Sunday, October 17, 2021

Add News

1000 बनाम 7000 बनाम 1500000!

ज़रूर पढ़े

सबसे पहले आपके सामने कुछ तथ्य रखते हैं जो भारत से ही संबंधित हैं।

-1000 तबलीगी जमात के लोग बाहर से आए। मरकज़ में जमावड़ा कुल ढाई से लेकर तीन हज़ार लोगों का था। लिहाज़ा इसमें बाहर से आने वालों की संख्या कम हो सकती है फिर भी हमने उसे अधिक से अधिक बढ़ाकर पेश करने की कोशिश की है।

-भारत में फंसे ईरान, फ़्रांस और ब्रिटेन के क्रमश: 900, 2200 और 5000 नागरिकों को विमानों के ज़रिये धीरे-धीरे निकाला जा रहा है। और इंडियन एक्सप्रेस की आज की रिपोर्ट के मुताबिक़ आजतक उन्हें बाहर यानी उनके अंशों में पहुँचा दिया जाएगा। आपको बता दें कि यह तीनों सर्वाधिक कोरोना प्रभावित देश हैं।

-कुवैत में कुल 1658 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में 924 भारतीय हैं यानी आधे से भी ज्यादा। और उन सभी का अच्छे से अच्छा अस्पतालों में इलाज चल रहा है और कहीं किसी हिस्से से उनके बाहरी होने या फिर देश में कोरोना फैलाने का आरोप नहीं लग रहा है।

कल शाम की रोज़ाना की प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता लव कुमार ने ज़रूरत न होने के बावजूद यह बताया कि कोरोना पीड़ितों में 30 फ़ीसदी हिस्सा मरकज़ से जुड़ा हुआ है। हालाँकि इसके पहले ग़ैर आधिकारिक तौर पर यूपी से लेकर तमाम सूबों ख़ासकर बीजेपी शासित राज्यों और तक़रीबन पूरे मीडिया में कोरोना के आँकड़ों की छानबीन तबलीगी बनाम अन्य के पैमाने पर की जा रही थी। कहीं किसी मरीज़ के मिलने पर सबसे पहले उसके तबलीगी से जुड़ाव का परीक्षण किया जाता था। 

और इस तरह से पूरे देशवासियों के ज़ेहन में तबलीगी-तबलीगी भर दिया गया। और फिर उसी कड़ी में मीडिया, सरकार और जनता के स्तर पर पूरे कोरोना को तबलीगी बनाम अन्य के नरेटिव में बांध दिया गया। इस पर बाद में बात करेंगे कि क्या कोई एक सेकुलर, लोकतांत्रिक संवैधानिक सरकार इन टर्मों में बात कर सकती है?

लेकिन उससे पहले ग़लत आंकड़ों की ज़मीन पर खड़े किए गए झूठ इस महल पर बात करते हैं। अगर देश में कोरोना फैलाने के लिए 1000 तबलीगी सबसे बड़े माध्यम बने। तो क्या फ़्रांस और ब्रिटेन से उससे ज़्यादा संख्या में आए नागरिकों के बारे में यह पता नहीं किया जाना चाहिए कि आख़िर इसमें उनकी क्या भूमिका रही? या तो सरकार ने मान लिया है कि उनका योगदान शून्य रहा है। या फिर उस पर किसी भी रूप में वह कोई चर्चा नहीं करना चाहती है। 

अगर ईरान को छोड़ दिया जाए जो इनके पैमाने पर तबलीगी दायरे में आ सकता है, तो फ़्रांस और ब्रिटेन के 2200 और 5000 को मिलाने पर यह संख्या 7000 के ऊपर चली जाती है यानी तबलीगियों की संख्या का सात गुना। और चूँकि ये सभी कोरोना प्रभावित देशों से आए थे इसलिए इनमें पॉज़िटिव होने की आशंका किसी भी दूसरे देश ज़्यादा है। कोरोना प्रभावित सूबों दिल्ली और महाराष्ट्र में इनके आवाजाही की संभावना भी किसी और से ज्यादा है। लेकिन इस पूरे मसले पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है। उसने कभी इन देशों या फिर उनके नागरिकों का नाम तक नहीं लिया। और न ही यह बताना ज़रूरी समझा कि इस दौरान बाहर से कितने विदेशी आए और कहां कितना दिन और कब तक रुके।

इसके साथ ही उसने बाहर से आए अपने 15 लाख देशवासियों को भी उसने कभी उस सघन जाँच का हिस्सा नहीं बनाया जितनी लगन और ताक़त के साथ उसने तबलीगियों की खोजबीन और उनकी टेस्टिंग की। और फिर देशभर में इस तरह का माहौल बना दिया जैसे देश में कोरोना फैलाने के लिए अकेले तबलीगी ही ज़िम्मेदार हैं। और बाद में उसका विस्तार मुसलमानों तक कर दिया गया। और फिर एक चरण ऐसा आया जब सारे तबलीगी मुसलमान हो गए और सारे मुसलमान तबलीगी में बदल गए।

और कल की प्रेस कांफ्रेंस के बाद इस पैमाने ने आधिकारिक मापदंड हासिल कर लिया जिसमें लव कुमार ने कहा कि अभी तक आए आँकड़ों में तक़रीबन 30 फ़ीसदी मरकज़ से हैं। वैसे भी अगर सामान्य रूप से आबादी के हिसाब से भी विभिन्न समुदायों के बीच का कोई आँकड़ा निकाला जाए तो इस हिस्से का संक्रमण इसी के आस-पास हो सकता है।

लेकिन लव कुमार ने यह नहीं बताया कि यह सिर्फ़ मरकज़ वालों से जुड़ा संक्रमण है या फिर अन्य संक्रमित मुसलमान भी इसमें शामिल हैं। और अगर नहीं शामिल हैं फिर तो यह आँकड़ा 30 फ़ीसदी के पार चला जाएगा। और अगर आते हैं तो लव कुमार मुसलमानों के ख़िलाफ़ की गयी उसी साज़िश को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें सभी मुसलमानों को तबलीगी के तौर पर पेश किया जा रहा है।

जिसका नतीजा यह है कि हर मुसलमान को संदेह की नज़रों से देखा जाने लगा है। लेकिन एकबारगी हमारे हुक्मरानों और उनके कर्ताधर्ताओं को यह बात ज़रूर सोचनी चाहिए कि वह एक सभ्य और आधुनिक देश की मशीनरी की तरह व्यवहार नहीं कर रहे हैं और एक समुदाय को निशाना बनाकर न केवल उसका अपमान कर रहे हैं बल्कि उसके नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी कर रहे हैं। यह काम अगर एक घोषित और स्थापित सेकुलर निज़ाम में हो रहा है तो समझा जा सकता है कि उसके हिंदू राष्ट्र बनने पर तस्वीर क्या होगी?

लेकिन सभ्यता के इन दुश्मनों को एकबारगी ज़रूर सोचना चाहिए कि अगर कुवैत भी इन्हीं के अंदाज में काम करना शुरू कर दे तो उसके पास तो बेहद आसान तरीक़ा है। देश की आधी से ज्यादा कोरोना पाजिटिव आबादी भारतीयों की है। और वह इस बात को डंके की चोट पर कह सकता है कि देश में कोरोना फैलाने के लिए वही हिस्सा मुख्य तौर पर ज़िम्मेदार है। लेकिन क्या कुवैत ऐसा कर रहा है? नहीं।

वह न केवल अच्छे से अच्छा अस्पतालों में इलाज करवा रहा है बल्कि हर तरीक़े से उनका ख़्याल रख रहा है। जबकि कुवैत एक इस्लामी देश है। वहाँ किसी तरह का लोकतंत्र भी नहीं है। और न ही इस तरह की किसी आधुनिक सेकुलर व्यवस्था के प्रति उसकी कोई जवाबदेही है। फिर भी वह इस तरह के किसी मध्ययुगीन बर्बर व्यवस्था से जुड़े हिंदू-मुस्लिम या नस्लीय भेदभाव के नरेटिव का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।

और भारत क्या कर रहा है? अपने ही नागरिकों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव कर रहा है। यहाँ तक कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई नागरिकों को अस्पतालों में प्रवेश की इजाज़त तक नहीं दी गयी। कई महिलाओं और बच्चों को अस्पतालों से उलटे पाँव लौटा दिया गया। जिसके चलते बहुत सारे लोगों को समय पर इलाज न मिलने के चलते अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यह अमानवीय त्रासदी उस क्षेत्र में है जहां इस तरह के किसी भेदभाव को न केवल मानवता विरोधी माना जाता है बल्कि पेशेवाराना तौर पर भी चिकित्सकों के लिए अनैतिक है।
(लेखक महेंद्र मिश्र जनचौक के संपादक हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

सीपी कमेंट्री: संघ के सिर चढ़कर बोलता अल्पसंख्यकों की आबादी के भूत का सच!

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का स्वघोषित मूल संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.