Thursday, October 28, 2021

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ओवैसी से दूर होने लगे हैं गुजरात के मुसलमान

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अहमदाबाद। उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद अतीक अहमद से साबरमती सेंट्रल जेल मिलने आए AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात भले ही न हो पाई हो लेकिन ओवैसी जो राजनीति करना चाहते थे कर गए। 

कांग्रेस का ओवैसी पर निशाना 

कांग्रेस के मुस्लिम विधायक गयासुद्दीन प्रेस नोट जारी कर ओवैसी और अतीक अहमद की मुलाकात न हो पाने को भी एक राजनीति कहते हैं। गयासुद्दीन शेख का कहना है कि “ओवैसी और भाजपा दोनों यह संदेश देना चाहते हैं। हमारे बीच अंदरुनी तौर पर कुछ नहीं है।” 

गयासुद्दीन शेख के अनुसार ” पुलिस के अधिकारियों ने बताया था कि प्रशासन द्वारा ओवैसी और अतीक की मुलाकात की अनुमति दे दी गई थी। लेकिन बाद में जनता को गुमराह करने के लिए अनुमति रद्द कर दी गई।”

कांग्रेस पार्षद की ओवैसी से मुलाक़ात

दानीलिमड़ा से कांग्रेसी पार्षद शहजाद खान ने लेमन ट्री होटल में ओवैसी से मुलाक़ात की। यह मुलाकात गुप्त नहीं थी। शहजाद खान के ओवैसी के साथ फोटो को मीडिया और सोशल मीडिया में जानबूझकर जारी किया गया ताकि अहमदाबाद नगर निगम में विरोध पक्ष के नेता के लिए कांग्रेस आला कमान पर दबाव बनाया जा सके। आपको बता दें कि इस वर्ष मार्च में अहमदाबाद नगर निगम चुनाव के परिणाम आए तो कांग्रेस के 24 पार्षद जीतकर नगर निगम में पहुंचे थे। कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी रही जबकि AIMIM सात सीटें जीतकर तीसरे नंबर पर रही। खान ओवैसी से मिलकर अपनी पार्टी को एक संदेश देना चाहते थे। उसमें वो सफल रहे। हालांकि इस मुलाकात के बाद खान ने मीडिया को बताया “CAA-NRC आंदोलन के समय पुलिस और पब्लिक के बीच हुई झड़प के बाद मैं जेल गया था तो ओवैसी साहब ने मेरी मदद की थी। यह एक शुभेक्षा मुलाकात थी। “

ओवैसी जेल में बंद CAA-NRC आंदोलनकारी नाजिया का नाम लेने से भी बचे

ओवैसी ने कहा कि ” शहजाद को CAA-NRC आंदोलन के चलते जेल जाना पड़ा था। इसलिए हम मिले।” लेकिन सच्चाई इसके उलट है। अहमदाबाद में शहजाद के परिवार का एक बड़ा एम्पायर है। राजनैतिक तौर पर शहर में असर रखता है। जेल से छूटने के बाद शहजाद खान ने यह कहते हुए अपने आपको CAA-NRC आंदोलन से अलग कर लिया था कि कोर्ट ने उन्हें कंडिशनल बेल दी है। यह मुलाक़ात पूरी तरह से राजनैतिक है। असदुद्दीन ओवैसी को CAA NRC के आंदोलनकारियों से कोई हमदर्दी नहीं है। यदि हमदर्दी होती तो नाज़िया अंसारी के परिवार से मिलने जाते।

नाजिया अंसारी अहमदाबाद की जेल में बंद हैं। कथित तौर पर अंसारी सरकारी आवास योजना के एक घोटाले में शामिल हैं। नाजिया अंसारी के पति जमशेद अहमद ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिख कर मांग की है कि कथित घोटाले की जांच रखियाल पुलिस से लेकर किसी अन्य एजेंसी को जांच दी जाए। क्योंकि रखियाल पुलिस के दो सब इंस्पेक्टर और नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने मिलकर घोटाला किया है।  नाजिया अंसारी जिसने अहमदाबाद के शाहीन बाग़ धरने को चलाया था। उन्हें सीएए आन्दोलन की खीज निकालने के लिए पुलिस और सरकार ने फंसाया है। पूरे मामले की जांच अन्य एजेंसी से होगी तो सच सामने आएगा। शहजाद खान एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसके पास अरबों की संपत्ति है। जबकि नाजिया अंसारी झोपड़ पट्टी में रहने वाली महिला हैं। 

AIMIM ने नाजिया अंसारी की किसी प्रकार से कोई मदद नहीं की

गुजरात में हुए NRC आंदोलन का सबसे बड़ा नाम कलीम सिद्दीकी है। जिसने अहमदाबाद के अजित मील में दो महीने तक धरना चलाया था। जिसके बाद सिद्दीकी को अहमदाबाद सहित पड़ोसी  जिलों (खेड़ा , गांधीनगर , मेहसाणा) से एक साल के लिए तड़ीपार कर दिया गया था। मार्च में पुलिस के आदेश पर गुजरात हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी। 26 अगस्त को सिद्दीकी की याचिका पर निर्णय देते हुआ कहा है कि ” लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को तड़ीपार नहीं किया जा सकता है। इसलिए पुलिस के आदेश को रद्द किया जाता है।” मीडिया से बातचीत करते हुए ओवैसी ने शहजाद खान को CAA NRC का श्रेय दिया। जबकि नाजिया अंसारी AIMIM के टिकट पर नगर निगम चुनाव भी लड़ चुकी हैं। ओवैसी का यह बर्ताव सिद्ध करता है कि वह अमीर और अशरफी मुसलमानों के साथ हैं। 

AIMIM आगमन से कमजोर हुए गुजरात के मुसलमान

AIMIM के गुजरात आने से पहले मुस्लिम समाज के सामाजिक कार्यकर्ता विभिन्न मुद्दों पर सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर सत्ता के खिलाफ लड़ते थे। लेकिन AIMIM के आगमन के बाद मुस्लिम समाज से सरकार के खिलाफ आवाज़ उठनी बंद हो चुकी है।

सिविल सोसाइटी हमेशा मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मुस्लिम मुद्दों पर सरकार के खिलाफ लड़ती आई है। लेकिन AIMIM के आने से सिविल सोसाइटी मुस्लिमों से दूर हो गई है। जिस कारण अहमदाबाद के मुसलमान कमजोर दिख रहे हैं।

ओवैसी को पिराना डंप पर राजनीति का अधिकार नहीं

पार्टी के आगमन के बाद ओवैसी का यह तीसरा दौरा था। तीनों बार उन्होंने बेहरामपुरा स्थित पिराना डंप साइट और उसके आस पास रहने वाली मुस्लिम आबादी की बदहाली का मुद्दा ज़रूर उठाया लेकिन उस बस्ती को देखने नहीं गए। ओवैसी के अहमदाबाद आगमन से एक सप्ताह पहले पिराना डंप साइट का एक पहाड़ गिर गया जिसकी चपेट में धोराजी सोसाइटी के कई मकान आ गए हैं। यदि ओवैसी उस बस्ती में जाते तो प्रशासन पर दबाव पड़ता। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिराना डंप साइट आस पास की बस्ती दूषित पानी और दूषित हवा से लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। साफ पानी और हवा न मिलने के कारण कई प्रकार की बीमारियां आम हैं। 

गिर रही है गुजरात में ओवैसी की लोकप्रियता

ओवैसी बंधु हमेशा गुजरात के मुसलमानों के हक़ और 2002 मुस्लिम नर संहार पर बोलते आए हैं। जिसके कारण ओवैसी बंधुओं ने गुजरात के मुसलमानों के दिलों में जगह बनाई थी। इस वर्ष हुए नगर निगम चुनाव में गोधरा, मोडासा और अहमदाबाद के मुसलमानों ने ओवैसी बंधुओं के नाम पर वोट भी दिए। गुजरात की मुस्लिम राजनीति पर नजर रखने वाले  शमशाद अंसारी कहते हैं कि “AIMIM को ओवैसी के नाम पर नगर निगम चुनाव में वोट पड़े थे। विधान सभा चुनाव में ऐसा नहीं होगा। क्योंकि उनकी लोकप्रियता में तेज़ी से कमी आ रही है। फ़रवरी में ओवैसी के अहमदाबाद आगमन पर उनके पीछे सैकड़ों गाड़ियों का काफिला चल रहा था। लेकिन तीसरे दौरे पर अहमदाबाद एयरपोर्ट पर केवल पांच छह लोग ही उनके स्वागत के लिए पहुंचे थे। जिससे ओवैसी की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगता है।” 

कमलम से साठ-गांठ का शक

CAA NRC सहित मुस्लिम मुद्दों पर कई आंदोलन कर चुके कलीम सिद्दीक़ी कहते हैं कि “ओवैसी और उनकी पार्टी पर हम लोग नज़र रखे हुए हैं ताकि गुजरात के मुसलमानों के साथ कोई धोखा न हो सके। यदि AIMIM की कमलम के साथ साठ-गांठ के सबूत मिले तो मजलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।”

सलीम हफेजी जो AIMIM की गुजरात यूनिट पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सोशल मीडिया पर लिखते भी रहते हैं। हाफेजी कहते हैं कि ” उत्तर प्रदेश की जेलों से अतीक अहमद अपना नेटवर्क चलाते थे। 26 दिसंबर 2018 को अतीक अहमद के गुर्गे मोहित जायसवाल का अपहरण कर देवरिया जेल ले जाते हैं। जेल में बंद अतीक अहमद जायसवाल की पिटाई करते हैं। जहां पहले से सीसीटीवी कैमरे को बंद कर दिया जाता है। याद रखिए यह सब योगी की हुकूमत में हो रहा है। जायसवाल की सुनवाई योगी प्रशासन नहीं करता है। तो जायसवाल सुप्रीम कोर्ट जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अतीक अहमद को राज्य से बाहर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वाली साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया जाता है।” 

AIMIM पार्टी के गुजरात आने से गुजरात मुस्लिमों का भला होता नहीं दिख रहा है। AIMIM से उन मुस्लिमों को ज़रूर फायदा हो रहा है जो कांग्रेस और भाजपा से सौदेबाज़ी करते आए हैं। ऐसे कई मुस्लिम AIMIM से चुनाव भी जीते हैं और नेता भी बन बैठे हैं।

(अश्विन अग्रवाल गुजरात क्रॉनिकल के संपादक हैं।)

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