Tuesday, September 27, 2022

सुप्रीम कोर्ट जजमेंट के विपरीत कानून नहीं बना सकती सरकार

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आप मानें या न मानें उच्चतम न्यायालय पिछले चार चीफ जस्टिसों, जस्टिस खेहर, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबडे के कार्यकाल का उच्चतम न्यायालय नहीं है। इसे विधिक, न्यायिक और पत्रकारिता के क्षेत्र में दिन प्रतिदिन महसूस किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उच्चतम न्यायालय संविधान के संरक्षक की अपनी भूमिका में वापस लौट आया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जजमेंट के विपरीत सरकार कानून नहीं बना सकती। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि विधायिका किसी भी जजमेंट के आधार पर बदल सकती है यानी कि जजमेंट जिस आधार पर दिया गया है, उस आधार में बदलाव तो हो सकता है। लेकिन उच्चतम न्यायालय के जजमेंट के विपरीत कानून नहीं बना सकती। आप सीधे तौर पर वैसे कानून नहीं बना सकते जो उच्चतम न्यायालय के जजमेंट के खिलाफ हो।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केंद्र ने उसी कानूनी प्रावधान को दोबारा बना दिया जिसे उसने निरस्त कर दिया था। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि इस कोर्ट के जजमेंट का कोई आदर नहीं दिखता है। आप (केंद्र सरकार) हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमना जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की एक विशेष पीठ ने देश भर के ट्रिब्यूनल की वैकेंसी भरने में देरी पर सख्त नाराजगी जताई और केंद्र सरकार से कहा है कि आप हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। पीठ ने कहा कि आपने ट्रिब्यूनल को प्रभावहीन बना दिया है, बार-बार उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद ट्रिब्यूनल की वैकेंसी न भरे जाने पर पीठ ने कहा कि यहां तक कि हमारे पास एक विकल्प है कि ट्रिब्यूनल को बंद कर दें।

चीफ जस्टिस रमना ने सुनवाई के दौरान कहा आपने कितने लोगों की नियुक्ति की है ये बताएं? आपने कहा कि कुछ की नियुक्ति हुई है। आप बताएं कहां है नियुक्ति? आपने पिछली बार कहा था कि कुछ मेबरों की नियुक्ति हुई है। आप बताएं कि कितनों की नियुक्ति हुई। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ट्रिब्यूनल एक्ट 2021 दरअसल उसी कानून का रिपीट (दोहराया जाना) है, जिस कानून को उच्चतम न्यायालय ने अपने जजमेंट में निरस्त कर दिया था।

जस्टिस राव ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि उच्चतम न्यायालय के बार-बार कहने के बावजूद अभी तक नियुक्ति क्यों नहीं की गई। कई ट्रिब्यूनल तो बंद होने के कागार पर हैं। चेयरपर्सन और मेंबर की कमी के कारण ट्रिब्यूनल खत्म हो रहा है। आप बताइये कि आपकी क्या वैकल्पिक स्कीम है? क्या आप ट्रिब्यूनल बंद करना चाहते हैं?

इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के विचार से संबंधित मंत्रालय को अवगत कराएंगे। पीठ ने अगली सुनवाई सोमवार को करने का फैसला किया है। साथ ही पीठ ने कहा है कि वह उम्मीद करता है कि इस दौरान वैकेंसी भरी जाएगी। गौरतलब है कि अभी देश भर के ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल में 250 के करीब वैकेंसी है।

ट्रिब्यूनल रिफॉर्म एक्ट 2021 को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने कहा है जिस कानून को उच्चतम न्यायालय ने निरस्त किया है, वही कानून दोबारा बना दिया गया है। 6 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने अलग-अलग ट्रिब्यूनल में वैकेंसी न भरे जाने के मामले में सख्त नाराजगी जताई थी और कहा था कि यह बेहद खेदजनक मामला है।

रमेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ को बताया कि उन्होंने अधिनियम में प्रावधानों का एक चार्ट तैयार किया है, जो मद्रास बार एसोसिएशन मामले में हटाए गए प्रावधानों का पुन: अधिनियमन है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख किया जो ट्रिब्यूनल सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु योग्यता 50 वर्ष और उनके कार्यकाल को 4 वर्ष के रूप में सीमित करते हैं। मद्रास बार एसोसिएशन मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स ऑर्डिनेंस 2021 में न्यूनतम आयु योग्यता 50 वर्ष से कम कर दी थी और निर्देश दिया था कि नियुक्तियों के लिए 10 साल के अनुभव वाले अधिवक्ताओं पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही उक्त निर्णय में निर्देश दिया गया था कि सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया जाए। हाल के मानसून सत्र में संसद द्वारा पारित ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 ने न्यूनतम आयु योग्यता 50 वर्ष और कार्यकाल का निर्धारण 4 वर्ष के रूप में फिर से शुरू किया है।

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करना होगा

पीठ ने देश भर के ट्रिब्यूनलों में रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सोमवार को केंद्र सरकार से जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करने को कहा, जो अधिनियम के लागू होने के 4 साल बाद भी गठित नहीं हुआ है। जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना की मांग वाली याचिका में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने मौखिक रूप से उनसे कहा: कि सीजीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया गया है। वह भी एक मुद्दा है। काउंटर दाखिल करने का कोई सवाल ही नहीं है। आपको ट्रिब्यूनल का गठन करना है बस इतना ही। वकील अमित साहनी की एक रिट याचिका पर चीफ जस्टिस रमना, जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नागेश्वर राव की एक विशेष पीठ अगले 13 सितंबर को मामले की सुनवाई करेगी, साथ ही देश भर के ट्रिब्यूनल में नियुक्तियों और ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 की वैधता को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं की भी सुनवाई करेगी।

इसके पहले उच्चतम न्यायालय ने पहले अधिनियम के लागू होने के 4 साल बाद भी सीजीएसटी अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन नहीं करने के लिए केंद्र की खिंचाई की थी। पीठ ने यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से पेश एसजी मेहता को जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन के मुद्दे पर अदालत में वापस आने के लिए कहा था। चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को बताया था, “सीजीएसटी अधिनियम लगभग 4 साल पहले लागू हुआ था, आप किसी भी अपीलीय न्यायाधिकरण को बनाने में असमर्थ रहे हैं।

 (जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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