Tuesday, March 5, 2024

झारखंड: भूख से मौत के मामले में एनएचआरसी ने एक लाख रूपये मुआवजे का दिया आदेश

झारखंड की पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में 22 लोगों की भूख से मौत होने का आरोप तत्कालीन विपक्ष व गैर-सरकारी संगठन ‘भोजन का अधिकार अभियान’ के कार्यकर्ताओं ने लगाया था, जिसमें 21 अक्तूबर, 2017 को धनबाद जिला के रिक्शा चालक वैद्यनाथ दास की भूख से हुई मौत भी शामिल थी। हालांकि तत्कालीन झारखंड सरकार ने ही नहीं बल्कि वर्त्तमान झारखंड सरकार ने भी इन तमाम मौतों के पीछे बीमारी को ही जिम्मेदार ठहराया है। झारखंड की वर्तमान हेमंत सोरेन की सरकार में 5 मार्च, 2020 को विधानसभा में भाकपा (माले) के विधायक विनोद कुमार सिंह के पिछली सरकार में भूख से हुई मौत के प्रश्न के जवाब में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री डॉक्टर रामेश्वर उरांव ने लिखित जवाब दिया था कि पिछली सरकार में एक भी मौत भूख से नहीं हुई थी।

मालूम हो कि 21 अक्तूबर, 2017 को लगभग 40 वर्षीय रिक्शा चालक वैद्यनाथ दास की मौत भूख से होने की खबर झारखंड के तमाम अखबारों में प्रमुखता से छपी थी। समाचारपत्र ‘दैनिक भास्कर’ में छपी खबर को आधार बनाकर ‘मानवाधिकार जन निगरानी समिति’ के झारखंड राज्य संयोजक ओंकार विश्वकर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में एक आवेदन देकर पूरे मामले की विशेष टीम द्वारा न्यायिक जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को 20 लाख रूपये मुआवजा देने की मांग 22 अक्तूबर, 2017 को की थी।

ओंकार विश्वकर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दिये आवेदन में बताया था कि ‘यहां के झरिया इलाके में राशन कार्ड नहीं बनने के कारण आर्थिक तंगी और भूख से 40 वर्षीय व्यक्ति वैद्यनाथ दास की मृत्यु हो गयी। मृतक की पत्नी ने बताया कि हाल के दिनों में स्थिति यह हो गयी थी कि अगर सुबह खाना बनता तो शाम को नहीं बन पाता था। कभी-कभार ही दोनों वक्त खाना बनता था। बच्चे भूख से बिलखते रहते थे। उनका पति असहाय पड़ा रहता था। पहले उनके पति के बड़े भाई जागो रविदास के नाम से राशन कार्ड था। उसी कार्ड में इनके पूरे परिवार का नाम था। 4 वर्ष पहले उनकी मृत्यु हो गयी थी। मृत्यु के एक-दो महीने बाद राशन मिलना बंद हो गया था। बेटे के साथ स्थानीय वार्ड पार्षद कार्यालय का चक्कर लगाकर वह थक गयी थी, लेकिन राशन कार्ड नहीं बना। 10 दिनों पूर्व उसने ऑनलाइन आवेदन भी दिया था। राशन कार्ड नहीं होने के कारण बीपीएल लिस्ट से भी उनका नाम कट गया था। पत्नी का कहना था कि अगर नियमित रूप से राशन मिलता, तो उसका पति आज जीवित होते।’

ओंकार विश्वकर्मा के आवेदन को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी गंभीरता से लेते हुए वाद संख्या- 1356/34/4/2017 के बतौर पंजीकृत करते हुए तत्कालीन धनबाद जिला उपायुक्त से स्पष्टीकरण मांगा, जिसके जवाब में तत्कालीन धनबाद जिला उपायुक्त आंजनेयुलु दोड्डे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को बताया कि ’21 अक्तूबर, 2017 को विशिष्ट अनुभाजन अधिकारी (धनबाद), अनुमंडल पदाधिकारी (धनबाद) व अंचल अधिकारी (झरिया) एवं 22 अक्तूबर, 2017 को अतिरिक्त निदेशक, खाद्य एवं उपभोक्ता निदेशालय (रांची) द्वारा मृतक वैद्यनाथ दास, पिता-बाबूलाल दास, उम्र लगभग 43 वर्ष, नीचे धौड़ा, भालगाड़ा, झरिया (धनबाद) की मृत्यु के संबंध में उनके घर जाकर जांच की गयी। जांच में पाया गया कि वैद्यनाथ दास की मृत्यु भूख के कारण नहीं बल्कि अस्वस्थता (बीमारी) के कारण हुई है।

ओंकार विश्वकर्मा, मानवाधिकार कार्यकर्ता।

जांच के क्रम में परिवार के सदस्यों द्वारा जांच समिति को बताया गया कि वह एक माह से बीमार था। वैद्यनाथ दास की पत्नी पार्वती देवी ने वैद्यनाथ दास की मृत्यु के 4 दिन पहले राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया था, जिसके आधार पर 25 अक्तूबर, 2017 को राशन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया है। वैद्यनाथ दास के शव की उनके परिवार के किसी सदस्य अथवा किसी जनप्रतिनिधि द्वारा पोस्टमार्टम कराने की मांग नहीं की गयी थी, इसलिए बिना पोस्टमार्टम के ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया और मृतक के परिवार को 20 हजार रूपये बतौर मुआवजा भी दिया गया।’

धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त ने वैद्यनाथ दास की मृत्यु का करण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अस्वस्थता (बीमारी) तो बताया, लेकिन कौन सी बीमारी से इनकी मृत्यु हुई, यह नहीं बता पाया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने धनबाद उपायुक्त द्वारा वैद्यनाथ दास की मृत्यु के कारण के बतौर पार्टिकुलर बीमारी नहीं बताने को मानवाधिकार उल्लंघन माना और झारखंड के मुख्य सचिव को 9 मार्च, 2020 को आदेश दिया कि मृतक के परिजन को एक लाख रूपया मुआवजा देकर भुगतान के प्रूफ के साथ रिपोर्ट करें, लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश का पालन 8 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक नहीं हुआ।

अंततः 29 दिसंबर, 2020 को पुनः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के अतिरिक्त मुख्य सचिव व गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन के सचिव को 4 सप्ताह के अंदर वैद्यनाथ दास के परिजन को एक लाख रूपया बतौर मुआवजा देकर भुगतान के प्रूफ के साथ रिपोर्ट करने का आदेश दिया है।

(रूपेश कुमार सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल झारखंड के रामगढ़ में रहते हैं।)

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