महिला पहलवानों का संघर्ष : मजिस्ट्रेट के सामने नाबालिग शिकायतकर्ता का बयान दर्ज

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नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सात महिला पहलवानों में से एक नाबालिग ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि “नाबालिग एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई और बुधवार को अपना बयान दिया।”

पुलिस अधिकारी ने यह भी पुष्टि की कि डब्ल्यूएफआई को एक नोटिस भेजा गया था, उनसे उन टूर्नामेंट के कुछ  डॉक्यूमेंट्स और ब्यौरा देने के लिए कहा था, जिसमें शिकायतकर्ता महिला पहलवान शामिल हुई थीं। उन टूर्नामेंटों में भी यौन उत्पीड़न की कुछ कथित घटनाएं हुई हैं जहां बृज भूषण भी मौजूद थे।

पिछले हफ्ते, पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 161 के तहत शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए, हालांकि ये अदालत में स्वीकार्य नहीं हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि, “छह शिकायतकर्ताओं के बयान अभी मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए जाने बाकी हैं।”

दिल्ली पुलिस ने मामले से जुड़े 15 गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं। ओलंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम की अध्यक्षता वाली निरीक्षण समिति जिसे बृज भूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए बनाया गया था, की रिपोर्ट भी दिल्ली पुलिस को मिल गई है। जिसमें समिति ने पीड़ितों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए हैं। दिल्ली पुलिस ने रिपोर्ट के अलावा पीड़ितों के ताजा बयान भी दर्ज किए हैं।

शनिवार को साक्षी मलिक ने मजिस्ट्रेट के सामने कथित पीड़ितों के बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि “हमारे बयान (धारा) 164 के तहत दर्ज नहीं किए गए हैं और हम इसका इंतजार कर रहे हैं। पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए एक समय सीमा दी गई है कि बयान दर्ज किए जाएं। मेरा अनुरोध है कि हम जल्द से जल्द बयान दर्ज करायें, क्योंकि तभी मामला आगे बढ़ सकता है।”

वहीं दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को इस मामले में दिल्ली पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें प्रदर्शनकारी पहलवानों ने जांच की निगरानी करने और पीड़ितों के कोर्ट के सामने बयान दर्ज करने की मांग की थी। कोर्ट ने पुलिस को 12 मई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। 12 मई को मामले की सुनवाई होनी है। 

बुधवार को, साक्षी मलिक ने कहा कि वे नार्को टेस्ट के लिए तैयार हैं, और उन्होंने बृज भूषण को भी नार्को टेस्ट की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि “मैं डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष को नार्को टेस्ट देने की चुनौती देती हूं। हम भी परीक्षा देने को तैयार हैं। सच्चाई को सबके सामने आने दीजिए, कौन अपराधी है और कौन नहीं।” पुलिस जांच में देरी का आरोप लगाते हुए, जंतर-मंतर पर विरोध करने वाले पहलवानों ने अपने विरोध को चिह्नित करने के लिए काली पट्टी बांधने का फैसला किया है।

इससे पहले 21 अप्रैल को, नाबालिग सहित सात महिला पहलवानों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृज भूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी की अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। पुलिस की तरफ से एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करनी पड़ी थी। जिसके बाद पुलिस ने POCSO अधिनियम के तहत, और दूसरी वयस्क महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर दो प्राथमिकी दर्ज की।

भारत के कुछ शीर्ष पहलवान, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक और विश्व चैम्पियनशिप पदक विजेता विनेश फोगट शामिल हैं, 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि बृजभूषण की गिरफ्तारी के बाद ही वे अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करेंगे।

( कुमुद प्रसाद जनचौक की सब एडिटर हैं।)

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