाजिक न्याय को एक साथ जोड़ने का काम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कर रहे हैं।

सांप्रदायिक शक्तियों को सामाजिक न्याय की राजनीति से हराने की रणनीति पर काम कर रहे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पिछले 20 अप्रैल को यह वादा किया था कि वह चेन्नई में सामाजिक न्याय के मसीहा वीपी सिंह की मूर्ति स्थापित करेंगे।

एमके स्टालिन ने सोमवार (27 नवंबर) को पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की प्रतिमा का अनावरण कर अपना वादा पूरा किया। चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में वीपी सिंह के आदमकद मूर्ति के अनावरण करते समय उनकी पत्नी सीता कुमारी, पुत्र अजेय सिंह और अभय सिंह और परिजनों के साथ यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी उपस्थित थे।

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के लिए यह कार्यक्रम अपने पिता एम. करुणानिधि और वीपी सिंह के आपसी संबंधों को याद करने के साथ ही उनके राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है। दरअसल, पिछले दिनों विपक्षी दलों के बीच एकता स्थापित करने प्रयासों के बीच स्टालिन ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को याद किया था। क्योंकि लंबे समय से विपक्षी दल और क्षेत्रीय दल एक ऐसे वैचारिक प्लेटफार्म की तलाश में थे, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक विकल्प बन सके।

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) नब्बे के दशक में देश की राजनीति को बदलकर रख दिया था। उन्होंने कांग्रेस से निकलकर विपक्षी दलों का मोर्चा बनाया और प्रधानमंत्री बनने के बाद सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया। उनके इस कदम से उत्तर भारत की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया।

अब जब विपक्षी दलों का गठबंधन बनाकर 2024 में संघ-भाजपा को राजनीतिक रूप से परास्त करने की रणनीति बन रही है, तो ऐसे में सामाजिक न्याय का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। स्टालिन ने मोदी सरकार से राष्ट्रीय जनगणना के साथ-साथ जाति जनगणना करने की मांग करते हुए वीपी सिंह की निरंतर प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में आनुपातिक आरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए स्टालिन ने जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय की प्राप्ति के लिए ऐसे उपाय आवश्यक हैं।

स्टालिन ने कहा कि “वीपी सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। अखिलेश भी उसी राज्य के हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान विपक्ष के नेता (राज्य में), भविष्य के मुख्यमंत्री, मेरे प्यारे भाई अखिलेश यहां आए हैं। वह मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं, जिनका पालन-पोषण वीपी सिंह के पसंदीदा नेता राम मनोहर लोहिया के वैचारिक परिवेश में हुआ है।” ‘

स्टालिन ने यह भी दावा किया कि सिंह का तमिलनाडु से गहरा संबंध था और वह समाज सुधारक पेरियार का सम्मान करते थे।

स्टालिन ने कहा, “वीपी सिंह की पत्नी सीता कुमारी और उनके बेटों अजय सिंह और अभय सिंह को मेरा हार्दिक धन्यवाद, जिन्होंने हमारा निमंत्रण स्वीकार किया और यहां आए। मैं आपको वीपी सिंह का परिवार नहीं कहना चाहता, क्योंकि हम सभी वीपी सिंह के परिवार से हैं, जो एक अखिल भारतीय सामाजिक न्याय परिवार है।”

सोमवार को, स्टालिन ने उस कठिन समय को भी याद किया जब सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया था, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था। उन्होंने इन उपायों के समर्थन में अपने पिता और दिवंगत द्रमुक संरक्षक एम करुणानिधि के काव्यात्मक उद्गार को याद किया, जो सामाजिक समानता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

स्टालिन ने 1988 में वीपी सिंह के साथ अपनी व्यक्तिगत बातचीत और पहली और बाद की मुलाकातों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व की कमी की ओर इशारा करते हुए भारत में सामाजिक न्याय की वर्तमान स्थिति की आलोचना की। उन्होंने इस यथास्थिति में बदलाव का आग्रह करते हुए कहा कि द्रमुक इस मिशन के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने द्रमुक सरकार द्वारा की जा रही कई कानूनी पहलों को भी सूचीबद्ध किया, जिसमें चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में ओबीसी आरक्षण के लिए लड़ाई और तमिलनाडु में सामाजिक न्याय की निगरानी के लिए एक समिति की स्थापना शामिल है। उन्होंने सिंह और उनके पिता करुणानिधि के बीच गहरे संबंध, तमिलनाडु के साथ सिंह के रिश्ते, पेरियार के प्रति उनकी प्रशंसा और करुणानिधि के प्रति सम्मान को दर्शाते हुए किस्से साझा किए।

स्टालिन के भाषण में तमिलनाडु में सिंह के योगदान का विवरण दिया गया, जिसमें कावेरी जल विवाद के लिए मध्यस्थता आयोग की स्थापना में उनकी भूमिका और श्रीलंका मुद्दे को हल करने में उनके प्रयास शामिल थे। उन्होंने सिंह के सुझाव पर चेन्नई में आयोजित ऐतिहासिक राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक को याद किया।

उन्होंने ओबीसी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के उत्थान के लिए पूरे भारत में एकजुट प्रयास करने और राजनीतिक कार्यक्रमों को सरकारी योजनाओं में बदलने का आह्वान किया। सोमवार का कार्यक्रम सामाजिक न्याय मंच स्थापित करने और अपने लिए एक राष्ट्रीय भूमिका बनाने के स्टालिन के लंबे प्रयास का हिस्सा के रूप में देखा जा रहा है।

(जनचौक की रिपोर्ट।)

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles