Sunday, May 22, 2022

आंगनबाड़ी, शिक्षा मित्र और स्कीम वर्करों से डर गई योगी सरकार, हटाया गया चुनावी ड्यूटी से

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लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में उत्तर प्रदेश की आंगनबाड़ी वर्कर, शिक्षामित्र, रोजगार सहायक,अनुदेशकों व अन्य स्कीम वर्कर को चुनावी ड्यूटी से राहत दी गई है। इस सिलसिले में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग के विशेष कार्य अधिकारी रमेश चंद्र राय ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को लिखा है कि विधानसभा चुनाव में शिक्षा मित्र, रोजगार सहायक, अनुदेशक, आंगनबाड़ी कर्मी व अन्य समकक्ष को मतदान कर्मी के रूप में तैनात करने के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग ने निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि ऐसे कार्मिकों की ड्यूटी जिलों में केवल उसी स्थिति में लगाई जाएगी जब जिले की ओर से यह प्रमाणित किया जाए कि मंडलीय पूल से मिले नियमित सरकारी कार्मिकों को पूरी तरह से लगा दिया गया है।

जहां तक संभव हो उक्त कार्मिकों को आरक्षित पूल में रखा जाए। जरूरत पड़ने पर शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी द्वितीय व आंगनबाड़ी वर्कर एवं अन्य कार्मिकों को मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में रिजर्व रखा जाएगा। जानकारी मिली है उत्तर प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि इन कार्मिकों को चुनाव ड्यूटी में ना लगाया जाए। इस समय सरकारी कर्मचारियों की संख्या इतनी कम है कि बगैर स्कीम वर्कर के सहयोग से चुनाव कार्य संपन्न नहीं कराया जा सकता इसीलिए इनको रिजर्व में रखने के लिए निर्देश दिया गया है।

भाजपा ने अपने 2017 के चुनाव घोषणा पत्र में सरकार बनने के 120 दिनों के अंदर इनकी मांगें माने जाने की घोषणा की थी। यही नहीं मोहन लाल गंज से सांसद और अब राज्य मंत्री कौशल किशोर ने इन वर्कर की अधिकारिक रैली लखनऊ में आयोजित की थी जिसमें बीजेपी के कई सांसद और अमित शाह, राजनाथ सिंह, और अन्य भाजपा नेताओं ने सरकार बनते ही इनकी समस्याओं के हल का वादा जोर शोर से किया था। अब तो 5 साल बीत रहे हैं पर सरकार ने इनकी कोई खबर नहीं ली। यही नहीं इनके आंदोलन को दबाने के लिए कई तरह से उत्पीड़न भी किया गया। पर यह सभी वर्कर लगातार संघर्ष कर हैं। इनके संघर्ष का दबाव है कि सरकार ने चुनाव आयोग से इनकी ड्यूटी ना लगाने का अनुरोध किया है । ज्ञातव्य हो की आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर ने प्रदेश भर के अंदर बूथ लेवल अधिकारी का कार्य बहुत कुशलता के साथ किया है।

इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू की प्रदेश उपाध्यक्ष डा. वीना गुप्ता ने कहा कि आदेशानुसार शिक्षा मित्र, आंगनबाड़ी वर्कर एवं अन्य को चुनाव ड्यूटी में तो बुलाया जाएगा लेकिन भुगतान तभी किया जाएगा जब वे ड्यूटी करेंगे। तमाम मुश्किल का सामना करते हुए ये वर्कर ड्यूटी पर पहुंचेंगे तो और ड्यूटी पर ना होते हुए भी पूरा दिन वहां बैठकर खाली हाथ वापस आएंगे। यह इन वर्कर का शोषण है उनको एक दिन का कम से कम 1000 रुपए का भुगतान किया जाना चाहिए।

हम आपको बता दें कि प्रदेश में बहुत सी स्कीम चल रही हैं, जिनमें हजारों वर्कर मानदेय के आधार पर काम कर रहे हैं। आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर, शिक्षामित्र, रसोईया, आशा वर्कर, आजीविका मिशन में काम कर रही समूह सखी, बैंक मित्र एवं अन्य बहुत सी स्कीमों में मित्र या सहायक के नाम से काम कर रहे वर्कर्स की तादाद हजारों में है। इन सभी को मानदेय के नाम पर बहुत कम पैसा देकर पूरा काम कराया जाता है। इनमें से किसी भी वर्कर को न तो न्यूनतम वेतन मिलता है और न ही किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा जैसे फंड, पेंशन, चिकित्सा सहायता, मेडिकल लीव, केजुअल लीव आदि। ये वर्कर लगातार सभी सरकारी कार्य करते हैं। आंगनबाड़ी वर्कर ने बूथ लेवल अधिकारी के रूप में एवं पिछले चुनाव में और पंचायत चुनावों में बहुत सफलता के साथ काम किया है।

स्कीम वर्कर को चुनाव ड्यूटी ना किए जाने के आदेश से यह तो स्पष्ट है कि योगी सरकार जानती है कि उन्होंने 2017 के चुनाव में स्कीम वर्कर का सहयोग लिया और चुनाव के बाद उन्हें भूल गए और उनके लिए कुछ नहीं किया।

योगी सरकार चाहे कितना भी आत्मविश्वास दिखाने का प्रयास करे लेकिन स्कीम वर्कर को चुनाव ड्यूटी से अलग करने का यह प्रयास उनकी घबराहट दिखाता है।

 (लखनऊ से अरूणिमा प्रियदर्शी की रिपोर्ट।)

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