झारखंड के सीएम ने मोदी को दिलाई जनसरोकारों की याद, गोदी मीडिया मोदी से सवाल पूछने के बजाए हेमंत पर बिफरा

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हेमंत सोरेन ने मोदी से हुई बात पर ट्वीट कर उनको ‘गरिमामय’ तरीके से जन सरोकारों का आईना दिखाया है। हेमंत सोरेन ने अपनी ‘गरिमामय’ अभिव्यक्ति से कई परतें उघाड़ दीं। पहली परत है लोकप्रियता का झुनझुना! अभी तक सभी राजनीति के सूरमा मोदी की लोकप्रियता के आगे नतमस्तक होकर उन्हें महान बताकर मीडिया की मंडी में मुनाफ़ाखोरी कर रहे हैं। लोकप्रियता एक पक्ष है पर सार्थक होने के लिए ‘कार्यक्षमता और प्रशासन की दक्षता’ अनिवार्य है। लोकप्रियता धरी रह जाती है जब तंत्र चलाना आपको न आये। मोदी की तन्त्र चलाने की नाकामी को हेमंत सोरेन ने सबके सामने रख दिया है।

गुजरात मॉडल की दक्षता के घोड़े पर सवार होकर मोदी ने सख्त शासक की छवि बनाई। पर उस छवि में किसी ने झांककर नहीं देखा। थोड़ा सा गौर करेंगे तो काला सच सामने आकर खड़ा हो जाता है। गुजरात प्रशासन का काला सच है प्रतिरोध को कुचलना, जासूसी करना, झूठ के तंत्र को खड़ा करना और राज्य को हत्यारा बनाना। प्रतिरोध करने वालों की हत्याओं को मोदी ने गुजरात सरकार की ‘रणनीति’ के तौर पर स्थापित किया। बाकी जो विकास था वो मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधारों की वजह से आया। पूंजीपतियों के दरबार में बैठकर मोदी ने राज्य को बेच दिया। 15 साल शासन करने के बाद भी मोदी ने कोई तन्त्र निर्माण नहीं किया सिवाय छद्म राष्ट्रवाद और मुसलमानों के खिलाफ़ नफ़रत के, जिसमें बर्बाद हो गया हिन्दू!

पर आज श्मशानों में जलती हुई हिन्दुओं की चिताओं ने मोदी की कलई खोल दी। साधारण प्रशासनिक समन्वय की काबलियत भी इस व्यक्ति में नहीं है। तन्त्र को मार रहा है, लोक का जनसंहार कर रहा है। आज यह बात हर व्यक्ति को पता है पर हेमंत सोरेन का ट्वीट इसलिए अहम है, क्योंकि वो ट्वीट उन्होंने बतौर एक मुख्यमंत्री के नाते प्रधानमंत्री के खोखलेपन को उजागर करने के लिए किया है।

बड़ी शालीनता से उन्होंने कहा ‘प्रधानमंत्री सिर्फ़ अपने मन की बात करते हैं’। इसके मायने हैं कि आत्म दर्प में डूबा यह व्यक्ति किसी के दुःख, दर्द, तकलीफ़, प्रधानमंत्री की जवाबदेही से अनभिज्ञ हमेशा आत्म स्तुति में लिप्त सिर्फ़ विकारी संघ का प्रचारक है। संस्कृति के खोल में छिपकर संघ श्रेष्टतावाद और व्यक्तिवाद के विकार को फैलाता है।

हेमंत सोरेन का ट्वीट गोदी मीडिया को प्रधानमंत्री का अपमान लगा। वो चीख-चीख कर इसे ओछी राजनीति बताने लगे। कोरोना काल में इस तरह की राजनीति नहीं करने की सलाह दे दी। पर संकट निवारण के लिए संकट से रूबरू होना समाधान की पहली अनिवार्यता है, जिससे मोदी भाग रहे हैं।। मुख्यमंत्री पद की गरिमा रखते हुए हेमंत सोरेन ने मोदी को जन सरोकारों को आईना दिखाया है यह रचनात्मक राजनीति का प्रेरक उदाहरण है। इस पहल के लिए हेमंत सोरेन को साधुवाद!

  • मंजुल भारद्वाज

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कवि हैं।)

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