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हाथरस कांडः ऐपवा का प्रदेश भर में प्रदर्शन, कहा- यूपी पुलिस पर हो लीगल एक्शन

हाथरस की घटना को लेकर महिला संगठनों का गुस्सा और विरोध सड़कों पर अब भी जारी है। आज शुक्रवार को ऐपवा ने यूपी के तमाम जिलों में प्रदर्शन किया। संगठन ने महिलाओं के साथ बर्बर यौन हिंसा और हत्या की घटनाओं के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाला और अपना मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को भेजा। ऐपवा ने हाथरस कांड में लापरवाही बरतने वाले और दलित बेटी की लाश को संवैधानिक अधिकारों को दरकिनार कर जलाने वाले पुलिसकर्मियों पर लीगल एक्शन की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि पिछले दिनों हाथरस, बलरामपुर, आज़मगढ़, भदोही आदि जिलों में हुई बलात्कार की घटनाएं सुर्खियों में रहीं। इनके अलावा भी आये दिन प्रदेश में महिलाओं पर यौन हिंसा की तमान घटनाएं हो रही हैं। दलित महलाएं विशेष रूप से यौन हिंसा का शिकार बन रही हैं। इन घटनाओं के प्रति प्रदेश सरकार का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना और निंदनीय रहा है, जिसे हाथरस की घटना से बखूबी समझा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हाथरस में न तो पीड़िता का समुचित इलाज हुआ और रात के अंधेरे में प्रदेश की पुलिस और प्रशासन ने मिलकर बिना परिवार के सदस्यों की मौजूदगी के उसकी लाश जला दी। इस घटना से सरकार का दलितों और महिलाओं के प्रति घृणित और मनुवादी चेहरा उजागर हुआ है।

अपने बयान में कृष्णा अधिकारी ने कहा कि यूपी की पुलिस भी सरकार के इशारे पर काम कर रही है। कल ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हाथरस की घटना पर महिला संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुलिस ने ऐपवा नेता समेत कई आंदोलनकारी महिला नेताओं पर अभद्र टिप्पणी, अश्लील हरकत करते हुए असंवैधानिक ढंग से गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ रहे दमन से यह साफ जाहिर है कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की कुर्सी के लायक़ नहीं हैं।

प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी हाथरस मामले में अपने पुलिस-प्रशासन की निरंकुशता पर पर्दा डालने और अपनी सरकार की विफलता से ध्यान भटकाते हुए अब इस मामले पर सांप्रदायिक राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं और इस पूरी घटना के पीछे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की साजिश बता रहे हैं।

प्रदेश उपाध्यक्ष आरती राय ने कहा कि हाथरस पीड़िता के गांव में पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने आए आंदोलनकारियों के ऊपर तो दफा 144 का हवाला देकर योगी सरकार फर्जी मुकदमे लगा रही है, जनपक्षधर पत्रकारों की यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तारी कर रही है, और उसी गांव में पुलिस प्रशासन के संरक्षण में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद द्वारा बलात्कारियों के समर्थन में पंचायतें आयोजित की जाती हैं। इससे साफ है कि यह सरकार फासीवाद की राह पर चल पड़ी है।

ऐपवा सहसचिव गीता पांडेय ने कहा कि हाथरस मामले में पीड़िता के संबंध में कोई संवेदनशील बयान न देना हमारे देश के प्रधानमंत्री, जो ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देते नहीं थकते थे, के चेहरे से महिला हितैषी का नकाब उतर चुका है। गीता ने कहा कि हाथरस की पीड़िता की लड़ाई के लिए महिलाएं अपना संघर्ष जारी रखेंगी जब तक बलात्कारियों को कड़ी सजा न मिल जाए।

दलित एक्टिविस्ट स्मिता बागड़े ने अपने बयान में कहा कि यूपी में हाथरस की घटना ने दलित अस्मिता और जाति उन्मूलन के सवाल को एक बार फिर सामाजिक पटल पर सामने ला दिया है और जाति विषमता को समाप्त कर पाने में प्रदेश के राजनीतिक दलों की असफलता भी खुलकर सामने आ गई है। आज उत्तर प्रदेश में बाबा साहब अंबेडकर के दलित मुक्ति के आंदोलन के विचारों से प्रेरणा लेते हुए पुनर्निमित करना होगा।

आज मथुरा, लखीमपुरखीरी, जालौन, लखनऊ, इलाहाबाद, सीतापुर, वारणासी, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, भदोही, चंदौली, सोनभद्र, देवरिया, बलिया आदि जिलों में मार्च और प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

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This post was last modified on October 10, 2020 8:03 am

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