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पीएम केयर्स फंड की राशि को एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को नोटिस

उच्चतम न्यायालय में बुधवार 17 जून को एक बार फिर हाईप्रोफाइल बहस हुई जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और  सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता आमने सामने आ गये और उच्चतम न्यायालय ने तुषार मेहता की बात को नकारते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके चार सप्ताह में जवाब तलब कर दिया। पीएम केयर्स फंड को एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने की याचिका पर जहां जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम आर शाह की पीठ नोटिस जारी करने के पक्ष में थी वहीं सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता चाहते थे कि उन्हें नोटिस जारी करने के बजाय याचिका की एक प्रति दी जाए, जिसका जवाब सरकार की ओर से दाखिल किया जायेगा। दुष्यंत दवे ने तुषार मेहता के इस अनुरोध पर कड़ी आपत्ति जताई और पीठ से कहा कि इस पर आदेश सॉलिसिटर-जनरल द्वारा तय किया जा रहा है।

पीठ ने जहां तुषार मेहता की बात नहीं मानी वहीं दवे की मेहता सम्बंधी आरोप को खारिज कर दिया और दवे को उसको लेकर फटकार भी लगाई। पीठ ने कहा हमने नोटिस जारी किया है। आप (दवे) कहते हैं कि हम सॉलिसिटर-जनरल को सुनते हैं, फिर तुषार मेहता कहते हैं कि हम आपको सुनते हैं। आप कैसे कह सकते हैं कि हम आपको नहीं सुन रहे हैं? हम नोटिस जारी करना उचित समझते हैं, इसलिए हम नोटिस जारी कर रहे हैं।

उच्चतम न्यायालय  ने उस जनहित याचिका में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें पीएम केयर्स फंड्स जिसे कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए स्थापित किया गया है, से सभी फंड राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) में ट्रांसफर करने की मांग की गई है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने मामले की सुनवाई की, केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और केंद्र को 4 सप्ताह की अवधि में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की ओर से वकील प्रशांत भूषण द्वारा दायर याचिका में धारा 11 के तहत एक राष्ट्रीय योजना की स्थापना के लिए, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 10 के साथ पढ़ने के लिए अनुरोध किया गया है, जिससे वर्तमान महामारी से निपटा जा सके और डीएम की धारा 12 के तहत राहत के न्यूनतम मानकों को पूरा किया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र को डीएमए अधिनियम की धारा 46 के अनुपालन में कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में व्यक्तियों से सभी योगदान या अनुदान सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से एनडीआरएफ का उपयोग करने के लिए निर्देशित किया जा सकता है और एनडीआरएफ की धारा 46 (1) (बी) के तहत पीएम केयर्स फंड्स को उसमें क्रेडिट किया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि अब तक पीएम केयर्स फंड्स में एकत्रित सभी फंड को एनडीआरएफ में हस्तांतरित करने का निर्देश दिया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि स्वास्थ्य संकट के बावजूद एनडीआरएफ का उपयोग अधिकारियों द्वारा नहीं किया जा रहा है, और पीएम केयर्स फंड्स की स्थापना डीएम अधिनियम के दायरे से बाहर है। इसमें पीएम केयर्स फंड्स के संबंध में पारदर्शिता की कमी के मुद्दे को उठाया गया है, जिसमें कहा गया है कि यह कैग ऑडिट के अधीन नहीं है और इसे “सार्वजनिक प्राधिकरण” की परिभाषा के तहत आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर घोषित किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह उल्लेख करना उचित है कि डीएम अधिनियम की धारा 72 में यह प्रावधान है कि डीएम अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे, इसके अलावा किसी भी अन्य कानून में निहित कोई भी असंगत प्रावधान लागू नहीं होंगे। उपरोक्त प्रस्तुतियों के आलोक में, पीएम केयर्स फंड्स को एनडीआरएफ को हस्तांतरित करने के लिए अनुरोध किया गया है ताकि आपदा प्रबन्धन अधिनियम (डीएमए) 2005 के वैधानिक प्रावधानों का पालन किया जा सके।

बुधवार को सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने पीठ को यह बताया कि मामला प्रतिकूल नहीं है, वे सरकार के खिलाफ नहीं हैं बल्कि केवल उनकी सहायता के लिए मांग कर रहे हैं। दवे ने कहा कि जनादेश को सरकार ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। राष्ट्र पीड़ित है। उच्चतम न्यायालय के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इस पर जस्टिस भूषण ने जवाब दिया कि राष्ट्रीय योजना के मुद्दे और डीएमए की धारा 12 के तहत राहत के न्यूनतम मानकों पर पहले से ही तर्क दिए गए थे और प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं और दुखों के बारे में स्वत: संज्ञान में दलीलों को सुना गया था। एकमात्र मुद्दा जो बना हुआ है वह है पीएम केयर्स फ़ंड के बारे में प्रार्थना। हम टैग कर सकते हैं स्वत: संज्ञान केस के साथ।

हालांकि, दवे ने जोर देकर कहा कि तत्काल याचिका को अलग से लिया जाना चाहिए और स्वत: संज्ञान मामले में नहीं चलाया जाना चाहिए। जस्टिस कौल ने इस स्तर पर अंतरिम आदेश पारित करने में कठिनाई व्यक्त की, उन्होंने कहा कि पीठ  नोटिस जारी करने के लिए तैयार है।

याचिका में कहा गया है कि चूंकि पीएम केयर्स फंड की कार्यप्रणाली अपारदर्शी है और इसे आरटीआई एक्ट के दायरे से भी बाहर रखा गया है, इसलिए इसमें प्राप्त धनराशि को एनडीआरएफ में ट्रांसफर किया जाए, जिस पर आरटीआई एक्ट भी लागू है और इसकी ऑडिटिंग कैग करता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वे नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) की धनराशि को कोविड-19 वायरस से लड़ने के लिए सहायता प्रदान करने में खर्च करें और एक्ट की धारा 46(1)(बी) के तहत व्यक्तियों या संस्थाओं से प्राप्त हुए सभी तरह के अनुदान/ग्रांट को एनडीआरएफ में जमा किया जाए, न कि पीएम केयर्स फंड में।

याचिकाकर्ता ने मांग की कि अब तक पीएम केयर्स फंड में प्राप्त अनुदान को एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में ये दलील दी गई है कि प्रशासन एनडीआरएफ का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर रहा है, जबकि देश अप्रत्याशित महामारी का सामना कर रहा है। इसके अलावा जनता एवं संस्थाओं से अनुदान प्राप्त करने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत बने एनडीआरएफ के होते हुए सरकार ने पीएम केयर्स फंड का गठन किया है, जो कि संसद से पारित एक्ट की मूल भावना का उल्लंघन है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on June 18, 2020 7:43 am

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