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Saturday, September 25, 2021

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नॉर्थ ईस्ट डायरी: छात्र संगठनों का बनाया राजनीतिक दल बदल सकता है असम का राजनीतिक समीकरण

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अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले असम का राजनीतिक माहौल नए राजनीतिक दलों की स्थापना के साथ गरमा गया है। क्षेत्रीय दलों की सूची में नवीनतम नाम ‘असम जातीय परिषद’ (एजेपी) का जुड़ गया है – जो दो सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली छात्र-युवा संगठनों के तत्वावधान में बनाया गया है। एजेपी का गठन दो मुख्य विपक्षी दलों – कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के बीच गठबंधन के बाद और जेल में बंद कृषक नेता अखिल गोगोई के किसान अधिकार समूह कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) द्वारा बनाई जाने वाली एक नई पार्टी से पहले किया गया। 

एजेपी का गठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद (एजेवाईसीपी) के समर्थन के साथ किया गया है – हालाँकि दोनों संगठनों ने दोहराया है कि उनका व्यक्तिगत गैर-राजनीतिक चरित्र और पहचान अपरिवर्तित रहेगा।

उन्हीं दो छात्र संगठनों ने (अन्य क्षेत्रीय संगठनों के साथ) 1985 में प्रसिद्ध रूप से एक क्षेत्रीय पार्टी का गठन किया था। असम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अवैध घुसपैठ के खिलाफ छह साल तक चले असम आंदोलन के नेताओं (आसू और एजेवाईसीपी सहित) ने एकजुट होकर असम गण परिषद (एजीपी) का गठन किया, जो इसके तुरंत बाद सत्ता में आई।

आज राज्य सरकार में एजीपी भाजपा के साथ गठबंधन में है। और अब यह एक और आंदोलन है जिसने नई पार्टी को जन्म दिया है। एजेपी की उत्पत्ति नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन में निहित है, जो पिछले साल के अंत में असम में उभरा था। आसू और एजेवाईसीपी दोनों सीएए और सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ आंदोलन में शामिल थे। उन्होंने माना कि सीएए असम के मूल लोगों के हितों के खिलाफ, सांप्रदायिक और संविधान के खिलाफ था।

आसू और एजेवाईसीपी ने पहले एक “असम सलाहकार समिति” का गठन किया था, जिसमें 16 प्रख्यात व्यक्तियों को शामिल किया गया, ताकि राज्य के मूल लोगों के हितों की रक्षा के लिए कार्यवाही का रास्ता सुझाया जा सके। इसके बाद पार्टी के गठन की घोषणा की गई। 

नई पार्टी की मार्गदर्शक विचारधारा “असम पहले, हमेशा और हमेशा” होगी, जबकि इसका नारा “घोरे घर आमी”(“हम हर घर में हैं”)। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि असम में रहने वाले समुदायों के विचारों को ध्यान में रखते हुए इसका चरित्र क्षेत्रीय होगा। पार्टी से “सांप्रदायिक और असम विरोधी” ताकतों के राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने की उम्मीद की जा रही है।

कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह एआईयूडीएफ और किसी भी अन्य इच्छुक दलों के साथ मिलकर असम में भाजपा विरोधी मोर्चा बनाएगी। दूसरी ओर अखिल गोगोई (वर्तमान में एनआईए द्वारा राजद्रोह के आरोपों के तहत जेल में बंद) के केएमएसएस ने चुनाव लड़ने के लिए ‘राइजर दल’ नामक एक राजनीतिक पार्टी शुरू की है। केएमएसएस ने कहा है कि यह “किसी भी राष्ट्रीय पार्टी या किसी भी सांप्रदायिक पार्टी के साथ” नहीं है।

इस तरह के विभिन्न राजनीतिक दलों के जन्म ने भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे की आशंका को बल दिया है। दूसरी ओर नई पार्टी को भाजपा के लिए संभावित चुनौती  के रूप में भी देखा जाएगा, जो सीएए से नाराज भाजपा के समर्थकों के वोटों का विभाजन कर सकती है।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने नए दल का स्वागत किया है। “महागठबंधन में उनके शामिल होने के लिए हमारे दरवाजे खुले हैं। हमारा प्राथमिक लक्ष्य भाजपा को हराना है – और उनका (एजेपी) उद्देश्य भी वही है। हम सीएए के विरोधी हैं और वे भी सीएए के खिलाफ आंदोलन करते रहे हैं। इसलिए हम दोनों का एक साझा दुश्मन है। यह उनके ऊपर है कि वे हमसे जुड़ना चाहते हैं या नहीं – अन्यथा हम पहले से मौजूद सहयोगियों के साथ आगे बढ़ेंगे, ”कांग्रेस प्रवक्ता रितुपर्ना कोंवर ने बताया है।

एजेपी के समन्वयक जगदीश भुईयां ने कहा, “हम चाहते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सभी क्षेत्रीय ताकतें एक साथ आएं। सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन का मुकाबला करने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है।”

उन्होंने कहा, “लेकिन हमें उस समय तक किसी भी फैसले का इंतजार करना होगा जब नवंबर में एजेपी का पहला राजनीतिक सम्मेलन होगा, पार्टी के पदाधिकारियों की घोषणा की जाएगी और एक संविधान को अपनाया जाएगा।”

भुईयां ने जोर देकर कहा कि यह सोचना सही नहीं है कि एजेपी सभी क्षेत्रीय दलों के पक्ष में नहीं है। उनका संगठन सभी नए क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ मिलकर अगले वर्ष के विधानसभा चुनावों में लड़ने के लिए एक मंच पर एकजुट हो सकता है।”

(दिनकर कुमार ‘द सेंटिनल के संपादक रह चुके हैं। आप इस समय गुवाहाटी में रहते हैं।)

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