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मेरे शव को शासन को सौंप दिया जाए ताकि अंगों को बेचकर वह अपने कर्ज वसूल सके: एमपी के किसान का सुसाइड नोट

किसानों के आन्दोलन का 37 वां दिन है और अब तक सरकार के साथ सात दौर की वार्ता हो चुकी है। किसान तीनों नये कृषि कानूनों के वापस लिए जाने की अपनी मांग पर कायम हैं और पिछली वार्ता में दो मुद्दों पर सहमति की बात कही गयी थी।

इस बीच मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बिजली विभाग की कार्रवाई से परेशान किसान ने आत्महत्या कर ली है। मुनेन्द्र राजपूत नामक किसान ने आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा है जिस पर लिखा है कि मरने के बाद उसके शरीर को शासन के हवाले कर दिया जाये ताकि उसके अंग बेच कर शासन अपना कर्ज़ा चुका ले।

मुनेंद्र राजपूत ने सुसाइड नोट में लिखा है, ‘मेरी तीन पुत्री और एक पुत्र है। किसी की उम्र 16 वर्ष से अधिक नहीं है। मेरी परिवार से प्रार्थना है कि मेरे मरने के उपरान्त मेरा शरीर शासन के सुपुर्द कर दें, जिससे मेरे शरीर का एक-एक अंग बेच कर शासन का कर्जा चुक सके।’

उसने कर्ज न चुका सकने का कारण भी लिखा है, ‘मेरी एक भैंस करंट लगने से मर गई, तीन भैंस चोरी हो गई, आषाढ़ में (खरीफ फसल) खेती में कुछ नहीं मिला, लॉकडाउन में कोई काम नहीं और न ही चक्की चली। इस कारण हम बिल नहीं दे सके।’

‘द वायर’ ने राजस्थान पत्रिका के हवाले से लिखा है कि, आत्महत्या करने से पहले तीन खत लिखे थे– एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूसरा मध्य प्रदेश सरकार और तीसरा खत किसान भाइयों को अपील करते हुए लिखा।

बता दें कि दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान भी अब 55 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं और संत बाबा राम सिंह और एडवोकेट अमरजीत सिंह राय आत्महत्या कर चुके हैं और इन दोनों ने भी अपने सुसाइड नोट में मोदी को जिम्मेदार ठहराया था।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस बीच कहा है कि, 4 जनवरी को होने वाली बैठक में कानूनों की वापसी और एमएसपी पर कानून बनाने पर चर्चा होगी।

आज सिंघु बॉर्डर पर किसानों के बीच नगर कीर्तन का आयोजन किया गया।

वहीं नए साल पर किसानों के बीच सिंघु बॉर्डर पर खालसा यूथ ग्रुप ने टर्बन लंगर का आयोजन किया।

इस बीच, आज बठिंडा से आया एक परिवार किसानों के समर्थन में टिकरी बॉर्डर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुआ। परिवार के एक सदस्य ने बताया, “मैं मोदी जी से विनती करता हूं कि किसान की जो मांगें बची हैं उसे आप जल्दी पूरा करें ताकि किसान खुशी-खुशी अपने घर जाएं।”

किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने बताया, “तीन कृषि कानून रद्द होने चाहिए, अगर 4 जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकलता तो आने वाले दिनों में संघर्ष तेज़ होगा”।

कल 2020 के अंतिम दिन केरल में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर नये कृषि कानूनों के खिलाफ पारित किये जाने के बाद आज तमिलनाडु में डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on January 1, 2021 7:57 pm

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