Saturday, January 22, 2022

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जेट को मिल गया नया मालिक, सरकारी कंपनियों को बचाने में नहीं है सरकार की रुचि

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आर्थिक मंदी और बढ़ती बेरोज़गारी के बीच एक अच्छी खबर ये है कि लंदन की एसेट मैनेजमेंट कंपनी कालरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात के आंत्रप्रेन्योर मुरारी लाल जालान की कंपनी कंसोर्टियम जेट एयरवेज के नए मालिक हैं। जेट एयरवेज को कर्ज देने वाली क्रेडिटर्स कमेटी ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। जेट एयरवेज, भारत की सबसे पुरानी निजी एयरलाइंस कंपनी है, जिसने पिछले साल 17 अप्रैल को परिचालन बंद कर दिया था।

वैश्विक एयरलाइन उत्पाद रेटिंग चार्ट में सबसे ऊपर तक पहुंचने वाली कैसे बनीं भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन? जेट एयरवेज़ इंडिया लिमिटेड 1 अप्रैल 1992 में बनी थी। महज़ चार जहाज़ों से शुरू हुई कंपनी 2012 में देश की सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी बन गई। जेट एयर से मेरा भी पुराना नाता है। 2002 में जब मैंने  काम शुरू किया तो एयर इंडिया और जेट एयरवेज ही थी। तब उतनी प्रतिस्पर्धा नहीं थी। यहां तक की 2009 में जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में थी, तब भी जेट एयरवेज अपने प्रगति के रास्ते पर थी।  फिर ऐसा क्या हुआ कि आसमान में राज करने वाली कंपनी अचानक धराशाई हो गई?

दरअसल अपनी बड़ी प्रतिद्वंद्वी एयरलाइन इंडिगो (Indigo) से  मुकाबले में जेट  एयरवेज प्रति किलोमीटर कुल 80 पैसे की दर से टिकट बेचने लगी। स्पष्ट है कि जेट का यह प्रयास घातक साबित हुआ और कंपनी को अपनी लागत से कम पर टिकट बेचने से नुकसान होने लगा। फिर 2017 के मध्य में ईंधन की कीमतें (Fuel prices) बढ़नी शुरू हुईं और पूरे साल बढ़ती रहीं,  इससे पूरी एविएशन इंडस्ट्री (Aviation industry) हिल गई, लेकिन जेट तो बर्बाद ही हो गई। कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल को हटा दिया गया, जो ढाई दशक से कंपनी का संचालन कर रहे थे। सबसे बड़ा कारण ईंधन की क़ीमतों का महंगा होना और भारतीय मुद्रा का कमज़ोर होना रहा।

2018 में जेट के सामने क़र्ज़ का संकट स्वागत में खड़ा था। अपने आर्थिक संकट से निकलने के लिए जेट एयरवेज ने कई कदम उठाए। एजेंट कमिशन बंद किया। यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओ में कटौती की। यात्री के सामान की सीमा भी कम कर दी। पायलट को 20 दिन की सैलेरी पर रखा। बहुत से कर्मचारियों की छटनी की। एतिहाद एयरवेज़ से बात की, जिसके पास जेट एयरवेज़ का 24 फ़ीसदी शेयर है। बै

ंकों से मदद मांगी। सरकार से भी मदद मांगी। हालांकि भारत सरकार के दखल से SBI ने माल्या समेत कई और कंपनियों का 2.41 लाख करोड़ का लोन राइट ऑफ किया। तब सरकार 800 करोड़ का इमरजेंसी फंड दे सकती थी, जेट के स्टेक ख़रीदे भी जा सकते थे। जो सरकार तीन हज़ार करोड़ रुपये की मूर्ती लगा सकती है, वो सरकार  23 हज़ार लोगों को बेरोजगार होने से बचाने  के लिए अस्थायी हिस्सेदारी ले सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जेट एयरवेज अपने संकट से निकलने में नाकामयाब रही।

बर्बादी के इस क्रम में पहले कर्मचारियों का वेतन मिलना बंद हुआ और फिर एक-एक कर जेट के सभी विमान बंद हुए और आखिरकार 17 अप्रैल बुधवार रात दस बजे जेट एयरवेज ने अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट राजासांसी से मुंबई के लिए आखिरी उड़ान भरी और फिर जो हुआ वो कभी सोचा नहीं था। बेहद रुला देने वाली खबर सामने आई। जेट एयरवेज़ कंपनी ने अपने 123 विमानों का परिचालन बंद कर दिया।

कंपनी 110 करोड़ डॉलर के घाटे में चल रही थी, जबकि मौजूदा समय में कंपनी की हालात ये है कि कंपनी पर 70,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। कर्मचारियों का वेतन भी नहीं मिला है। विमान पट्टेदारों का बकाया और रद हुई उड़ानों के एवज में यात्रियों का करोड़ों रुपये का रिफंड भी बकाया भुगतान करना है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

अब सवाल देश की जनता के सामने ये है कि भारत सरकार इस भारी आर्थिक संकट में पब्लिक सेक्टर कंपनियों को कैसे बचा पाएगी? एयर इंडिया खुद 50 हज़ार करोड़ रुपए के क़र्ज़ में है। BSNL, IOCL, BPCL, HPCL, GAIL, BEHL, BEMLONGC, NTPC, HAL जैसी कंपनियों को कैसे बचाएगी? जो 2021 करोड़ खर्च कर 55 महीने में 92 देश के दौरे करने के बाद भी एक कंपनी को डूबने से बचाने के लिए एक इंवेस्टर नहीं ला सके।

  • आरिफ सिद्दीकी

(लेखक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और इलाहाबाद में रहते हैं।)

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