अमेरिका ने कोरोना की दवा का तीन महीने का पूरा स्टॉक खरीदा, किसी अन्य देश को नहीं मिल पाएगी रेमडेस्विर

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नई दिल्ली। वैसे तो सारे विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 से निपटने का अंतिम उपाय वैक्सीन है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ऐसी दवाओं की खोज भी की जा रही थी और अभी भी की जा रही है, जो आंशिक तौर पर ही सही कोविड-19 के इलाज में मदद कर सकें। विश्व स्तर पर अभी तक ऐसी दो दवाओं- रेमडेस्विर और फेविपिराविर परीक्षणों में एक हद तक सफल पाई गई हैं।

ये दोनों दवाएं एंटीवाइरल दवाएं हैं। ये दोनों दवाएं कोविड-19 के इलाज के लिए परीक्षणों में कारगर साबित हुई हैं। हल्के लक्षणों वाले मरीजों को ये जल्दी कोरोना के संक्रमण से मुक्त कर सकती हैं, संक्रमित व्यक्तियों को गंभीर हालत में पहुंचने की स्थिति में सुधार कर सकती हैं। कम शब्दों में कहें तो कोरोना के इलाज में ये दोनों दवाएं आंशिक तौर पर कारगर हैं।

लेकिन इन दवाओं के इनके निर्माण की प्रक्रिया शुरू होते ही ‘द गार्जियन’ अखबार (1 जुलाई) की खबर के अनुसार अमेरिका ने इन दो दवाओं में से एक दवा रेमडेस्विर का तीन महीनों-जुलाई, अगस्त और सितंबर का पूरा स्टॉक खरीद लिया है। इसका निहितार्थ यह है कि सितंबर तक अमेरिका के अलावा किसी भी देश के नागरिकों को ये दवा उपलब्ध नहीं हो सकती है। वे चाहे यूरोपीय देश हों या दुनिया के अन्य देश। लिवरपूल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ विजिटिंग शोधकर्ता एंड्र्यू हील का कहना है कि “उन्होंने (अमेरिका ने) रेमडिस्विर की अधिकांश दवा आपूर्ति को अपने अधीन कर लिया है, इसके चलते यूरोप के लिए कुछ भी नहीं बचता है।”

रेमडेस्विर पहली दवा है, जिसे अमेरिका में कोविड़-19 के शिकार मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत मिली है। इसे जिलीड कंपनी ने तैयार किया है। परीक्षणों में यह पाया गया है कि इस दवा से मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं। इस दवा को पहले 140,000 डोज ट्रॉयल के लिए दुनिया भर में सप्लाई किए गए और इसे ट्रॉयल में एक हद तक सफल पाया गया। ट्रंप प्रशासन ने इसके 5 लाख डोज खरीद लिए हैं। यह डोज जिलीड कंपनी के जुलाई के पूरे उत्पादन और अगस्त-सितंबर के 90 प्रतिशत उत्पादन के बराबर है।

अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानवीय सेवा सचिव एलेक्स एजार ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के लोगों को सबसे पहले कोविड-19 की दवा मिल सके इसके लिए एक बेहतरीन समझौता किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के हर व्यक्ति को सबसे पहले दवा मिल सके, इसके लिए ट्रम्प प्रशासन हर उपाय कर रहा है और करेगा। अमेरिका ने पहले ही यह संकेत दे दिया था कि वह कोविड-19 के इलाज से जुड़े उपकरणों एवं दवाओं की दुनिया भर से आपूर्ति के लिए हर तरह के हथकंड़े अपनाएगा। इसका सबूत उसने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की आपूर्ति के लिए भारत को धमकी देकर दे दिया था। 

अमेरिका ने कोविड-19 के संक्रमण के इलाज में अन्य कारगर दवाओं और भविष्य में तैयार होने वाली वैक्सीन पर सबसे पहले अपना नियंत्रण कायम करने के लिए तेजी से प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। फ्रांस की एक वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने साफ-साफ कहा है कि यदि वह वैक्सीन बनाने में सफल होती है, तो वह सबसे पहले उसकी आपूर्ति अमेरिका को करेगी।

वैश्विक महामारी कोरोना अब तक विश्व भर में 1 करोड़ से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुकी है और 5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और विशेषज्ञों का एक स्वर से कहना है कि यह एक वैश्विक महामारी है और इसका सामना पूरा विश्व मिलकर एक साथ कर सकता है। लेकिन हो रहा है इसका उलटा। महामारी के वैश्विक प्रसार के साथ ही, पूंजी के ग्लोबलाइजेशन के लिए गढ़ी गई ‘ग्लोबल विलेज’ की सारी थियरी को उठाकर फेंक दिया गया है और यह कार्य सबसे आगे बढ़-चढ़कर अमेरिका कर रहा है, जिसने दुनिया को ग्लोबल गांव बनाने के नाम पर ग्लोबलाइजेशन की अगुवाई की थी। 

 दवा के तीन महीने के पूरे स्टॉक पर कब्जा करने की ट्रम्प की आपाधापी का सबसे बड़ा कारण नवंबर में होने वाला राष्ट्रपति का चुनाव है। अमेरिका में हुए अभी तक के सारे सर्वे बता रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन से काफी पीछे चल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कोविड-19 से निपटने में उनकी नाकामयाबी है, जिसके लिए उनके मूर्खतापूर्ण निर्णय एवं हरकतें सबसे अधिक जिम्मेदार हैं। अमेरिका में अब 25 लाख 42 हजार 165 से अधिक लोग कोविड-19 का शिकार हो चुके हैं।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में कम से कम 2 करोड़ लोग इसके शिकार हो चुके हैं, यानि आधिकारिक आंकड़ों से 10 गुना अधिक। 1 लाख 25 हजार 747 लोगों की मौत हो चुकी है, जो विश्व भर में हुई कुल मौतों का करीब 25 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका की आबादी विश्व की आबादी का सिर्फ 4.25 प्रतिशत है। आजकल प्रतिदिन करीब 40,000 नए मामले सामने आ रहे हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के शिकार होने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन 1 लाख तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञ इतनी बदतर स्थिति के लिए डोनाल्ड ट्रम्प को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

डोनाल्ड ट्रम्प अगला राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए वह सब कुछ कर रहे हैं, जो वे कर सकते हैं। इसी की एक कड़ी रेमडेस्विर की दवा के सारे स्टॉक को खरीदने का निर्णय भी है, ताकि कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष में अपनी असफलता को छिपा सकें, लेकिन यह दुनिया के अन्य देशों एवं समग्र मानव जाति के लिए खतरनाक संकेत है।

(जनचौक के सलाहकार संपादक डॉ. सिद्धार्थ की रिपोर्ट।)

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