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Tuesday, September 28, 2021

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शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला बरकरार

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उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित 69 हज़ार शिक्षक भर्ती मामले में 37 हजार 339 पदों की भर्ती को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को शिक्षामित्रों को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार के मौजूदा कट ऑफ को सही ठहराया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अपीलकर्ता शिक्षामित्रों को नियुक्ति का अगली भर्ती में एक और मौका दिया जाएगा और उसके तौर-तरीकों को राज्य द्वारा तैयार किया जाएगा। इस आदेश के साथ कोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद बाकी बचे हुए 37,339 पदों पर भर्ती का रास्ता भी साफ हो गया है। इन पदों पर यूपी सरकार के मौजूदा कट ऑफ 60/65 के आधार पर भर्ती होगी।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय में इस मामले में हुई बहस के बाद कोर्ट ने 24 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उच्चतम न्यायालय को यह तय करना था कि परीक्षा के बीच में क्या कटऑफ फीसद बदलकर 60-65 फीसदी किया जा सकता है? इस मामले में शिक्षामित्रों ने उच्चतम न्यायालय  का दरवाजा खटखटाया था और सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई वाली पीठ के सामने शिक्षामित्रों की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन और राकेश द्विवेदी की ओर से दलील दी गई थी कि असिस्टेंट टीचर की भर्ती परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 45 फीसदी और रिजर्व कैटगरी के लिए 40 फीसदी रखा गया था, लेकिन पेपर के बीच में उसे बढ़ा दिया गया और उसे 65-60 फीसदी कर दिया गया। यह गैर कानूनी कदम है, क्योंकि पेपर के बीच में कटऑफ नहीं बढ़ाया जा सकता है। यह दलील भी दी गई थी कि बीएड स्टूडेंट इस असिस्टेंट टीचर की परीक्षा के लिए पात्रता नहीं रखते, क्योंकि उन्होंने ब्रिज कोर्स नहीं किया है। असिस्टेंट टीचरों के लिए ये जरूरी है कि आवेदक छह महीने का ब्रिज कोर्स करें।

उच्चतम न्यायालय में याचिकाकर्ताओं की दलील का यूपी सरकार ने विरोध किया था और यूपी सरकार की ओर से ऑडिशनल सॉलिसीटर जनरल एश्वर्य भाटी ने दलील दी थी कि कटऑफ तय करना गलत नहीं है और बीच परीक्षा में भी ये हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में दिसंबर, 2018 में योगी सरकार ने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी। उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक पदों के लिए 6 जनवरी 2019 को करीब चार लाख अभ्यार्थियों ने लिखित परीक्षा में हिस्सा लिया। एक दिन बाद सरकार की तरफ से कट ऑफ मार्क्स का मानक तय कर दिया। शिक्षक भर्ती की परीक्षा का पेपर 150 नंबर का था। परीक्षा में पास होने के लिए सामान्य वर्ग के कैंडिडेट को 150 में से 97 और आरक्षित वर्ग से आने वाले अभ्यर्थी को 150 में से 90 नंबर लाने थे। सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित कैंडिडेट के लिए 60 प्रतिशत कट ऑफ तय किया गया था।

उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले 68500 पदों के लिए सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें पास होने के लिए आरक्षित वर्ग के लिए 40 और सामान्य वर्ग के 45 प्रतिशत का कट ऑफ तय किया गया था, जिसे इस बार बढ़ाकर सामान्य वर्ग के लिए 65 और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी कर दिया गया।

शिक्षक भर्ती परीक्षा के 60-65 प्रतिशत कट ऑफ पर कुछ अभ्यर्थियों को असंतोष हुआ। शिक्षक भर्ती मामले में दो गुट सामने आए, जिनमें एक शिक्षामित्रों और दूसरा बीएड-बीटीसी वालों का ग्रुप था। शिक्षामित्र 60-65 प्रतिशत कट ऑफ का विरोध करते हुए हाई कोर्ट चले गए। शिक्षामित्रों के मामले पर 11 जनवरी, 2019 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अपना फैसला सुनाया। योगी सरकार हाई कोर्ट में हार गई। हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती की कट ऑफ को सामान्य वर्ग के लिए 45 और आरक्षित वर्ग के लिए 40 फीसदी तय कर दिया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकलपीठ के 40-45 कट ऑफ के ऑर्डर के खिलाफ 22 मई, 2019 को योगी सरकार ने खंडपीठ में अपील की। बीएड और बीटीसी वाले अभ्यर्थियों ने भी एकल पीठ के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी। हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर 22 मई से 19 सितंबर 2019 तक सात बार सुनवाई हुई। हाईकोर्ट में 3 मार्च, 2020 को सुनवाई पूरी हुई थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। 6 मई, 2020 को जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने योगी सरकार को राहत देते हुए सरकार द्वारा तय किए गए कट ऑफ (90-97) नंबर पर ही भर्ती कराने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया था।

योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए काउंसलिंग शुरू कराई। कुछ अभ्यर्थी चार प्रश्नों को गलत बताते हुए फिर कोर्ट चले गए। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए 12 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की। हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट शिक्षामित्र इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय चले गए। उच्चतम न्यायालय ने शिक्षक भर्ती की 3 जून से 6 जून तक होने वाली काउंसलिंग पर रोक लगा दी।

उच्चतम न्यायालय ने शिक्षामित्रों की अपील पर 9 जून 2020 को शिक्षक भर्ती केस में सुनवाई करते हुए 69000 हजार पदों में से 37339 पदों को होल्ड करने का आदेश दिया। इसके साथ सरकार से रिपोर्ट मांगी कि शिक्षामित्रों के कितने अभ्यर्थियों ने अरक्षित वर्ग की 40 और सामान्य वर्ग के 45 फीसदी के कटऑफ पर परीक्षा पास की। इसके बाद 69000 सहायक अध्यापक भर्ती मामले में 12 अक्तूबर को बेसिक शिक्षा विभाग ने 31661 अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी की थी।

इस बीच शिक्षक भर्ती मामले में गड़बड़ी के मामले भी सामने आए हैं। कई सामान्य वर्ग के लोग आरक्षित कोटे के तहत आ गए हैं। इसी शिक्षक भर्ती के टॉपरों ने 150 में से 143 अंक अर्जित करके सबको चौंका दिया था। शिक्षक परीक्षा में फर्जीवाड़े मामले में यूपी एसटीएफ और प्रयागराज पुलिस ने छापेमारी कर आठ नकल माफियाओं को गिरफ्तार किया है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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