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Categories: बीच बहस

कोर्ट चाहिए वर्चुअल, कैबिनेट मीटिंग डिजिटल लेकिन परीक्षा होगी फिजिकल!

इंजीनियरिंग और मेडिकल की देशव्यापी प्रवेश परीक्षा के लिए सरकार ने कमर कस ली है। वहीं तमाम छात्र संगठनों के छात्र और विरोधी राजनीतिक दल सरकार के इस असंवेदनशील और गैर जिम्मेदाराना कदम का विरोध करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। इस नारे के साथ कि ‘जान के बदले एग्जाम नहीं चलेगा नहीं चलेगा’।

इससे पहले बीएड परीक्षा और बीएचयू में प्रवेश परीक्षा को लेकर भी छात्रों ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया था। सुप्रीम कोर्ट को छात्रों की जान से ज़्यादा उनके भविष्य की फिक्र है। कोरोना काल में जब सब कुछ बंद और छिन्न भिन्न है, कई छात्रों के सेंटर उनके घर से 300-500 किलोमीटर दूर हैं।

“कोरोना काल में जब हर व्यक्ति संदिग्ध है, ऐसे में छात्रों को दूसरे शहरों में ठहरने के लिए कमरा कहां मिलेगा?” पूछते हैं राहुल। राहुल पटेल फूलपुर के रहने वाले हैं। उन्हें भी JEE की परीक्षा देना है। उनका परीक्षा सेंटर प्रयागराज शहर के इंटीरियर इलाके झलवा में है। राहुल के पास अपना कोई निजी साधन नहीं है, न ही शहर में कोई जान पहचान का, जिसके यहां वो जाकर रुक सकें। राहुल बताते हैं उनके ममेरे भाई का परीक्षा केंद्र आगरा में बनाया गया है। उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि इस कोरोनाकाल में आगरा कैसे जाए। कहां किसके यहां रुके।”

ग़ाजियाबाद निवासी NEET कैंडीडेट शिखा कहती हैं, “देश-प्रदेश में कोरोना दिन दूना रात चौगुना रफ्तार से बढ़ रहा है। सरकार कोरोना पर नियंत्रण करने की दिशा में कुछ भी असरदार या प्रभावी जैसा कुछ नहीं कर पा रही है। राज्य में कोरोना के मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। कोरोना के डर से जब न्यायालय बंद है, संसद और विधानसभाएं बंद हैं। स्कूल कॉलेज, यूनिवर्सिटी बंद हैं, तब सरकार परीक्षा आयोजित करके लाखों कैंडिडेट्स की जान जोखिम में क्यों डाल रही है!”

JEE की दौड़ में शामिल कानपुर की मुस्कान कहती हैं, “ये सरकार तो हमेशा डिजिटल-डिजिटल चिल्लाती थी। अब जब कोरोना ने डिजिटल होने का मौका दिया है तो परीक्षा फिजिकल क्यों करवा रहे हैं वो भी साढ़े आठ लाख बच्चों की नहीं साढ़े आठ लाख परिवारों की जिंदगी दांव पर लगाकर? जब न्यायालय डिजिटल हो सकता है, संसद और सरकार डिजिटल हो सकती है तो परीक्षाएं और इंटरव्यू डिजिटल क्यों नहीं हो सकते?”

शिक्षक राजकुमार पांडेय कहते हैं, “जब शिक्षा पर सबका अधिकार है तो प्रवेश परीक्षा जैसी चीजें क्यों? जाहिर है प्रवेश परीक्षा का कांसेप्ट कुछ लोगों को शिक्षा पाने से रोकने के लिए है। विशेषकर उन लोगों को जो सरकार के ‘मार्क्स सिस्टम’ यानि व्यवस्था के ढर्रे में फिट बैठने की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं। कोरोना काल में सरकार को परीक्षा जैसे डरावने और मानसिक टॉर्चर वाले तरीके को हटाकर कुछ सकरात्मक, सृजनात्मक तरीका ढूंढना चाहिए था।”

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था प्रवेश परीक्षा कराने का आदेश
11 राज्यों के 11 छात्रों ने NEET और JEE की प्रवेश परीक्षाएं स्थगित करने के अनुरोध के साथ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 17 अगस्त को परीक्षा न कराने की सभी याचिकाएं खारिज करते हुए जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा था कि कोरोना वायरस के कारण देश में सब-कुछ नहीं रोका जा सकता है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या देश में सब-कुछ रोक दिया जाए? और बच्चों के एक कीमती साल को यूं ही बर्बाद हो जाने दिया जाए?

कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NEA) द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अन्य अभियांत्रिकी संस्थानों में प्रवेश के लिए कराई जाने वाली प्राथमिक संयुक्त प्रवेश परीक्षा मेंस, जिसमें 8,58,273 अभ्यर्थी भाग लेंगे की तारीखें 1-6 सितंबर, 2020 घोषित करने से देश में बहस छिड़ गई है। इसके बाद एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड भी होगी, जिसमें उपर्युक्त अभ्यर्थियों में से चयनित दो से ढाई लाख अभ्यर्थी भाग लेंगे। इसके आधार पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अन्य संस्थानों में दाखिला सुनिश्चित होगा।

विपक्षी दल भी उतरे विरोध में
NEET और JEE की एक सितंबर से आयोजित होने वाली परीक्षा रुकवाने के लिए अब विपक्ष भी लामबंद हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने इसे लेकर एक बैठक भी आयोजित की थी। वहीं, परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र इसके खिलाफ कल से देशव्यापी धरने पर बैठे।

एनडीए की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) भी कोरोना महामारी के बीच परीक्षा कराए जाने के खिलाफ है। पार्टी के नेता चिराग पासवान ने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर परीक्षा टलवाने की मांग की थी। दिल्ली सरकार ने भी सरकार से इस परीक्षा को महामारी के दौरान नहीं करवाने का आग्रह किया है।

भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर ने कोरोना काल में प्रवेश परीक्षा कराने को ‘तानाशाही’ बताया। चंद्रशेखर ने कहा, “सरकार तानाशाही के तरीके पर उतकर NEET और JEE की परीक्षा कराने पर तुली है, जबकि अभी लोगो की जान बचाने की ज़रूरत ज़्यादा है।”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए छात्रों की जान जोखिम में न डालने की अपील की है।

कोरोना काल में NEET और JEE परीक्षा छात्रों की जान जोखिम में डालकर कराने पर अड़ी सरकार के खिलाफ संघर्षरत छात्रों की आवाज बुलंद करने लखनऊ, राजभवन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे समाजवादियों पर पुलिस का लाठीचार्ज CM के आदेश पर अत्याचार है।

अब परीक्षा में भी राष्ट्रवाद
वहीं दूसरी ओर आरएसएस-भाजपा समर्थक लोग परीक्षा में भी राष्ट्रवाद घुसेड़ चुके हैं। भाजपा के टीवी एंकर अमीश देवगन ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “21 साल का युवा सेना के जवान के तौर पर, पुलिसकर्मी के तौर पर कोरोना के बीच देश सेवा में जुटा है, तो क्या 20-21 साल का युवा #JEENEET की परीक्षा नहीं दे सकता?”

केंद्र ने परीक्षा केंद्रों की लिस्ट जारी की
NTA ने साफ किया है कि परीक्षा को और नहीं टाला जा सकता है और NEET और JEE मेन परीक्षा निर्धारित तारीख को ही होगी। इस बीच, JEE और NEET परीक्षाओं के लिए परसों देर रात केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्यवार परीक्षा केंद्रो की लिस्ट भी जारी कर दी है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी लिस्ट में JEE परीक्षा केंद्र को 570 से बढ़ाकर 660 कर दिया गया है, जबकि NEET परीक्षा केंद्र को 2846 से बढ़ाकर 3843 कर दिया गया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on August 28, 2020 2:11 pm

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