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दिल्ली के करीब डेढ़ लाख परिवारों के पास शौचालय नहीं, सर्वे में खुलासा

दिल्ली सरकार का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण, 2018-2019 जारी हुआ है। सर्वे के अनुसार इस शहर में 20.05 लाख परिवार हैं। 42.6 प्रतिशत परिवार 10 हजार रूपये तक प्रति महीना पर जिंदगी गुजारता है। 47.3 प्रतिशत 10 से 25 हजार रूपये प्रति महीना खर्च करते हैं। सिर्फ 1.6 प्रतिशत ही 50 हजार या उससे अधिक प्रति महीने खर्च करते हैं। उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली में कम आय वाले समूह के सबसे अधिक लोग रहते हैं।

जबकि मध्यम आय वाले लोग दक्षिण-पश्चिम और दक्षिणी दिल्ली में अधिक रहते हैं। ऊंची आय वाले लोग नई दिल्ली और उत्तरी-पश्चिम दिल्ली में रहते हैं। कुल 21.2 प्रतिशत के पास ही कंप्यूटर है। यानी 15.7 लाख परिवारों के पास कंप्यूटर या लैपटाॅप नहीं है। इसमें भी नई दिल्ली क्षेत्र में 29.6 और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 14.1 प्रतिशत के पास कंप्यूटर था। इनमें से से लगभग 80 प्रतिशत लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं।

शहर के गिने गये इन परिवारों के 66.6 प्रतिशत के पास अपना घर है। अपने घर के मालिक सबसे अधिक शाहदरा में 76.3 प्रतिशत और उसके बाद मध्य दिल्ली में 72.3 प्रतिशत है। अपने घर का खुद मालिकाना से घर के प्रकार का मसला हल नहीं होता। संभव है कि ये घर गैर पंजीकृत मोहल्ले में हों या स्लम वाले मकान भी हों। यहां सभी तरह की रिहाइश को जोड़ लिया गया है। किराये के मकान में रहने वाले सबसे अधिक नई दिल्ली और दक्षिण पूर्वी दिल्ली में हैं। इस विशाल आबादी का 1.22 लाख परिवार सामुदायिक शौचालय पर निर्भर है। 11, 497 परिवार अभी भी खुले में नित्य काम करने के लिए बाध्य है। सिर्फ 40.7 प्रतिशत परिवारों के पास ही राशन कार्ड है। इसका 85.9 प्रतिशत हिस्सा पीडीएस से राशन हासिल करता है।

दिल्ली के 51.7 प्रतिशत के पास अपनी गाड़ी है। शाहदरा में यह सबसे अधिक है जबकि उत्तरी दिल्ली में सबसे कम 41.5 प्रतिशत है। दोपहिया और चार पहिया दोनों ही गाड़ी रखने वाले लोग कुल 6.6 प्रतिशत हैं। इसमें भी शाहदरा 9.6 और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में 3.6 प्रतिशत से सबसे ऊपर और नीचे हैं। लेकिन केवल चार पहिया वाहन रखने वाले 4.3 प्रतिशत हैं जिसमें नई दिल्ली सबसे ऊपर है। 40.3 प्रतिशत के पास दो पहिया वाहन हैं जिसमें उत्तर पूर्वी दिल्ली और शाहदरा सबसे आगे हैं। दिल्ली में लगभग आधे लोगों के पास किसी तरह का वाहन नहीं है।

इसमें भी उत्तरी दिल्ली के 58.4 प्रतिशत परिवारों के पास कोई वाहन नहीं है। 3.3 प्रतिशत परिवारों के पास किसी भी तरह का फोन नहीं है। दिल्ली में 22.2 प्रतिशत लोग एयरकंडिशनर का प्रयोग करते हैं। इसमें दक्षिण-पश्चिम जिले में सर्वाधिक और उत्तर पूर्वी दिल्ली में सबसे कम है। सबसे घनी आबादी शाहदरा और सेंट्रल दिल्ली की है। कुल रिहाइशों के लगभग 71 प्रतिशत को ही टोटी के माध्यम से पानी पहुंचता है। लगभग 6 प्रतिशत लोग पानी सप्लाई व्यवस्था से ही बाहर हैं।

यहां यह बात हमें ध्यान में रखनी होगी कि कोविड-19 महामारी का प्रभाव दिल्ली पर खूब पड़ा है। खासकर, अनौपचारिक क्षेत्र, रेहड़ी और घरेलू कामों में आई कमी की वजह से 10 हजार से कम आय के लोगों की स्थिति बदतर हुई है। इसी तरह सेवा क्षेत्र में काम के लगभग बंद हो जाने और अब भी उसमें बहुत सुधार न होने से 10 से 25 हजार की आय वाले लोगों की आय में भारी गिरावट आई है। आर्थिक आधार के खराब होने से न सिर्फ मकान, वाहन, कंप्यूटर और इंटरनेट सेवा आदि की मांग में कमी आई है। इसका असर निश्चय ही उपभोक्ता सामानों पर भी पड़ा है। इस रिपोर्ट को इस नजरिये से पढ़ना जरूरी है।

(सामाजिक कार्यकर्ता अंजनी कुमार की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on September 16, 2020 1:45 pm

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