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Friday, September 24, 2021

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अर्णब चैटगेटः सरकार और न्यायपालिका में छाया चिरपरिचित सन्नाटा

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अब तो यह बात भी खुलकर सामने आ गई कि मोदी सरकार और रिपब्लिक चैनल में गहरी सांठगांठ है और टीआरपी घोटाले में गोस्वामी पर सरकार का वरदहस्त था। दरअसल रिपब्लिक टीवी को प्रसार भारती के स्वामित्व वाले डायरेक्ट-टू-होम सेवा, डीडी फ्री डिश पर गैर कानूनी रूप से प्रसारित किया गया है। रिपब्लिक टीवी ने बिना ऑक्शन प्रॉसेस में शामिल हुए डीडी फ्री डिश सर्विस के सभी यूजर्स के लिए एक बैंडविड्थ पर एक अनएन्क्रिप्टेड रूप में दो वर्षों तक ब्रॉडकास्ट किया गया, जबकि ऑक्शन के प्रॉसेस से गुजरने पर चैनल को सालाना 8-12 करोड़ रुपये की कैरिज फीस देनी होती है। यही नहीं अर्णब के लीक व्हाट्सएप चैट में जजों को खरीदने की बातचीत भी सामने आई है और सरकार तथा न्यायपालिका ने इस खुलासे पर रहस्यमय चुप्पी ओढ़ रखी है।

प्रसार भारती के स्वामित्व वाले डायरेक्ट-टू-होम सेवा, डीडी फ्री डिश पर गैर कानूनी रूप से प्रसारित करने के मामले में रिपब्लिक टीवी ने अनुचित रूप से फायदा उठाने के साथ ही सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंचाया। प्रतियोगी चैनलों की तरफ से इस बात को दो साल पहले ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय के ध्यान में लाया गया था। साथ ही इसकी शिकायत प्रसार भारती को भेज दी गई थी, लेकिन यह प्रैक्टिस सितंबर 2019 तक जारी रही, इस पूरे घोटाले में सरकारी खजाने को 25 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया है।

गिरीश मालवीय के फेसबुक वाल के अनुसार यह चैनल मूल रूप से राजीव चंद्रशेखर ने शुरू किया था, जो वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। राजीव चंद्रशेखर जब भाजपा से 2018 में सांसद चुन लिए गए तो उन्होंने कहा, “2006 से मैं निर्दलीय सांसद के रूप में सार्वजनिक जीवन में था, चूंकि अब मैं भाजपा का सदस्‍य हूं तो मुझे लगता है कि यह रिपब्लिक टीवी के ब्रांड और टीम के लिए सही नहीं होगा कि मैं बोर्ड में रहूं।” इसके बाद ही रिपब्लिक भारत में सारी हिस्सेदारी अर्णब गोस्वामी को दे दी गई।

दरअसल रिपब्लिक के मुख्य निवेशकर्ता राजीव चंद्रशेखर पहली बार 2006 में कर्नाटक से राज्यसभा के लिए चुने गए। चन्द्रशेखर की एशियानेट न्यूज नेटवर्क, स्वर्णा न्यूज और कन्नड़ अखबार प्रभा में अच्छी होर्डिंग्स है। दिलचस्प बात यह है कि राजीव चन्द्रशेखर ने जुपिटर कैपिटल में भारी निवेश कर रखा है, जो कि डिफेंस सेक्टर की प्रमुख कंपनी है। यह कंपनी भारतीय सेनाओं को ट्रेनिंग के अनेक उपकरण सप्लाई करती है। जुपिटर कैपिटल को ही पिछले वर्ष भारतीय थल सेना और वायु सेना में ट्रेनिंग के उपकरणों का एक बड़ा ठेका मिला था।

वैसे चैनल जब शुरू हुआ तो राजीव चंद्रशेखर की कंपनी जुपिटर कैपिटल के सीईओ अमित गुप्ता ने एडिटोरियल को मेल लिखा कि कंटेंट प्रो मिलिट्री होना चाहिए। जुपिटर कैपिटल को मिलिट्री के ठेके चाहिए और बीजेपी को रिपब्लिक से उग्र कट्टर राष्ट्रवाद और दक्षिणपंथी विचारधारा वाला कंटेंट, दोनों एक दूसरे की पूर्ति कर रहे हैं। इसके लिए ही रिपब्लिक चैनल की टीआरपी बढ़ाने के मोदी सरकार ने हर संभव प्रयास किए, चाहे सरकारी खजाने का कितना ही नुकसान क्यों न पहुंचे।

रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी और न्यूज़ चैनलों की टीआरपी रेटिंग देने वाली एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के बीच की जो कथित वॉट्सऐप चैट लीक हुई है, उसमें ताज़ा खुलासा यह है कि दोनों के बीच की इस कथित चैट में किसी जज को ख़रीदने की बात हो रही है, और अर्णब ने बातचीत के दौरान इसका विरोध भी नहीं किया है। पार्थो कहते हैं जज को ख़रीद लो। इस पर अर्णब कहते हैं कि नोट में सिर्फ़ एक लाइन लिखने की ज़रूरत है। ये साफ नहीं है कि अर्णब और दासगुप्ता किस मामले को लेकर बात कर रहे हैं। इन कथित चैट्स को लेकर जबरदस्त बवाल के बाद भी अर्णब ने इनके उनके होने से इनकार नहीं किया है।

लीक हुई चैट अर्णब गोस्वामी और पार्थो दासगुप्ता के बीच हुई बातचीत में पीएमओ, रजत, एएस, प्रकाश जावड़ेकर जैसे नाम सामने आए हैं। यह कथित चैट एक हज़ार पन्नों की बताई जा रही है। लीक हुई इस वाट्सऐप चैट में अर्णब गोस्वामी कथित तौर पर पार्थो से कुछ बातों को पीएमओ के साथ साझा करने और सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को ‘किसी काम का नहीं’ बताने की बात कहते हैं। अर्णब के कथित चैट को लेकर विपक्षी दलों ने इसकी जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग केंद्र सरकार से की है।

मीडिया जगत से जुड़े वरिष्ठ पत्रकारों के बारे में अर्णब क्या राय रखते रहे, उसका खुलासा भी उन चैट में हुआ है। उनकी वाट्सऐप चैट में रजत शर्मा, नविका कुमार, राहुल शिवशंकर से लेकर राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोष और अरुणपुरी का भी नाम आता है।

न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में रजत शर्मा की नियुक्ति पर दासगुप्ता ने गोस्वामी से कहा, “तो मोटाभाई का प्रभाव यहां काम नहीं आया, रजत को एनबीए प्रमुख के रूप में चुना गया।” पार्थो कहते हैं कि कुछ लोगों को लगता है कि आईबीएफ़ में वह अभी भी ताक़तवर हैं। इस पर अर्णब कहते हैं, “इसके बाद उन्हें पता चलेगा। उन्होंने घोषणा की है कि वह बीसीसीआई को नियंत्रण में लेंगे। अब वह पूरी तरह मूर्ख जान पड़ते हैं।” एक चैट में अर्णब कहते हैं कि उनके (रजत शर्मा) और उनके घटिया चैनल के बारे में चिंता नहीं करें।

फ़रवरी 2017 में एक वाट्सऐप चैट में अर्णब गोस्वामी टाइम्स नाउ की एंकर नविका कुमार को लेकर एक टिप्पणी की है। इसमें अर्णब कहते हैं कि कल लाइव इंटरव्यू में अमित शाह ने नविका को कचरा बोला। एक चैट में उन्होंने टाइम्स नाउ के ही एंकर राहुल शिवशंकर के बारे में एक अपशब्द कहा और इंडिया टुडे के अरुणपुरी पर ‘कांग्रेस प्रोपगंडा मशीन का एक हिस्सा’ के रूप में टिप्पणी की।

सितंबर 2017 की एक चैट में पार्थो पूछते हैं कि राजदीप को क्या हुआ? वह अचानक आपके पीछे हाथ धोकर क्यों पड़े हैं? इस पर अर्णब कहते हैं कि मुझे लगता है कि उनकी नौकरी जा रही है। यही बात इंडिया टुडे में लोग कह रहे हैं। इसके बाद अर्णब कहते हैं कि उन्होंने मुझे सागरिका को एंकर के तौर पर नियुक्त करने के लिए कहा था। मैं वह नहीं कर सकता।

इस बीच मुंबई सेशंस कोर्ट ने बुधवार को टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट्स स्कैम (टीआरपी स्कैम) से जुड़े एक मामले में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्थो दासगुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी। टीएसपी घोटाले में शामिल होने के आरोप में दासगुप्ता को 24 दिसंबर को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह 31 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में था, जिसके बाद उसे दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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